क्या स्वीडन की तरह भारत भी विदेशी नागरिकों को दे सकता है सर्वोच्च सम्मान, जानें क्या है नियम
PM Modi In Sweden: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन में सर्वोच्च सम्मान दिया गया. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या स्वीडन की तरह भारत में भी विदेशी नागरिकों को सर्वोच्च सम्मान दिया जा सकता है.

- प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन में 'पोलर स्टार' सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए।
- भारत विदेशी नागरिकों को भी भारत रत्न जैसे सर्वोच्च पुरस्कार दे सकता है।
- राष्ट्रीयता संबंधी कोई कानूनी या संवैधानिक बाधा पुरस्कारों के लिए नहीं है।
- खान अब्दुल गफ्फार खान, नेल्सन मंडेला को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
PM Modi In Sweden: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही में स्वीडन की यात्रा के दौरान गोथेनबर्ग में सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें उनके पांच देशों के अंतरराष्ट्रीय दौरे के हिस्से के रूप में दिया गया. स्वीडिश सरकार ने उन्हें "रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस" से सम्मानित किया. इसे स्वीडन के सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है. इसके बाद कई लोगों के मन में एक सवाल चल रहा है कि क्या भारत भी इसी तरह विदेशी नागरिकों को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान दे सकता है? आइए जानते हैं.
भारत विदेशी नागरिकों को अपने सर्वोच्च पुरस्कार दे सकता है
भारत की सम्मान प्रणाली विदेशी नागरिकों को देश के शीर्ष नागरिक पुरस्कार प्राप्त करने की अनुमति देती है. इनमें भारत रत्न और पद्म पुरस्कार शामिल हैं. ऐसा कोई संवैधानिक या फिर कानूनी प्रतिबंध नहीं है जो यह कहता हो कि ये सम्मान सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही दिए जा सकते हैं. इन पुरस्कारों को कंट्रोल करने वाले आधिकारिक नियमों में साफ तौर से यह कहा गया है कि राष्ट्रीयता एक अनिवार्य शर्त नहीं है. इसका मतलब है कि किसी भी देश के व्यक्तियों को भारत द्वारा सम्मानित किया जा सकता है. बस उन्होंने मानवता, शांति, कूटनीति या फिर भारत के हितों के लिए जरूरी माने जाने वाले क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया हो.
क्या कहते हैं नियम?
भारत रत्न को कंट्रोल करने वाले नियम खास तौर से यह बताते हैं कि यह पुरस्कार जाति, पेशे, लिंग, पद या राष्ट्रीयता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के दिया जा सकता है. आसान शब्दों में कहें तो इस पुरस्कार के लिए पात्र होने के लिए किसी भी व्यक्ति के पास भारतीय नागरिकता होनी जरूरी नहीं है.
भारत रत्न किसी भी मानवीय प्रयास के क्षेत्र में असाधारण सेवा या फिर सर्वोच्च स्तर के प्रदर्शन के लिए दिया जाता है. विदेशी नागरिकों के मामले में यह पुरस्कार आमतौर पर उन लोगों के लिए होता है जिन्होंने वैश्विक शांति, मानवीय कार्यों या फिर भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में योगदान दिया हो.
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भारत रत्न का चयन कैसे किया जाता है?
भारत रत्न के लिए चयन प्रक्रिया कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से अलग है. पद्म पुरस्कारों के उलट भारत रत्न के लिए कोई औपचारिक सार्वजनिक नामांकन प्रक्रिया नहीं है. इस सम्मान के लिए सिफारिश सीधे प्रधानमंत्री द्वारा भारत के राष्ट्रपति को की जाती है. इस प्रक्रिया के लिए गृह मंत्रालय के अंतर्गत किसी अलग समिति की जरूरत नहीं होती. प्रधानमंत्री की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाती है.
किन विदेशी नागरिकों को भारत रत्न मिला है?
भारत ने अपने इतिहास में काफी कम विदेशी मूल की हस्तियों को भारत रत्न से सम्मानित किया है. खान अब्दुल गफ्फार खान को 1987 में यह सम्मान दिया गया था. पाकिस्तान के नागरिक और फ्रंटियर गांधी के नाम से मशहूर खान अब्दुल गफ्फार खान को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और अहिंसा के प्रति उनके प्रतिबद्धता के वजह से पहचाना गया था.
भारत रत्न पाने वाली एक और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हस्ती नेल्सन मंडेला थे. उन्हें 1990 में यह सम्मान मिला था. मंडेला को रंगभेद के खिलाफ उनके वैश्विक संघर्ष और शांति के साथ-साथ मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया था.
इसी के साथ मदर टेरेसा को भी 1980 में भारत रत्न दिया गया था. हालांकि उनका जन्म मूल रूप से अल्बानिया में हुआ था लेकिन यह पुरस्कार पाने से पहले उन्होंने भारत की नागरिकता ले ली थी.
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