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Sun Science: अगर अंतरिक्ष में ऑक्सीजन नहीं है तो सूरज की आग कैसे जल रही है, क्या है इसके पीछे का विज्ञान?

Sun Science: अंतरिक्ष में ऑक्सीजन बिल्कुल भी नहीं है. लेकिन उसके बावजूद भी सूरज लगातार जल रहा है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • इस संलयन से पैदा ऊर्जा ही सूरज को प्रकाश देती है।

Sun Science: अंतरिक्ष के बारे में जो लोग सबसे आम सवाल पूछते हैं उनमें से एक यह है कि अगर अंतरिक्ष में ऑक्सीजन नहीं है तो सूरज लगातार जल कैसे रहा है? पृथ्वी पर हर आम आग को जलते रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है. ऑक्सीजन के बिना यहां तक कि मोमबत्ती की लौ भी कुछ ही सेकंड के अंदर बुझ जाती है. तो आखिर अंतरिक्ष में सूरज कैसे जल पा रहा है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

सूरज का जलना 

 दरअसल वैज्ञानिक सच यह है कि सूरज असल में आग की तरह बिल्कुल भी नहीं जल रहा है. जो हमें आग के एक विशाल गोले जैसे दिखता है वह असल में एक काफी बड़ा प्राकृतिक न्यूक्लियर रिएक्टर है, जो न्यूक्लियर फ्यूजन नाम की एक प्रक्रिया से चलता है. इस प्रक्रिया के लिए ऑक्सीजन, लकड़ी, ईंधन या फिर किसी भी तरह से जलने वाली चीज की जरूरत नहीं होती.

पृथ्वी पर आग एक रासायनिक प्रतिक्रिया से पैदा होती है जिसे दहन कहते हैं. उदाहरण के लिए जब लकड़ी या फिर पेट्रोल जलते हैं तो ऑक्सीजन ईंधन के साथ प्रतिक्रिया करती है और गर्मी और रोशनी पैदा करती है. ऑक्सीजन के बिना यह रासायनिक आग जलती नहीं रह सकती. लेकिन सूरज का काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है. उसकी सतह पर या फिर उसके अंदरूनी हिस्से में कोई भी रासायनिक आग है ही नहीं. इसके बजाय सूरज न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए ऊर्जा पैदा करता है. 

न्यूक्लियर फ्यूजन क्या है? 

दरअसल सूरज हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है. सूरज के केंद्र में गुरुत्वाकर्षण की शक्ति इतनी ज्यादा है कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. यह जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण बल हाइड्रोजन के परमाणुओं को काफी ज्यादा दबाव और तापमान में एक दूसरे के करीब दबा देता है. सूरज के अंदरूनी हिस्से में तापमान लगभग 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इन काफी ज्यादा मुश्किल हालातों में हाइड्रोजन के परमाणु आपस में टकराते हैं और मिलकर हीलियम के परमाणु बनाते हैं. इसी प्रक्रिया को न्यूक्लियर फ्यूजन कहते हैं. जब हाइड्रोजन के नाभिक मिलकर हीलियम बनाते हैं तो आइंस्टीन के मशहूर समीकरण के मुताबिक पदार्थ का एक काफी छोटा सा हिस्सा सीधे तौर पर काफी ज्यादा ऊर्जा में बदल जाता है. 

फ्यूजन के लिए ऑक्सीजन की जरूरत क्यों नहीं? 

आम आग के उलट न्यूक्लियर फ्यूजन कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं होती. यह एक न्यूक्लियर प्रतिक्रिया है जो परमाणुओं के नाभिकों के अंदर होती है. इसी वजह से इस प्रक्रिया को जारी रखने के लिए ऑक्सीजन की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. जब तक हाइड्रोजन के परमाणु काफी ज्यादा दबाव और गर्मी में मिलकर फ्यूज होते रहेंगे तब तक सूरज ऊर्जा पैदा करता रहेगा.  वैज्ञानिकों का ऐसा अनुमान है कि सूरज के पास इतना हाइड्रोजन ईंधन मौजूद है कि वह लगभग अगले 5 अरब सालों तक चमकता रह सकता है.

यह भी पढ़ेंः क्या है फिजी पोर्ट प्रोजेक्ट? भारत समेत चार देश मिलकर ऐसे निकालेंगे चीन की हेकड़ी, यहां जान लीजिए

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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