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US Bases Iran: ईरान के आस-पास अमेरिका के कितने मिलिट्री बेस, इन पर ही क्यों हमला कर रहा तेहरान?

US Bases Iran: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान के आसपास अमेरिका के कितने मिलिट्री बेस हैं.

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  • अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति।
  • अमेरिका के 13 से अधिक ठिकाने ईरान को घेरे हुए हैं।
  • कतर, बहरीन, कुवैत में महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद।
  • ईरान इन्हें अपने खिलाफ हमलों का लॉन्चपैड मानता है।

US Bases Iran: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है. दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं और मिडिल ईस्ट में चिंता बढ़ चुकी है. ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान के आस-पास अमेरिका के कितने मिलिट्री बेस हैं. 

ईरान के चारों तरफ अमेरिकी ठिकानों का नेटवर्क 

अमेरिका मध्य पूर्व में 13 से ज्यादा बड़े स्थायी और अस्थायी सैन्य ठिकाने बनाए हुए हैं. साथ ही इस क्षेत्र में लगभग 40000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ये ठिकाने हवाई अभियान, खुफिया जानकारी जुटाने, लॉजिस्टिक्स, मिसाइल डिफेंस और नौसैनिक तैनाती के लिए ऑपरेशनल हब के तौर पर काम करते हैं.

ईरान के करीब होने की वजह से यह ठिकाने अमेरिकी सैन्य अभियान में एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं और तेहरान इन्हें अपने इलाके और रणनीतिक संपत्तियों पर हमले के लिए लॉन्च पॉइंट के तौर पर देखता है.

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ईरान के पास अमेरिकी सैन्य ठिकाने 

सबसे जरूरी अमेरिकी ठिकानों में से एक कतर में अल उदीद एयर बेस है. यह अमेरिकी सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर है और मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है. बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा मनामा से काम करता है. साथ ही यह फारस की खाड़ी में नौसैनिक अभियानों और समुद्री सुरक्षा की देखरेख करता है.

कुवैत में कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयर बेस जैसे बड़े अमेरिकी ठिकाने हैं. यह हजारों अमेरिकी सैनिक, बख्तरबंद गाड़ियां और लॉजिस्टिक संसाधन तैनात हैं. संयुक्त अरब अमीरात में अल धफरा एयर बेस अमेरिकी वायु सेना के लड़ाकू विमान और निगरानी करने वाले ड्रोन को सपोर्ट करता है. 

इसी के साथ जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस में THAAD समेत एडवांस्ड अमेरिकी रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं. 

ईरान क्यों बना रहा है इन ठिकानों को निशाना? 

ईरान इन ठिकानों को ऐसे ऑपरेशनल प्लेटफार्म मानता है जिनका इस्तेमाल अमेरिका उसके सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर और परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले करने के लिए करता है. बुशहर और दूसरी रणनीतिक जगह पर अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान ने पास के अमेरिकी सैन्य ठिकानों की तरफ मिसाइल और ड्रोन दागकर बदला लेने की कोशिश की है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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