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Sansad Ratna Award: किन सांसदों को मिलता है संसद रत्न पुरस्कार, इसमें कितना पैसा और कितनी मिलती हैं सुविधाएं?

Sansad Ratna Award: संसद रत्न पुरस्कार के लिए इस बार 12 सांसदों और चार संसदीय समितियों का चयन किया गया है. यह सम्मान निजी संस्था प्राइम पॉइंट फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है.

Sansad Ratna Award: संसद में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सांसदों और संसदीय समितियों को हर साल दिए जाने वाले प्रतिष्ठित संसद रत्न पुरस्कार के लिए इस बार 12 सांसदों और चार संसदीय समितियों का चयन किया गया है. यह सम्मान निजी संस्था प्राइम पॉइंट फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है. हाल ही में पुरस्कारों के लिए चुने गए नाम की घोषणा के बाद एक बार फिर यह अवाॅर्ड चर्चा में आ गया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि संसद रत्न पुरस्कार किन सांसदों को मिलता है और इसमें कितना पैसा और कितनी सुविधाएं मिलती है. 

क्या है संसद रत्न पुरस्कार?

संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत 2010 में की गई थी. इसे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव पर शुरू किया गया था. उनका मानना था कि संसद में गंभीरता से काम करने वाले और नीति निर्माण में सक्रिय योगदान देने वाले सांसदों को नागरिक समाज की ओर से सम्मान मिलना चाहिए. यह पुरस्कार भारत सरकार की ओर से नहीं दिया जाता, बल्कि प्राइम पॉइंट फाउंडेशन और eMagazine PreSense की तरफ से प्रदान किया जाता है. यह पहला पुरस्कार समारोह खुद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने टेलीकॉन्फ्रेसिंग के जरिए लॉन्च किया था. 

किन आधारों पर चुने जाते हैं सांसद?

संसद रत्न पुरस्कार पूरी तरह डेटा और प्रदर्शन पर आधारित होता है. इसके लिए सांसदों का चयन संसद में उनकी सक्रियता और कामकाज के आधार पर किया जाता है. चयन प्रक्रिया में सांसदों की ओर से पूछे गए सवाल, संसद की बहस में भागीदारी, प्राइवेट मेंबर बिल पेश करना, समितियां में योगदान, उपस्थिति और जनहित के मुद्दे को उठाने जैसे पहलुओं को देखा जाता है. इसका डेटा लोकसभा और राज्यसभा के अधिकारी वेबसाइट से लिया जाता है और पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की मदद से विश्लेषण किया जाता है. इसके लिए किसी तरह का नामांकन नहीं करना पड़ता. 

संसद रत्न पुरस्कार के लिए कौन करता है चयन?

संसद रत्न पुरस्कार पुरस्कार विजेताओं का चयन एक जूरी समिति करती है, जिसमें पूर्व सांसद और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल होते हैं. इस बार चयन प्रक्रिया की निगरानी राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहिर की अध्यक्षता वाली समिति ने की. 18वीं लोकसभा की पहली बैठक से लेकर बजट सत्र 2025-26 तक के संसदीय प्रदर्शन के आधार पर किया गया है. 

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इस साल किन सांसदों और संसदीय समिति को मिला पुरस्कार? 

इस वर्ष व्यक्तिगत कैटेगरी में भाजपा के जगदंबिका पाल, पी.पी. चौधरी, निशिकांत दुबे और शिवसेना के श्रीकांत एकनाथ शिंदे समेत कई सांसदों का चयन किया गया. इसके अलावा प्रवीण पटेल, विद्युत बरण महतो, लुम्बाराम चौधरी, हेमंत विष्णु सवरा, स्मिता उदय वाग, नरेश गणपत्र म्हास्के, मेधा विश्राम कुलकर्णी और नरहरि अमीन को भी संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चुना गया. वहीं चार संसदीय समितियों को भी उनके कामकाज के लिए सम्मानित किया गया जाएगा. इनमें कृषि समिति, वित्त समिति, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति और कोयला एवं खान समिति शामिल है. कृषि समिति के अध्यक्षता चरणजीत सिंह चन्नी कर रहे हैं, जबकि वित्त मंत्री समिति के प्रमुख भर्तृहरि महताब है. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति का नेतृत्व सप्तगिरि शंकर उलाका कर रहे हैं और कोयला एवं खान समिति के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर हैं. 

क्या मिलता है संसद रत्न पुरस्कार के साथ?

संसद रत्न पुरस्कार मुख्य रूप से सम्मान और संसदीय उत्कृष्टता की पहचान के रूप में दिया जाता है. यह किसी सरकारी अवाॅर्ड की तरह वित्तीय लाभ या सरकारी सुविधाओं से जुड़ा नहीं होता है. पुरस्कार विजेताओं को सम्मान पत्र और ट्रॉफी प्रदान की जाती है. हालांकि सम्मान को संसदीय कार्यों में बेहतर प्रदर्शनी की बड़ी उपलब्धि माना जाता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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