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प्याज महंगा होने में जमाखोरी का कितना बड़ा हाथ, इससे कैसे बढ़ती है कीमत?

प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे कम सप्लाई और फसल में देरी के साथ जमाखोरी में भी असर डाल सकती है. जानिए व्यापारी स्टॉक को रोककर कैसे बाजार में उनकी कीमत बढ़ा सकते हैं.

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  • सरकार बफर स्टॉक से प्याज जारी कर रही है।

आजकल प्याज की कीमत बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट भी बिगड़ रहा है. प्याज की कीमत में तेजी के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. इनमें फसल की कम आवक, मौसम का असर, बाजार तक प्याज पहुंचने में देरी और सप्लाई में कमी शामिल है. इसके साथ ही जमाखोरी भी कीमत बढ़ने की एक वजह बन सकती है. जब बाजार में प्याज की मांग ज्यादा हो और उसके मुकाबले सप्लाई कम हो जाए तो कीमत ऊपर जाने लगती है. ऐसे समय में अगर कुछ व्यापारी प्याज का स्टॉक रोककर रखते हैं तो बाजार में उपलब्ध प्याज की मात्रा और कम हो सकती है. इससे कीमत पर दबाव बढ़ता है. .

जमाखोरी क्या होती है?

जमाखोरी का मतलब है किसी सामान को जरूरत के समय बाजार में बेचने के बजाय बड़ी मात्रा में अपने पास रोककर रखना. प्याज के मामले में कुछ व्यापारी या स्टॉक रखने वाले लोग ऐसा तब कर सकते हैं, जब उन्हें लगता है कि आने वाले दिनों में कीमत और बढ़ सकती है. वे प्याज को तुरंत बाजार में नहीं उतारते और कीमत बढ़ने का इंतजार करते हैं. हर व्यापारी का स्टॉक रखना जमाखोरी नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्याज को कुछ समय तक सुरक्षित रखना सामान्य व्यापार का हिस्सा भी है.

स्टॉक रुकने से कीमत कैसे बढ़ती है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए किसी बाजार में रोज 100 बोरी प्याज की जरूरत है, लेकिन अचानक सिर्फ 70 बोरी प्याज ही बाजार में पहुंच रहा है. ऐसे में मांग ज्यादा और सप्लाई कम हो जाएगी. अब अगर उपलब्ध प्याज में से कुछ बोरी व्यापारी अपने पास रोक लेते हैं तो बाजार में बिकने के लिए प्याज और कम रह जाएगा. दुकानदारों को कम मात्रा में प्याज मिलेगा और उन्हें ज्यादा कीमत देनी पड़ सकती है. यही बढ़ी हुई लागत आगे चलकर ग्राहक तक पहुंच सकती है.

यह भी पढ़े : प्याज के दाम ने कब-कब गिराई सरकार? जान लें देश का सियासी मिजाज

क्या सिर्फ जमाखोरी से प्याज महंगा होता है?

प्याज की कीमत पर कई चीजों का असर पड़ता है. इस समय कई बाजारों में कम आवक और सप्लाई में कमी की खबरें सामने आई हैं. लासलगांव जैसे बड़े प्याज बाजार में भी कीमत बढ़ने के पीछे आवक कम होना और खरीफ फसल के आने में देरी को वजह बताया गया है.

सरकार जमाखोरी रोकने के लिए क्या करती है?

जब किसी जरूरी चीज की कीमत तेजी से बढ़ती है तो सरकार बाजार में स्टॉक बढ़ाने के लिए कई कदम उठा सकती है. प्याज के मामले में सरकार के पास बफर स्टॉक रखा जाता है. कीमत बढ़ने पर इस स्टॉक से प्याज निकालकर उन शहरों और बाजारों में भेजा जा सकता है, जहां दाम ज्यादा हैं. अभी कीमतों में तेजी के बीच केंद्र ने बफर स्टॉक से प्याज जारी किया है और अलग-अलग शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी व्यवस्था भी शुरू की है.

जमाखोरी से आखिर किसे नुकसान होता है?

अगर बाजार में जरूरत के मुताबिक प्याज उपलब्ध न हो और कीमत लगातार बढ़ती रहे तो सबसे ज्यादा असर आम ग्राहक पर पड़ता है. घर का बजट बढ़ जाता है और कम आय वाले परिवारों के लिए रोजमर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल हो सकता है. दूसरी तरफ किसान को भी हमेशा बढ़ी हुई कीमत का फायदा नहीं मिलता, क्योंकि किसान और ग्राहक के बीच कई स्तर होते हैं. इसलिए प्याज की कीमत को स्थिर रखने के लिए उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बाजार तक सही समय पर सप्लाई पहुंचना जरूरी है.

यह भी पढ़े : कितने देशों में पहुंचता है नासिक का प्याज, कहां-कहां होता है एक्सपोर्ट

Bhumika Panwar ABP News की Lifestyle डेस्क पर डिजिटल मीडिया इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह Mandsaur University से बीए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री कर रही हैं. ABP News में वह आर्टिकल और वेब स्टोरी लिखने का काम कर रही हैं, जिससे उन्हें डिजिटल मीडिया में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है. उन्हें हिंदी में कंटेंट लिखने और नई जानकारी जुटाने में रुचि है.

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