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Netherlands Prisons: इस देश की जेलों में नहीं है एक भी कैदी, वजह जानकर नहीं होगा यकीन

Netherlands Prisons: दुनिया में एक ऐसा देश भी है जिसकी जेल में कोई कैदी नहीं है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.

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  • नीदरलैंड में कैदियों की संख्या कम हुई, कई जेलें बंद।
  • न्याय प्रणाली ने पुनर्वास और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर जोर दिया।
  • खाली जेलें अब होटल, स्कूल, आवास बन गईं।
  • कर्मचारी बचाने, क्षमता हेतु विदेशी कैदी यहाँ रखे गए।

Netherlands Prisons: नीदरलैंड एक ऐसा देश है जिसकी जेलों में कोई भी कैदी नहीं है. दरअसल यह सच है कि नीदरलैंड में अपराध और कैद में इतनी ज्यादा गिरावट देखने को मिली है कि बीते कुछ सालों में कई जेलों को बंद कर दिया गया या फिर उनका दोबारा से निर्माण किया गया. 

डच जेल इतनी खाली कैसे हो गई?

इसकी सबसे बड़ी वजह पूरी तरह से अपराध की अनुपस्थिति नहीं है. दरअसल न्याय प्रणाली में सुधार के साथ गंभीर आपराधिक अपराधों में निरंतर गिरावट देखने को मिली है. सिर्फ जेल पर निर्भर रहने के बजाय अधिकारी समाज में पुनर्वास और पुनः एकीकरण पर जोर देते हुए अपराधियों के लिए कुछ वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. 

जेल की जगह इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग 

सबसे जरूरी परिवर्तनों में से कुछ अपराधियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक टखने की निगरानी का इस्तेमाल है. हर दोषी व्यक्ति को जेल भेजने के बजाय अदालतें अपराधियों को कड़ी निगरानी में जेल से बाहर रहने की अनुमति दे सकती हैं.

ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अधिकारियों को अपराधी की गतिविधि पर लगातार नजर रखने में सक्षम बनाते हैं. इससे सार्वजनिक सुरक्षा पक्का करते हुए जेल में भीड़-भाड़ कम होती है. यह प्रणाली अपराधियों को कंट्रोल स्थिति में काम करना जारी रखने और अपने परिवारों का समर्थन करने की भी मंजूरी देती है. 

पुनर्वास प्राथमिकता लेता है 

डच न्याय प्रणाली सिर्फ सजा पर ध्यान देने के बजाय आपराधिक व्यवहार को सही करने पर जोर देती है. अपराधियों को उनकी सजा काटने के बाद समाज में दोबारा से शामिल होने में मदद करने के लिए शिक्षा, परामर्श, कौशल विकास और मनोवैज्ञानिक सहायता का इस्तेमाल किया जाता है.

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जेल बंद करने से करोड़ों रुपयों की बचत 

आपको बता दें कि नीदरलैंड सरकार को जेल बंद करने से सालाना करोड़ों रुपये की बचत होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां एक कैदी को जेल में रखने का औसतन खर्च लगभग ₹25000 प्रतिदिन आता है. इसी के साथ यहां पर ड्रग्स और कुछ और नशीले पदार्थों को लेकर कानून काफी ज्यादा लचीला है. इस वजह से ड्रग्स से जुड़े छोटे-मोटे अपराध और गिरफ्तारियां ना के बराबर ही होती हैं.

खाली जेलों का इस्तेमाल 

इन बड़ी इमारतों को खाली छोड़ने के बजाय इनका इस्तेमाल काफी अलग तरीके से किया जा रहा है. कुछ जेलों को पर्यटकों के लिए होटल और हॉस्टल बना दिया गया है. इसी के साथ बाकी जेल अब स्कूल, अपार्टमेंट परिसर, शरणार्थी आवास केंद्र और सामुदायिक सुविधाओं के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं.

एक अजीब समस्या 

इसी बीच जेल की गिरती आबादी ने एक अलग समस्या भी पैदा कर दी है. दरअसल कई जेल के स्टाफ सदस्यों को सुधार सुविधा बंद होने की वजह से अपनी नौकरी खोने की संभावना का सामना करना पड़ा. मौजूदा जेल क्षमता का इस्तेमाल करने और अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए नीदरलैंड ने नॉर्वे सहित कई पड़ोसी देशों के कैदियों को अंतरराष्ट्रीय समझौतों  के तहत डच जेल में रखा.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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