Board of Peace: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विकल्प बनेगा अमेरिका का 'बोर्ड ऑफ पीस', जानें कितने करोड़ में मिल रही इसकी सदस्यता?
Board of Peace: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राज्य अमेरिका के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस संगठन की सदस्यता फीस कितनी है.

Board of Peace: संयुक्त राज्य अमेरिका ने बोर्ड ऑफ पीस नाम की एक नई अंतर्राष्ट्रीय पहल शुरू की है. इससे संयुक्त राष्ट्र बहुपक्षीय संस्थानों के भविष्य के बारे में बहस छिड़ चुकी है. हाल ही में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस नए संगठन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. आधिकारिक तौर पर गाजा में शांति और पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए एक तंत्र के रूप में पेश किए गए बोर्ड ऑफ पीस को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन इस विकल्प के लिए सदस्यों को काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी.
अमेरिकी बोर्ड ऑफ पीस क्या है
बोर्ड ऑफ पीस की औपचारिक घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जनवरी 2026 को की थी. इसके ड्राफ्ट चार्ट के मुताबिक यह संगठन शुरू में गाजा में संघर्ष विराम लागू करने, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण प्रयासों की देखने के लिए बनाया गया है. हालांकि इसका भविष्य का उद्देश्य काफी ज्यादा बड़ा है. ऐसा कहा जा रहा है कि यह संगठन उन जगहों पर कदम रखने में सक्षम है जहां पर कथित तौर पर वीटो राजनीति और नौकरशाही देरी की वजह से संयुक्त राष्ट्रीय विफल रहा.
यह संयुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से कैसे अलग है
संयुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद पांच स्थायी सदस्यों द्वारा साझा किए गए सामूहिक मतदान और वीटो शक्तियों पर काम करता है. वहीं बोर्ड ऑफ पीस एक सेंट्रलाइज्ड अथॉरिटी मॉडल का पालन करता है. बोर्ड के अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप के पास बड़ी शक्तियां होंगी. इनमें नए सदस्यों को आमंत्रित करने, मौजूद सदस्यों को हटाने और सभी फैसलों पर अंतिम वीटो अधिकार का इस्तेमाल करने का अधिकार शामिल है. आसान शब्दों में कहें तो संयुक्त राष्ट्र नियम आधारित और आम सहमति संचालित है और बोर्ड ऑफ पीस सिर्फ आमंत्रण आधारित और नेता संचालित है.
सदस्यता की लागत कितनी है
बोर्ड के वित्तीय ढांचे से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक सदस्यता की लागत काफी ज्यादा है. बोर्ड ऑफ पीस में स्थायी सदस्यता चाहने वाले किसी भी देश को एक बड़ा वित्तीय योगदान करना होगा. बोर्ड के गठन के पहले 3 वर्षों के बाद सदस्य के रूप में बने रहने के लिए देश को एक बिलियन डॉलर (लगभग 9 करोड रुपये) का भुगतान करना होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रभाव, मतदान अधिकार और बोर्ड के फैसलों में लगातार भागीदारी बनाए रखने के लिए यह भुगतान जरूरी है.
बोर्ड ऑफ पीस को कौन लीड करेगा
डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं. एग्जीक्यूटिव बोर्ड में राजनीतिक नेताओं, बिजनेस हस्तियों और ग्लोबल फाइनेंसरों का एक मिश्रण शामिल है. बोर्ड से जुड़े बड़े नाम में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री सर टोनी ब्लेयर, अमेरिकी राजनयिक स्टीव विटकॉफ, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अरबपति निवेशक मार्क रोमन शामिल होंगे.
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Source: IOCL
























