Padma Awards 2026: पद्म अवॉर्ड के साथ क्या 'कैश प्राइज' भी मिलता है, जानें विजेता को क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं?
Padma Awards 2026: राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह का आयोजन चल रहा है. नामचीन हस्तियों को पद्म अवॉर्ड्स से नवाज रही हैं. चलिए इन सर्वोच्च नागरिक सम्मानों को पाने वालों की सुविधाओं के बारे में जानें.

- राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कारों से धर्मेंद्र, ममूटी, आर. माधवन सम्मानित हुए.
- पद्म पुरस्कारों के लिए हर साल भेजे जाते हैं सरकारी नामांकन.
- पुरस्कार के साथ कोई नकद राशि या आर्थिक लाभ नहीं मिलता.
- पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री पुरस्कारों का अलग-अलग क्रम है.
Padma Awards 2026: नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक बेहद गरिमामय समारोह में देश की नामचीन हस्तियों को उनकी अद्वितीय सेवाओं के लिए पद्म पुरस्कारों से नवाजा जा रहा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वालों में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र, दिग्गज मलयालम सुपरस्टार ममूटी और मशहूर अभिनेता आर. माधवन जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इस गौरवशाली पल के बीच आम जनता के मन में यह जानने की तीव्र उत्सुकता रहती है कि आखिर देश के इस सबसे बड़े नागरिक सम्मान के साथ विजेताओं को कितना कैश प्राइज या आर्थिक लाभ मिलता है और सरकार उन्हें कौन सी विशेष सुविधाएं देती है. चलिए विस्तार से जान लेते हैं.
राष्ट्रपति भवन में सर्वोच्च नागरिक सम्मान समारोह का आयोजन
देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में सोमवार को पद्म पुरस्कार वितरण समारोह का बेहद शानदार आयोजन किया गया. इस गौरवशाली कार्यक्रम में सिनेमा, कला, संगीत और थिएटर जगत की कई महान विभूतियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से विभूषित किया गया. इस वर्ष की पुरस्कार सूची में शामिल मनोरंजन जगत के महान कलाकार दिवंगत धर्मेंद्र, दक्षिण भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता ममूटी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी आर. माधवन जैसे कई नामचीन हस्तियों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हाथों से यह विशिष्ट पदक सौंपकर देश की तरफ से सम्मानित किया.
पद्म पुरस्कारों के लिए की जाने वाली चयन प्रक्रिया
इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान को पाने वाले योग्य उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया काफी पारदर्शी और व्यापक होती है. भारत सरकार हर साल गणतंत्र दिवस से पहले इन राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए पूरे देश से आधिकारिक नामांकन आमंत्रित करती है. देश का कोई भी आम नागरिक, सामाजिक संस्था, सांसद, विधायक या केंद्रीय मंत्री किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले योग्य व्यक्ति के नाम की सिफारिश भेज सकता है. इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय विशेष समिति सभी प्राप्त आवेदनों की गहन जांच करती है और उसी की अंतिम सिफारिश पर विजेताओं के नामों पर मुहर लगती है.
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पद्म पुरस्कार विजेताओं को कितनी नकद राशि और सुविधाएं मिलती है?
आम लोगों के बीच इस बात को लेकर अक्सर भ्रम रहता है कि इतने बड़े सम्मान के साथ विजेताओं को मोटी रकम भी मिलती होगी, लेकिन कानूनी हकीकत यह है कि पद्म विभूषण, पद्म भूषण या पद्म श्री किसी भी श्रेणी के पुरस्कार के साथ सरकार द्वारा कोई भी नकद राशि यानी कैश प्राइज बिल्कुल नहीं दिया जाता है. इस राष्ट्रीय सम्मान के तहत राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और सील वाला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र (सनद) और एक मेडल ही सौंपा जाता है. विजेताओं को सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार का मासिक भत्ता, पेंशन या डायरेक्ट आर्थिक लाभ प्रदान करने का कोई नियम नहीं है.
पद्म पुरस्कारों का श्रेणी क्रम क्या है?
पद्म पुरस्कारों को देश के बेहद गौरवशाली और प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिना जाता है. वरिष्ठता और महत्ता के आधार पर इन पुरस्कारों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है. इसमें 'पद्म विभूषण' को सबसे उच्च स्थान प्राप्त है, जिसके बाद दूसरे पायदान पर 'पद्म भूषण' आता है, और तीसरे स्तर पर 'पद्म श्री' पुरस्कार रखा गया है. भले ही इन तीनों सम्मानों का अपना एक अलग क्रम तय हो, लेकिन राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिहाज से ये तीनों ही पुरस्कार अत्यंत गरिमामय और अद्वितीय माने जाते हैं.
कब हुई राष्ट्रीय पुरस्कारों की शुरुआत?
अगर इन राष्ट्रीय सम्मानों के इतिहास पर नजर डालें, तो भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर वर्ष 1954 में पद्म पुरस्कारों को देने की शुरुआत की थी. आजादी के बाद देश के नीति निर्माताओं ने यह महसूस किया कि केवल 'भारत रत्न' जैसा देश का सर्वोच्च सम्मान ही हर क्षेत्र की प्रतिभाओं को सराहने के लिए काफी नहीं है. समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे असाधारण लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग स्तर के पुरस्कारों की आवश्यकता थी. इसी दूरगामी सोच के साथ इन सम्मानों की नींव रखी गई, जो समय के साथ आज के इस वर्तमान त्रि-स्तरीय स्वरूप में हमारे सामने हैं.
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Source: IOCL

























