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Sonam Wangchuk Hunger Strike: अगर अनशन के दौरान हो जाए किसी की मौत तो क्या मुआवजा देती है सरकार? जानिए नियम

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अभी भी जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर भूख हड़ताल के दौरान किसी की मौत हो जाती है तो क्या सरकार मुआवजा देती है.

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  • सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल; मौत पर मुआवजे का सवाल उठा।
  • भारतीय कानून भूख हड़ताल में मौत पर मुआवजा अनिवार्य नहीं मानता।
  • सरकार मानवीय आधार या राजनीतिक कारणों से मुआवजा दे सकती है।
  • बातचीत द्वारा समझौते में वित्तीय सहायता या नौकरी संभव है।

Sonam Wangchuk Hunger Strike: भारत में लंबे समय से सार्वजनिक मुद्दों और सरकारी नीतियों की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए शांतिपूर्ण विरोध के तौर पर भूख हड़ताल का इस्तेमाल किया जाता रहा है. एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की जंतर मंतर पर चल रही भूख हड़ताल देश में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है. दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में नीट यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग की जा रही है.  जैसे-जैसे यह भूख हड़ताल आगे बढ़ रही है कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अगर भूख हड़ताल के दौरान किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो क्या होगा? क्या सरकार के लिए परिवार को मुआवजा देना कानूनी रूप से जरूरी है? आइए जानते हैं क्या है इन सवालों के जवाब.


क्या ऐसे मामलों में मुआवजा देना जरूरी है?

भारतीय कानून के तहत ऐसा कोई भी तय नियम नहीं है जिसके तहत भूख हड़ताल के दौरान किसी व्यक्ति की मौत होने पर सरकार के लिए मुआवजा देना अनिवार्य हो जाए. क्योंकि भूख हड़ताल को आमतौर पर किसी व्यक्ति का अपनी मर्जी से किया गया काम माना जाता है इस वजह से प्रशासन सिर्फ इसलिए मुआवजा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है कि मौत विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई है. 

खास हालातों में मुआवजे का ऐलान किया जा सकता है 

वैसे तो कोई भी कानूनी बाध्यता नहीं है लेकिन सरकारें खास मामलों में आर्थिक मदद देने का फैसला कर सकती हैं. अगर भूख हड़ताल किसी बड़े सार्वजनिक मुद्दे से जुड़ी है या फिर लोगों का काफी ध्यान खींच रही है तो मानवीय आधार पर या फिर राजनीतिक वजहों से मुआवजा का ऐलान किया जा सकता है. इस तरह की मदद आमतौर पर मुख्यमंत्री राहत कोष या फिर प्रधानमंत्री राहत कोष जैसे खास फंड से अनुग्रह राशि के तौर पर दी जाती है.

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राहत बातचीत का हिस्सा भी हो सकती है 

कुछ मामलों में प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत से विरोध खत्म होने से पहले कोई समझौता हो जाता है. ऐसी व्यवस्था के तहत सरकार आर्थिक मदद, परिवार के किसी सदस्य को नौकरी या फिर दूसरी तरह की सहायता दे सकती है. ये फायदे किसी कानूनी जरूरत के बजाय आपसी समझौतों पर आधारित होते हैं.

भूख हड़ताल के बारे में कानून क्या कहता है? 

वैसे तो संविधान शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है लेकिन अधिकारियों की जिम्मेदारी लोगों की जान की सुरक्षा करना भी है. अगर भूख हड़ताल करने वाले की सेहत काफी ज्यादा बिगड़ जाती है तो प्रशासन दखल दे सकता है और उस व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल भेज सकता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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