कोटा में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन अंडरपास धंसने से रेलवे के दो इंजीनियरों की मौत
Kota Underpass Collapse: हादसा रात 8.00 बजे उस वक्त हुआ, जब निर्माणाधीन अंडरपास पर काम चल रहा था. दोनों इंजीनियरों को गंभीर चोटें आई थीं. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका.

राजस्थान के कोटा जिले में गुरुवार (28 मई) की शाम को नेशनल हाईवे-52 पर बड़ा हादसा हो गया. राष्ट्रीय राजमार्ग पर दरा घाटी के पास एक निर्माणाधीन अंडरपास ढह गया. मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा ढह जाने से हुए हादसे में रेलवे के दो इंजीनियरों की मौत हो गई.
मृतकों की पहचान जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह और सीनियर सेक्शन इंजीनियर संजय झा के रूप में हुई है. रेलवे जनसंपर्क अधिकारी रवींद्र लाखरा ने बताया कि यह दुर्घटना रात करीब 8.00 बजे उस वक्त हुई, जब निर्माणाधीन अंडरपास पर काम चल रहा था. यहां ‘ब्लॉक-फिक्सिंग’ कार्य के दौरान अचानक मिट्टी का एक हिस्सा धंस गया.
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अस्पताल ले जाने से पहले हुई मौत
इस हादसे में दोनों इंजीनियरों को गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें हादसे के 15 मिनट के भीतर अस्पताल ले जाया गया था. हालांकि, वहां पहुंच कर डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
हादसे के कारणों की होगी जांच
रेलवे अधिकारियों के अनुसार रात करीब 8 बजे अंडरपास निर्माण स्थल पर बॉक्स पुशिंग का काम चल रहा था. इसी दौरान अचानक मिट्टी धंस गई और दोनों इंजीनियर उसकी चपेट में आ गए. काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.
सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जाएगी. रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है.
सूचना के 10 मिनट में पहुंची पुलिस
साइट पर लेबर काम करके चले गए थे. मौके पर एलएनटी, जेसीबी मशीनें खड़ी थीं. दोनों अधिकारी निरीक्षण कर रहे थे, तभी मिट्टी ढह गई और दोनों अधिकारी उसमें दब गए. सूचना मिलने पर 10 मिनट में पुलिस मौके पर पहुंची. वहां एलएनटी, जेसीबी मशीनें से 10-15 मिनट की मशक्कत के बाद दोनों को मिट्टी से बाहर निकाल लिया गया, जिसके बाद दोनों को कोटा के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे.
डॉ. राकेश जिंदल ने बताया कि दोनों घायल इंजीनियर यहां आए थे, जिन्हें बचाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन दोनों की मौत हो गई.
कोटा में लगता था जाम इसलिए बन रहा था अंडरपास
कोटा दरा घाटी पर आए दिन जाम के हालात रहते हैं, जिसके बाद लोगों की मांग के अनुसार यहां अंडरपास बनाया जा रहा था. अधिकांश काम पूरा हो चुका था. अब कंकरीट का स्लैब डाला जा रहा था.
यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में बड़े वाहन गुजरते हैं और केवल एक ही ब्रिज है. इस वजह से आए दिन जाम के हालात बने रहते हैं. इसी के चलते रेलवे द्वारा यह अंडरपास बनाया जा रहा था.
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Source: IOCL

























