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Moon Plants: क्या चांद पर पेड़ उगाया जा सकता है, जानें क्या कहता है साइंस?

Moon Plants: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या चांद पर पेड़ उग सकता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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  • चांद पर पौधे उगाना कठिन; नियंत्रित वातावरण में संभव है।
  • वायुमंडल, पानी, पोषक तत्व की कमी, अत्यधिक तापमान बाधा।
  • 2022 में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी में पौधे उगाए।
  • चीन ने 2019 में चांद पर कपास का बीज अंकुरित किया था।

Moon Plants: जैसे-जैसे अंतरिक्ष एजेंसियां चांद पर लंबे समय के मिशन की तैयारी कर रही हैं एक सवाल लोगों के मन में लगातार उत्सुकता जगा रहा है. क्या चांद की सतह पर पेड़ या फिर दूसरे पौधे उग सकते हैं? वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि चांद पर सीधे पेड़ उगाना अभी मुमकिन नहीं है लेकिन अगर पौधों को खास तौर पर डिजाइन किए गए कंट्रोल्ड वातावरण में रखा जाए तो वे चांद की मिट्टी में जिंदा रह सकते हैं.

चांद पर सीधे पेड़ क्यों नहीं उग सकते? 

चांद की सतह सौरमंडल के सबसे कठोर वातावरण में से एक है. पृथ्वी के उलट वहां कोई भी वायुमंडल, पानी या फिर उपजाऊ मिट्टी नहीं है. इससे प्राकृतिक रूप से पौधों को उगाना असंभव हो जाता है. 

सबसे बड़ी चुनौती है वायुमंडल का ना होना. पौधों को फोटोसिंथेसिस के लिए कार्बन डाइऑक्साइड और अलग-अलग जैविक प्रक्रियाओं के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है. क्योंकि चांद पर लगभग कोई भी वायुमंडल नहीं है इस वजह से ये जरूरी गैस मौजूद नहीं हैं.

एक और बड़ी मुश्किल पोषक तत्व और कार्बनिक पदार्थ की कमी है. चांद की मिट्टी कुचली हुई चट्टान और धूल से बनी है. इसमें कोई भी सूक्ष्म जीव या फिर कार्बनिक पदार्थ नहीं होता जो आमतौर पर पृथ्वी पर पौधों को उगाने में मदद करता है. 

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काफी ज्यादा तापमान 

चांद पर तापमान में उतार-चढ़ाव एक और बड़ी मुश्किल है. चांद के दिन के दौरान का तापमान 120 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है और चांद की रात के दौरान यह - 180 डिग्री सेल्सियस से नीचे भी गिर सकता है. इतने बड़े बदलाव पेड़ों और ज्यादातर दूसरे पौधों के जीवित रहने की सीमा से काफी ज्यादा हैं. 

वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी में पौधे उगाए 

इन मुश्किलों के बावजूद भी शोधकर्ताओं ने बीते कुछ सालों में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं. 2022 में फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने नासा के अपोलो मिशन के दौरान इकट्ठा की गई असली चांद की मिट्टी में एराबिडोप्सिस थैलियाना को सफलतापूर्वक उगाया. पानी और पोषक तत्व मिलने के बाद बीज सफलतापूर्वक अंकुरित हो गया. हालांकि पौधे में तनाव के लक्षण दिखे और उसकी जड़ पृथ्वी की मिट्टी में उगाए गए पौधे की तुलना में थोड़ी कम रफ्तार से विकसित हुई. 

चीन का लूनर एक्सपेरिमेंट 

2019 में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई. चीन के चांग-ए-4 मिशन ने चांद पर एक छोटा सा सील बंद बायोस्फीयर भेजा. कंटेनर के अंदर चांद की सतह पर कपास का एक बीज सफलतापूर्वक अंकुरित हुआ. यह पहली बार था जब चांद पर कोई पौधा उगा था. लेकिन यह प्रयोग ज्यादा समय तक नहीं चल सका. जैसे ही चांद पर रात शुरू हुई और तापमान गिरकर- 190 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया वह छोटा पौधा जम गया और मर गया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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