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सहारा रेगिस्तान में भी गिर चुकी है बर्फ, जानें कैसे हुआ था यह चमत्कार?

Sahara Desert Snowfall: सहारा रेगिस्तान में भी कई बार बर्फबारी हो चुकी है. हालांकि यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन यह मुमकिन है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का विज्ञान.

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  • सहारा रेगिस्तान के ऐन सेफ्रा में दुर्लभ बर्फबारी हुई।
  • यह 1979 समेत 2016-2022 में कई बार दर्ज की गई।
  • यूरोप से ठंडी हवा और नमी मिलकर बर्फबारी कराती है।
  • हालांकि, तेज धूप के कारण बर्फ जल्दी पिघल जाती है।

Sahara Desert Snowfall: सहारा रेगिस्तान को धरती के सबसे गर्म औरतों की जगह में से एक माना जाता है लेकिन इस बड़े रेगिस्तान में भी बर्फबारी हुई है. हालांकि यह सुनने में काफी नामुमकिन लगता है लेकिन सहारा के कुछ हिस्सों में बर्फबारी दर्ज की गई है. इससे एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है जब आमतौर पर सुनहरे दिखने वाले रेगिस्तान पर सफेद बर्फ की चादर बिछ जाती है.

सहारा में बर्फबारी कब हुई?

बर्फबारी की सबसे खास घटनाओं में से एक 18 फरवरी 1979 को अल्जीरिया के शहर ऐन सेफ्रा में हुई थी. इसे अक्सर सहारा का प्रवेश द्वार कहा जाता है. इस घटना ने सबका ध्यान खींचा क्योंकि भीषण गर्मी  वाले इलाके में बर्फबारी होना काफी असामान्य बात है.

शहर के कुछ हिस्सों में 2016, 2017, 2018, 2021 और 2022 में भी बर्फबारी देखी गई थी. यह घटनाएं दिखती है कि रेगिस्तान की भीषण गर्मी के बावजूद सही मौसम की स्थिति में तापमान के काफी कम होने और बर्फबारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. 


सहारा रेगिस्तान में भी गिर चुकी है बर्फ, जानें कैसे हुआ था यह चमत्कार?

गर्म रेगिस्तान में बर्फबारी कैसे हो सकती है? 

इसका जवाब वायुमंडलीय स्थिति के मेल में छिपा है. सहारा में साल के ज्यादातर समय काफी ज्यादा गर्मी रहती है लेकिन दिन और रात के समय में खासकर सर्दियों में काफी ज्यादा अंतर आ सकता है. एक बड़ी वजह यूरोप से आने वाली असामान्य रूप से ठंडी हवा है. यूरोप के ऊपर बनने वाले हाई प्रेशर सिस्टम ठंडी हवा को सामान्य से ज्यादा दक्षिण की तरफ धकेल सकते हैं. इससे यह उत्तरी अफ्रीका तक पहुंच जाती है. जब यह ठंडी हवा पर्याप्त नमी के साथ मिलती है तो बर्फबारी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं.

तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे गिर सकता है 

सहारा में सबसे गर्म समय के दौरान दिन का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है. लेकिन सर्दियों की रातें बिल्कुल अलग हो सकती हैं. रेगिस्तान में बादल काफी कम होते हैं, इससे सतह के पास जमा गर्मी सूरज डूबने के बाद तेजी से बाहर निकल जाती है.

यही वजह है कि सर्दियों की रातों में तापमान तेजी से गिर सकता है. ऐन सेफ्रा के आस-पास बर्फबारी की कुछ घटनाओं के दौरान तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे गिरकर लगभग - 2 डिग्री सेल्सियस से -3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.

अगर तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे गिरने पर हवा में नमी मौजूद हो तो पानी की बूंद बर्फ के क्रिस्टल में बदल सकती है. यह क्रिस्टल आपस में जुड़कर बर्फ के टुकड़े बना सकते हैं और आखिरकार बर्फबारी के रूप में जमीन पर गिर सकते हैं. 

एटलस पहाड़ों की भूमिका 

भूगोल भी एक और बड़ी वजह है कि ऐन सेफ्रा में कभी-कभी बर्फबारी हो सकती है. यह शहर एटलस पर्वत क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर से आने वाली नमी वाली हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर की तरफ उठती है. जैसे-जैसे हवा ऊंचाई पर जाती रहती है ठंडी हो जाती है. जब तापमान काफी कम हो जाता है तो हवा में मौजूद नमी बर्फ के क्रिस्टल में बदल सकती है. 


सहारा रेगिस्तान में भी गिर चुकी है बर्फ, जानें कैसे हुआ था यह चमत्कार?

बर्फ जल्दी क्यों पिघल जाती है?

भले ही रेगिस्तान में बर्फ जम जाए लेकिन वह आमतौर पर ज्यादा देर तक नहीं टिकती. सहारा में तेज धूप पड़ती है और सूरज उगने के बाद तापमान तेजी से बढ़ सकता है. जैसे-जैसे जमीन गर्म होती है बर्फ पिघलने या फिर भाप बनकर उड़ने लगती है. 

सर्दियों में जमा देने वाली रात और दिन के समय अपेक्षाकृत गर्म मौसम यह रेगिस्तानी माहौल की एक खास बात है. यही वजह है कि बर्फबारी देखने में तो अनोखी लग सकती है लेकिन यह काफी कम समय के लिए होती है. 

यह भी पढ़ें: कैसे होता है ट्रांसजेंडर बच्चे का जन्म, जानें इसके पीछे का साइंस?

क्या जलवायु परिवर्तन इसके लिए जिम्मेदार है? 

जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के पैटर्न को बदल दिया है. इसी के साथ वैज्ञानिक लगातार इस बात पर ध्यान लगा रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग किस तरह से मौसम की चरम और असामान्य घटनाओं पर असर डाल सकती है. हालांकि सिर्फ एक बार हुई बर्फबारी को जलवायु परिवर्तन का सबूत नहीं माना जा सकता. 

सहारा में बर्फबारी को कई स्थितियों के एक साथ होने के नतीजे के तौर पर बेहतर समझ जा सकता है, ठंडी हवा, नमी, ऊंचाई और अनुकूल वायुमंडलीय स्थिति. यह घटना भले ही दुर्लभ हो लेकिन वैज्ञानिक रूप से मुमकिन है.

यह भी पढ़ें: IMF के पास इतना पैसा कहां से आता है, कहां से होती है कमाई?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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