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किस देश में चलता है सबसे महंगा इंटरनेट, जानें क्या है इतनी ज्यादा कीमत की वजह?

Expensive Internet Countries: दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं जहां पर इंटरनेट की कीमतें काफी ज्यादा हैं. आइए जानते हैं क्या है इतनी ज्यादा कीमत के पीछे की वजह.

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  • यूएई प्रति एमबीपीएस इंटरनेट के लिए सबसे महंगा देश है।
  • सोलोमन आइलैंड्स मासिक इंटरनेट खर्च में दुनिया में सबसे ऊपर।
  • जिम्बाब्वे और घाना जैसे देश भी इंटरनेट कीमतों में ऊंचे।
  • बुनियादी ढांचे की लागत, कम प्रतिस्पर्धा से इंटरनेट महंगा।

Expensive Internet Countries: आज की डिजिटल दुनिया में इंटरनेट का एक्सेस लगभग उतना ही जरूरी है जितनी बिजली. लेकिन जहां कुछ देशों में सस्ती और तेज कनेक्टिविटी मिलती है वहीं कुछ देश ऐसे भी है जहां पर ऑनलाइन रहने के लिए काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है. ताजा डेटा के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात और सोलोमन आइलैंड जैसे देश इंटरनेट एक्सेस के मामले में दुनिया के सबसे महंगे देश हैं.

स्पीड के हिसाब से सबसे महंगे 

जब प्रति एमबीपीएस कीमत की बात आती है तो यूएई इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. यहां यूजर्स को प्रति एमबीपीएस लगभग 4.31 डॉलर चुकाने पड़ते हैं. भारतीय मुद्रा में यह रकम 360 रुपये की हो जाएगी. इससे यह हाई स्पीड ब्रॉडबैंड के लिए सबसे महंगे देशों में से एक बन जाता है. बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शहर होने के बावजूद भी यहां पर कीमतें ज्यादा होने की मुख्य वजह कम मुकाबला है. दरअसल बाजार पर सिर्फ कुछ ही बड़ी टेलीकॉम कंपनियों का कब्जा है. इस वजह से यहां कीमतें काफी ज्यादा रहती हैं. 

सोलोमन आईलैंड्स 

अगर हम कुल मासिक खर्च पर नजर डालें तो सोलोमन आईलैंड्स पहले नंबर पर आता है. यह इंटरनेट का खर्च हर महीने 457 डॉलर तक हो सकता है. भारतीय मुद्रा में यह रकम ₹38000 के करीब होती है. यह आम यूजर्स के लिए काफी ज्यादा महंगा है. इसकी मुख्य वजह भौगोलिक स्थिति है. एक दूर दराज के द्विपीय देश होने की वजह से इसे इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और उसे बनाए रखने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कनेक्टिविटी काफी हद तक समुद्र के नीचे बिछी केबल्स और सैटेलाइट लिंक पर ही निर्भर करती है.

लिस्ट में शामिल दूसरे देश 

घाना और जिम्बाब्वे जैसे देश भी इंटरनेट की कीमतों के मामले में काफी ऊपर हैं. जिम्बाब्वे में मोबाइल डेटा की कीमत 43.75 डॉलर प्रति जीबी तक हो सकती है.  यह इसे दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक बनाता है. यहां तक कि स्विट्जरलैंड भी इसी लिस्ट में शामिल है. 

क्या है इतनी ज्यादा कीमतों के पीछे की वजह? 

इंटरनेट महंगा होने की सबसे बड़ी वजह इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत है. पहाड़ों, महासागरों या फिर दूर दराज के इलाकों में फाइबर ऑप्टिक केबल्स बिछाना काफी ज्यादा महंगा पड़ता है. जिन देशों का इलाका ऊबड़-खाबड़ होता है या फिर जहां आबादी दूर-दूर तक फैली होती है वहां यह लागत और भी ज्यादा बढ़ जाती है. 

इसी के साथ कई देशों में टेलीकॉम सेक्टर पर सिर्फ एक या फिर दो कंपनियों का ही दबदबा होता है. मुकाबला की इस कमी की वजह से सर्विस देने वाली कंपनियां कीमतें ऊंची रख पाती हैं. 

इसी के साथ जिन देशों में सीमा समुद्र से नहीं लगती है फिर जो दूर दराज के द्वीपों पर बसे हैं, वे सीधे तौर पर ग्लोबल इंटरनेट बैकबोन से नहीं जुड़ पाए. उन्हें पड़ोसी देशों या फिर महंगी इंटरनेशनल बैंडविड्थ पर निर्भर रहना पड़ता है.

यह भी पढ़ें: दुनिया में कौन-कौन से मुस्लिम देश भारत के पक्के दोस्त, जानें पाकिस्तान से इनके कैसे ताल्लुक?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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