एक्सप्लोरर

कुछ नदियों पर क्यों पड़ती है हैंगिंग ब्रिज की जरूरत, वहां क्यों नहीं लगाते पिलर?

कमजोर मिट्टी और तेज बहाव के बीच पिलर बनाना बेहद जोखिम भरा काम होता है. आइए जानें कि किन भौगोलिक और तकनीकी मजबूरियों के वजह से उन नदियों पर हैंगिंग ब्रिज बनाए जाते हैं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • भूकंप में सुरक्षित, कम लागत और समय में निर्मित।

जब भी हम पहाड़ों या किसी गहरी नदी के पास से गुजरते हैं, तो वहां बने बड़े-बड़े झूलते हुए पुल यानी हैंगिंग ब्रिज हमारा ध्यान खींच लेते हैं. ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला या राम झूला इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं. इसके अलावा देश के कई अन्य हिस्सों और घाटियों में भी ऐसे ही पुलों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर कुछ खास जगहों या नदियों पर ऐसे हैंगिंग ब्रिज की जरूरत क्यों पड़ती है और वहां आम पुलों की तरह जमीन से पिलर क्यों नहीं खड़े किए जाते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा इंजीनियरिंग और भौगोलिक गणित.

गहरी घाटियों में पिलर बनाना मुश्किल

हैंगिंग ब्रिज ज्यादातर उन जगहों पर बनाए जाते हैं, जहां नदी बहुत गहरी घाटी या खाई से होकर गुजरती है. ऐसी जगहों पर पानी की सतह से नीचे जमीन तक की गहराई इतनी ज्यादा होती है कि वहां पिलर खड़ा करना न सिर्फ बेहद मुश्किल हो जाता है, बल्कि बेहद महंगा भी साबित होता है. पहाड़ी इलाकों में अक्सर ऐसी घाटियां देखने को मिलती हैं, जहां पिलर बनाने के लिए भारी मशीनरी ले जाना ही संभव नहीं होता.

नदी का तेज बहाव 

कई नदियों में पानी का बहाव इतना तेज और अनियंत्रित होता है कि पिलर बनाने पर उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा हमेशा बना रहता है. खासकर पहाड़ी नदियों में बारिश के मौसम में पानी का स्तर अचानक बहुत बढ़ जाता है, जिससे पिलर पर लगातार दबाव पड़ता है. ऐसे हालात में इंजीनियर हैंगिंग ब्रिज को बेहतर विकल्प मानते हैं, क्योंकि यह पानी को छुए बिना ही दोनों किनारों को आपस में जोड़ देता है.

कमजोर और रेतीली जमीन में खतरा ज्यादा

कुछ नदियों के आसपास की जमीन बहुत कमजोर, रेतीली या दलदली होती है, जो भारी पिलर का वजन सहन नहीं कर पाती. ऐसी जमीन पर पिलर बनाने पर समय के साथ वह धंसने या झुकने का खतरा रहता है, जिससे पूरे पुल की मजबूती पर सवाल खड़ा हो जाता है. इसके उलट हैंगिंग ब्रिज का पूरा वजन मजबूत केबल और दोनों किनारों पर बने ऊंचे टावरों पर टिका होता है, जिससे जमीन पर सीधा दबाव नहीं पड़ता.

यह भी पढ़ेंः ईदमिलादुन्नबी क्यों नहीं मनाते सलफी और देवबंदी मुस्लिम, क्या है वजह?

भूकंप वाले इलाकों में भी है फायदेमंद

जिन इलाको में भूकंप का खतरा ज्यादा होता है, वहां भी हैंगिंग ब्रिज को ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है. दरअसल, सामान्य पिलर वाले पुल के मुकाबले हैंगिंग ब्रिज में लचीलापन ज्यादा होता है, जिससे भूकंप के झटकों के दौरान यह थोड़ा हिल तो सकता है, लेकिन टूटने का खतरा काफी कम रहता है. यही वजह है कि पहाड़ी और भूकंप संभावित क्षेत्रों में इंजीनियर इस तकनीक को प्राथमिकता देते हैं.

कम समय और कम लागत में तैयार होता है पुल

गहरी घाटियों में सामान्य पुल बनाने में जहां कई साल लग सकते हैं और लागत भी बहुत ज्यादा आती है, वहीं हैंगिंग ब्रिज अपेक्षाकृत कम समय और कम खर्च में तैयार हो जाता है. इसमें पानी के अंदर भारी निर्माण कार्य नहीं करना पड़ता, जिससे मजदूरी, मशीनरी और सामग्री तीनों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है. खासकर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में जहां संसाधन पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां यह तरीका ज्यादा बेहतर माना जाता है.

