एक्सप्लोरर

House Names UK: इस देश में हाउस नंबर नहीं हाउस नेम का होता है इस्तेमाल, जानें क्या है इस सिस्टम के पीछे की वजह?

House Names UK: दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां पर घरों के नंबर नहीं बल्कि नाम होते हैं. आइए जानते हैं कौन सी है वह जगह और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत.

House Names UK: जरा सोचिए कि आप किसी को अपना पता बताते हुए अपने घर का नंबर नहीं बल्कि घर का नाम बताएं. यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन यूनाइटेड किंगडम और आयरलैंड जैसी जगहों पर यह बिल्कुल भी अजीब नहीं है. यहां पर कई इलाकों में घरों की पहचान आज भी आधिकारिक तौर पर नंबरों के बजाय नामों से होती है.  

कहां से हुई इसकी शुरुआत? 

घरों के नाम रखने की यह प्रथा सदियों पुरानी है और इसकी शुरुआत असल में आमिर जमीदारों और कुलीन लोगों के बीच हुई थी. बड़ी-बड़ी जागीरों, किलों और आलीशान हवेलियों के नाम अक्सर ऐसे रखे जाते थे जो उनके परिवार की वंशावली, रुतबे या जगह को दर्शाते थे. 'मैनर हाउस' या 'जागीर' जैसे नाम सिर्फ पहचान बताने के लिए नहीं थे बल्कि वह प्रतिष्ठा के प्रतीक भी थे. समय के साथ यह परंपरा आम घरों तक भी पहुंच गई और घरों के नाम रखना लोगों के लिए अपनी संपत्ति को एक खास पहचान देने का तरीका बन गया.

नाम पर निर्भर थे लोग

दिलचस्प बात यह है कि घरों को नंबर देने का सिस्टम हमेशा से मौजूद नहीं था. 18 वीं सदी में जब तक घरों को नंबर देने के औपचारिक कानून नहीं बने थे तब तक लोग पते ढूंढने के लिए पूरी तरह से घरों के नाम पर ही निर्भर थे. इन नामों की मदद से समुदाय का कामकाज आसानी से चलता था.

पहचान और रुतबे का प्रतीक 

घर का नाम रखना सिर्फ सुविधा की बात नहीं है बल्कि यह घर के व्यक्तित्व को भी दर्शाता है. नंबर वाले घर के मुकाबले नाम वाला घर अक्सर ज्यादा अनोखा और यादगार लगता है. ग्रामीण इलाकों में यह एक खास रुतबे या फिर आकर्षण से भी जुड़ा होता है.

इस सिस्टम के आज भी मौजूद होने की सबसे बड़ी वजह वहां की भौगोलिक बनावट है. यूनाइटेड किंगडम और आयरलैंड के ग्रामीण इलाकों में घर अक्सर सड़कों के किनारे एक लाइन में बने होने के बजाय बड़े-बड़े इलाकों में दूर-दूर तक फैले होते हैं. अब क्योंकि घर अलग-अलग समय पर और बिना किसी तय पैटर्न के बनाए जाते हैं, इस वजह से उन्हें क्रम से नंबर देना काफी मुश्किल हो जाता है. अगर दो मौजूद घरों के बीच कोई नया घर बन जाए तो इससे नंबरों का पूरा सिस्टम ही बिगड़ सकता है.

गांव में सड़कों के नाम ना होना 

कई छोटे-छोटे गांवों में सड़कों के कोई साफ नाम तय नहीं होते हैं. जब सड़कें ही नहीं होती तो घरों के नंबर का भी कोई मतलब नहीं रह जाता. ऐसे मामलों में घर का नाम ही डाक सेवा, आने जाने वालों और यहां तक की आपातकालीन सेवाओं के लिए भी किसी प्रॉपर्टी को ढूंढने का मुख्य जरिया बन जाता है.

यह भी पढ़ें:  किस देश में चलता है सबसे महंगा इंटरनेट, जानें क्या है इतनी ज्यादा कीमत की वजह?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

किसी को हिरासत में कितनी देर रख सकती है पुलिस, क्या है कानून?
किसी को हिरासत में कितनी देर रख सकती है पुलिस, क्या है कानून?
काव्या मारन का होने वाला पति कितना अमीर, जानें उनकी कमाई?
काव्या मारन का होने वाला पति कितना अमीर, जानें उनकी कमाई?
लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिरकर हुई थी इस मुगल बादशाह की मौत, क्यों हुआ था ऐसा?
लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिरकर हुई थी इस मुगल बादशाह की मौत, क्यों हुआ था ऐसा?
मुसलमान अगर हिंदू बन जाए, क्या तब भी मिलेगा आरक्षण का लाभ?
मुसलमान अगर हिंदू बन जाए, क्या तब भी मिलेगा आरक्षण का लाभ?

वीडियोज

'इच्छाधारी बीवी' को सजा-ए-मौत!
विदेश से 'मंतर' अराजक 'जंतर'
संविधान नहीं..सड़कतंत्र पर भरोसा ?
CEC पर दिल्ली में NON-STOP बवाल...तख्तापलट का ट्रेलर?
Bollywood News: 'रामायण' का हॉलीवुड में डंका, 3 घंटे 15 मिनट की होगी महागाथा! (16.10.26)

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'उनका भी मौलिक अधिकार', बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक की मांग पर SC की अहम टिप्पणी
'उनका भी मौलिक अधिकार', बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक की मांग पर SC की अहम टिप्पणी
अनंत सिंह के 9 लोगों की हत्या वाले बयान पर BJP की प्रतिक्रिया, जानें क्या कहा?
अनंत सिंह के 9 लोगों की हत्या वाले बयान पर BJP की प्रतिक्रिया, जानें क्या कहा?
'जेलर 2' ने रिलीज के दूसरे ही दिन बनाया साल 2026 का इतना बड़ा रिकॉर्ड, बनी तमिल की 5वीं सबसे बड़ी फिल्म
'जेलर 2' ने रिलीज के दूसरे दिन बनाया 2026 का बड़ा रिकॉर्ड, बनी तमिल की 5वीं सबसे बड़ी फिल्म
लालकृष्ण आडवाणी की अब कैसी है तबियत? हॉस्पिटल से आया हेल्थ अपडेट
लालकृष्ण आडवाणी की अब कैसी है तबियत? हॉस्पिटल से आया हेल्थ अपडेट
48 साल का क्रिकेटर बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर, अजीत अगरकर की लेगा जगह!
48 साल का क्रिकेटर बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर, अजीत अगरकर की लेगा जगह!
कर्ज के लिए मोहताज पाक बनेगा IMF-वर्ल्ड बैंक का अध्यक्ष, 1953 के बाद पहली बार मौका
कर्ज के लिए मोहताज पाक बनेगा IMF-वर्ल्ड बैंक का अध्यक्ष, 1953 के बाद पहली बार मौका
6 हफ्तों से ज्यादा खुजली और चकत्ते? हो सकती है बड़ी बीमारी 
6 हफ्तों से ज्यादा खुजली और चकत्ते? हो सकती है बड़ी बीमारी 
किसानों की सबसे ज्यादा कमाई कहां, जानें यूपी-पंजाब जैसे राज्यों का हाल
किसानों की सबसे ज्यादा कमाई कहां, जानें यूपी-पंजाब जैसे राज्यों का हाल
Embed widget