कितने दिन में होता है उपराज्यपाल का 'ट्रांसफर', क्या तबादले पर इन्हें भी मिलता है टीए-डीए?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली और लद्दाख समेत कई राज्यों में नए एलजी नियुक्त किए हैं. उपराज्यपाल का ट्रांसफर राष्ट्रपति के विवेक पर होता है. आइए जानें कि क्या ट्रांसफर पर उनको भी TA DA मिलता है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में देश के कई राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों की नियुक्तियों और तबादलों को मंजूरी दी है. इस बड़े फेरबदल में तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि वीके सक्सेना को अब लद्दाख की कमान सौंपी गई है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि इन बड़े संवैधानिक पदों पर आसीन अधिकारियों के ट्रांसफर का असल में क्या नियम है? क्या इन्हें भी आम सरकारी कर्मचारियों की तरह तबादले पर यात्रा भत्ते (TA) और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, या इनके लिए कायदे अलग हैं?
उपराज्यपाल के ट्रांसफर के नियम और भत्ते
संवैधानिक रूप से देखा जाए तो केंद्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल (एलजी) सीधे तौर पर राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं. इनका तबादला या कार्यकाल किसी निश्चित 'दिनों की गिनती' से नहीं बंधा होता, बल्कि यह पूरी तरह से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के विवेक पर निर्भर करता है. हालांकि, आमतौर पर इन पदों पर कार्यकाल 5 साल का होता है, लेकिन जनहित या प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए सरकार इन्हें समय से पहले भी हटा सकती है या दूसरे केंद्र शासित प्रदेश में भेज सकती है.
तबादले के लिए कितना समय मिलता है?
उपराज्यपाल जैसे उच्च रैंकिंग वाले अधिकारियों का तबादला अक्सर केंद्र सरकार के विवेक पर होता है. यदि यह प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) से पहले का समय से पूर्व तबादला है, तो सामान्यतः अधिकारी को 1 से 3 महीने का नोटिस दिया जाता है. हालांकि, कई बार आपातकालीन या विशेष परिस्थितियों में यह प्रक्रिया बहुत तेजी से भी पूरी की जा सकती है. हाल के दिल्ली-लद्दाख फेरबदल के मामले में यह प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली के निवर्तमान एलजी वीके सक्सेना को अब लद्दाख की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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क्या उपराज्यपाल को भी मिलता है टीए और डीए?
अक्सर लोगों को लगता है कि इतने बड़े संवैधानिक पदों पर तबादला भत्ता (Transfer Allowance) नहीं मिलता होगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है. उपराज्यपाल जैसे उच्च अधिकारियों को भी पद के स्थानांतरण के दौरान पूर्ण यात्रा भत्ता (Transfer Travelling Allowance - TTA) पाने का अधिकार होता है. यह भत्ता न केवल उनके स्वयं के लिए होता है, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों के सफर के खर्चों को भी कवर करता है. इसमें सामान के परिवहन (Transportation of Personal Effects) का खर्च भी सरकारी नियमों के तहत शामिल होता है.
कंपोजिट ट्रांसफर ग्रांट (CTG) की सुविधा
ट्रांसफर के दौरान होने वाले फुटकर और अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए उपराज्यपाल को 'कंपोजिट ट्रांसफर ग्रांट' (CTG) दी जाती है. यह अनुदान आमतौर पर उनके पिछले महीने के मूल वेतन (Basic Pay) के 80 प्रतिशत के बराबर होता है. यह सुविधा तब मिलती है जब स्थानांतरण की दूरी 20 किलोमीटर से अधिक हो, जैसा कि दिल्ली से लद्दाख के मामले में स्पष्ट है. इसके अतिरिक्त, उन्हें नए कार्यभार को संभालने के लिए 'जॉइनिंग टाइम' भी मिलता है, ताकि वे अपने नए कार्यालय और आवास की व्यवस्था सुचारू रूप से कर सकें.
भत्ते के दावे और समय सीमा का नियम
यात्रा भत्ते (TA) के दावों को लेकर भी सख्त नियम हैं. स्थानांतरण के बाद यात्रा पूरी होने के 60 दिनों के भीतर इन दावों को प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है. यह पूरी प्रक्रिया सरकारी ऑडिट के दायरे में आती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे. इस तरह, दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और लद्दाख जा रहे वीके सक्सेना को भी वे सभी वित्तीय और प्रशासनिक सुविधाएं मिलेंगी जो एक वरिष्ठ संवैधानिक अधिकारी के स्थानांतरण के प्रोटोकॉल का हिस्सा हैं.
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Source: IOCL



