यह भी पढ़ेंः यह है दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस, जानें कितने सैनिक रहते हैं यहां?

मंदसौर, मध्यप्रदेश के दीनदयाल पाटीदार ABP न्यूज में बतौर इंटर्न कार्यरत हैं. मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे दीनदयाल की जनरल नॉलेज (GK) और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है. वह खबरों को सटीक और ज्ञानवर्धक तरीके से पेश करने का हुनर रखते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

कुछ नदियों पर क्यों पड़ती है हैंगिंग ब्रिज की जरूरत, वहां क्यों नहीं लगाते पिलर?
कुछ नदियों पर क्यों पड़ती है हैंगिंग ब्रिज की जरूरत, वहां क्यों नहीं लगाते पिलर?
प्याज महंगा होने में जमाखोरी का कितना बड़ा हाथ, इससे कैसे बढ़ती है कीमत?
प्याज महंगा होने में जमाखोरी का कितना बड़ा हाथ, इससे कैसे बढ़ती है कीमत?
भारत से अमीर, लेकिन रुपये से कमजोर है इन देशों की करेंसी
भारत से अमीर, लेकिन रुपये से कमजोर है इन देशों की करेंसी
कब-कब प्याज ने कराया है महंगाई का अहसास, 50 साल में कितनी बढ़ी कीमत?
कब-कब प्याज ने कराया है महंगाई का अहसास, 50 साल में कितनी बढ़ी कीमत?
Advertisement

वीडियोज

Bollywood News: The Vvaan Force of the Forrest जंगल ने सिद्धार्थ को क्यों चुना? टीजर ने छोड़ा बड़ा राज! (26.08.26)
Govinda-Sunita के Family Drama पर Krushna Abhishek का बड़ा बयान, बोले- ‘घर की बातें घर में रहें’
Hijab Controversy | Asaduddin Owaisi: हिजाब पर HC के फैसले से गुस्से में ओवैसी! | HC | Muslim
Hijab Controversy | Asaduddin Owaisi: हाईकोर्ट का फैसला...ओवैसी को चुभा! | Allahabad | HC | Muslim
Kriti Sanon Ad Controversy: Kangana Ranaut और कृति के विवाद में अब आया नया ट्विस्ट! | Baba Ramdev
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
नेपाल में बाढ़ से बड़ी तबाही, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, जानें क्या है इसकी वजह
नेपाल में बाढ़ से बड़ी तबाही, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, जानें क्या है इसकी वजह
नेपाल फ्लैश फ्लड का असर कुशीनगर में भी! नारायणी नदी पर अलर्ट, प्रशासन ने लगाया कैंप
नेपाल फ्लैश फ्लड का असर कुशीनगर में भी! नारायणी नदी पर अलर्ट, प्रशासन ने लगाया कैंप
27 साल में संन्यास के बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने स्कूल पर किया केस, जानें पूरा माजरा
27 साल में संन्यास के बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने स्कूल पर किया केस
नेपाल बाढ़ में 105 भारतीय लापता, देखें तबाही की तस्वीरें
नेपाल बाढ़ में 105 भारतीय लापता, देखें तबाही की तस्वीरें
आ गया 'टॉक्सिक' का फर्स्ट रिव्यू, हर सीन में कमाल लगे यश, कियारा संग जमी केमिस्ट्री
'टॉक्सिक' की जान हैं यश, हर सीन में लगे कमाल, आ गया फर्स्ट रिव्यू
H-1B वीजा से फिर बढ़ेंगी भारतीयों की मुश्किलें, क्या बोले एक्सपर्ट
H-1B वीजा से फिर बढ़ेंगी भारतीयों की मुश्किलें, क्या बोले एक्सपर्ट
'रेट पूछे गए थे..', बांसुरी स्वराज ने 'पितृसत्ता' के मुद्दे पर राहुल को घेरा
'रेट पूछे गए थे..', बांसुरी स्वराज ने 'पितृसत्ता' के मुद्दे पर राहुल को घेरा
नेपाल में बाढ़, बिहार में हाई अलर्ट, बेतिया-मोतिहारी सहित 8 जिलों में भारी आफत!
नेपाल में बाढ़, बिहार में हाई अलर्ट, बेतिया-मोतिहारी सहित 8 जिलों में भारी आफत!
Embed widget