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क्या आम आदमी भी लड़ सकता है दतिया और बांकीपुर उपचुनाव, नॉमिनेशन में कितनी लगती है फीस?

दतिया और बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं, जिसको लेकर देशभर में चर्चा है. चलिए जानें कि क्या इन सीटों पर कोई आम इंसान चुनाव लड़ सकता है कि नहीं और नामांकन फीस कितनी है?

मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट के साथ-साथ बांकीपुर उपचुनाव की भी तारीखों का एलान हो चुका है. इस सीटों पर 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 3 अगस्त को नतीजे सबके सामने आ जाएंगे. चुनावी बिगुल बजते ही हर तरफ सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं. ऐसे में आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या कोई साधारण नागरिक भी इन विधानसभा उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकता है कि नहीं? भारत का लोकतंत्र हर नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार देता है, लेकिन इसके लिए कुछ नियम, शर्तों, योग्यताओं और सरकारी फीस का भरना जरूरी है.

लोकतंत्र में हर शख्स को चुनाव में उतरने का हक

भारत में चुनाव प्रक्रिया को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि कोई भी आम आदमी दतिया या फिर बांकीपुर जैसी हॉट सीट पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए बेझिझक खड़ा हो सकता है. चुनाव लड़ने के लिए किसी भी राजनीतिक दल का सिंबल होना जरूरी नहीं है. कोई भी शख्स एक निर्दलीय तौर पर भी पर्चा दाखिल कर सकता है. हालांकि इसके लिए सबसे बुनियादी शर्त यह है कि उम्मीदवार की उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए. इसके साथ ही उसका नाम देश के किसी भी हिस्से की आधिकारिक मतदाता सूची में दर्ज होना भी जरूरी है.

चुनाव के लिए कितनी लगती है नामांकन राशि?

चुनाव आयोग के नियमों की मानें तो विधानसभा चुनाव या फिर उपचुनाव के नामांकन के समय उम्मीदवार को एक निश्चित सिक्योरिटी डिपॉजिट करना होता है. दतिया और बांकीपुर उपचुनाव के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवार कौ 10,000 रुपये की फीस देनी होती है. वहीं अगर कोई उम्मीदवार अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से आता है, तो उसके लिए यह राशि आधी यानि 5000 रुपये तक तय की गई है. यह फीस चुनाव दफ्तर में नकद या फिर सरकारी राजकोष चालान के माध्यम से जमा की जा सकती है.

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कब जब्त हो जाती है जमानत?

नामांकन के दौरान जमा की जाने वाली इस फीस को लेकर चुनाव आयोग का बेहद सख्त नियम है, जिसे आम भाषा में जमानत जब्त होना कहा जाता है. नियम के अनुसार, चुनाव खत्म होने के बाद अगर किसी उम्मीदवार को उस विधानसभा क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोटों का कम से कम छठा हिस्सा यानी 16.67 फीसदी वोट नहीं मिलते हैं तो उसकी जमा की गई राशि सरकारी खजाने में चली जाती है. लेकिन अगर उम्मीदवार इस तय आंकड़े को पार कर लेता है या फिर चुनाव जीत जाता है तो उसकी जमानत राशि वापस मिल जाती है.

चुनावी नामांकन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी?

नामांकन प्रक्रिया को कानूनी रूप से सही बनाने के लिए उम्मीदवार को कई अहम दस्तावेज जमा करने होते हैं. पर्चा भरते वक्त एक वैध पहचान पत्र, अपनी संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड (यदि कोई हो तो) का पूरा ब्योरा देने वाला एक एफिडेविट देना अनिवार्य होता है. इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों के मामले में उसी क्षेत्र के कुछ स्थानीय मतदाताओं को प्रस्तावक के रूप में प्रपत्र पर दस्तखत करने होते हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि वे इस उम्मीदवार के नाम का समर्थन कर रहे हैं. बिना प्रस्तावक के नामांकन खारिज हो जाता है.

क्या चुनाव लड़ने के लिए उसी विधानसभा का निवासी होना जरूरी?

कई लोगों को लगता है कि चुनाव लड़ने के लिए उसी क्षेत्र का निवासी होना या फिर वहां का वोटर होना जरूरी है, लेकिन कानूनन ऐसा बिल्कुल नहीं है. भारत का चुनावी कानून किसी भी योग्य नागरिक को देश की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पूरी आजादी देता है. शर्त सिर्फ इतनी है कि वह भारत में किसी न किसी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का रजिस्टर्ड वोटर होना चाहिए. किसी विधायक के निधन, इस्तीफे या अयोग्यता के कारण खाली हुई सीट पर बाहरी क्षेत्र का नागरिक भी पूरी पात्रता के साथ पर्चा भर सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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