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NATO बनाम BRICS, अगर दोनों में हो जाए जंग तो कौन पड़ेगा भारी, जानें किसकी-कितनी ताकत?

NATO vs BRICS: एक तरफ दुनिया का सबसे ताकतवर सैन्य गठबंधन, दूसरी तरफ उभरती आर्थिक महाशक्ति देशों का समूह. अगर NATO और BRICS आमने-सामने आए, तो आखिर किसकी ताकत ज्यादा है.

दुनिया फिर एक बड़े मोड़ पर खड़ी दिख रही है. शीत युद्ध के बाद बनी व्यवस्था अब बदल रही है और ताकत के नए केंद्र उभर रहे हैं. NATO, जो दशकों से पश्चिमी सुरक्षा की रीढ़ रहा है, और BRICS, जो पश्चिमी वर्चस्व को चुनौती देता दिख रहा है, दोनों के बीच तनाव की चर्चा तेज है. सवाल यही है कि अगर कभी हालात बेहद बिगड़े और ये दोनों आमने-सामने आए, तो असल में पलड़ा किसका भारी होगा? चलिए जान लेते हैं.

शीत युद्ध से मल्टीपोलर दुनिया तक

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया दो खेमों में बंट गई थी. एक ओर अमेरिका के नेतृत्व वाला पश्चिमी गुट था, दूसरी ओर सोवियत संघ था. 1947 से 1991 तक चला शीत युद्ध इसी टकराव की कहानी है. सोवियत संघ के टूटने के बाद यह टकराव खत्म तो हुआ, लेकिन दुनिया एकध्रुवीय न रहकर धीरे-धीरे बहुध्रुवीय बन गई. अमेरिका, चीन, रूस, भारत और यूरोप जैसे क्षेत्रीय केंद्र अपनी-अपनी ताकत दिखाने लगे.

ट्रंप की नीतियों से क्यों बढ़ी हलचल?

मौजूदा दौर में अमेरिका की सख्त नीतियों ने इस बहुध्रुवीय व्यवस्था में नई बेचैनी पैदा की है. ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के तहत डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने कई देशों को परेशान किया है. हाल ही में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़ी कार्रवाई से जुड़े बिल को मंजूरी मिलने के बाद भारत, चीन और ब्राजील जैसे BRICS देशों पर भारी टैरिफ की आशंका बढ़ गई है. यहां तक कि 500 फीसदी तक शुल्क की चर्चा ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी.

NATO क्या है और कितना ताकतवर है?

NATO यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन की स्थापना 1949 में हुई थी. इसका मूल सिद्धांत सामूहिक सुरक्षा है, यानी एक देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है. आज NATO में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत 32 देश शामिल हैं. इसकी सबसे बड़ी ताकत है साझा सैन्य कमांड, आधुनिक हथियार, संयुक्त अभ्यास और त्वरित कार्रवाई की क्षमता. NATO का कुल रक्षा बजट 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है, जो इसे सैन्य रूप से बेहद मजबूत बनाता है.

BRICS क्या है और इसका मकसद क्या?

BRICS की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन से हुई थी. 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसे वैश्विक पहचान मिली थी. 2024 तक इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और यूएई जैसे देश भी शामिल हो गए. BRICS खुद को एक आर्थिक और रणनीतिक मंच के रूप में पेश करता है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था में संतुलन लाना है.

जनसंख्या और अर्थव्यवस्था में BRICS आगे

अगर सिर्फ आंकड़ों की बात करें तो BRICS की कुल आबादी करीब 3.3 अरब है, जो दुनिया की लगभग 40 फीसदी जनसंख्या है. वहीं NATO देशों की कुल आबादी करीब 95 करोड़ यानी लगभग 12 फीसदी है. आर्थिक रूप से PPP के आधार पर BRICS की GDP करीब 60 ट्रिलियन डॉलर मानी जाती है, जबकि NATO देशों की संयुक्त GDP लगभग 40 ट्रिलियन डॉलर है. BRICS की ताकत चीन और भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं से आती है.

सैन्य ताकत में NATO का दबदबा

सैन्य लिहाज से NATO साफ तौर पर आगे है. उसके पास संगठित कमांड सिस्टम, इंटरऑपरेबल फोर्स और उन्नत तकनीक है. BRICS देशों के पास रूस, चीन और भारत जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देश जरूर हैं, लेकिन इनके बीच कोई साझा सैन्य कमांड या सामूहिक रक्षा संधि नहीं है. यही वजह है कि BRICS सैन्य मोर्चे पर एक इकाई की तरह काम नहीं करता है.

असली ताकत किसकी?

यह सवाल पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि ताकत को कैसे देखा जाए. अगर बात सैन्य शक्ति और त्वरित युद्ध क्षमता की हो, तो NATO आगे नजर आता है, लेकिन अगर जनसंख्या, बाजार, संसाधन और लंबे समय की आर्थिक ताकत की बात करें, तो BRICS का असर कहीं ज्यादा व्यापक दिखता है. यही कारण है कि आने वाले समय में यह टकराव हथियारों से ज्यादा अर्थव्यवस्था और रणनीति का हो सकता है.

यह भी पढ़ें: भारत या पाकिस्तान, कहां की लड़कियां होती हैं ज्यादा लंबी, क्या है इसकी वजह?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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