भारतीय वायुसेना के एक SU-30MKI की कितनी है कीमत, यह राफेल से कितना सस्ता?
असम में सुखोई-30 एमकेआई की दुर्घटना के बीच इसकी लागत पर चर्चा तेज है. आइए जानें कि SU-30MKI की आज के समय में कितनी कीमत है और यह राफेल से सस्ता पड़ता है या महंगा.

भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाने वाला सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) एक बार फिर चर्चा में है. असम के जोरहाट में एक दुखद प्रशिक्षण दुर्घटना के बाद इस विमान की ताकत और इसकी आर्थिक लागत को लेकर सवाल उठने लगे हैं. यह विमान न केवल भारत की हवाई सुरक्षा का सबसे बड़ा स्तंभ है, बल्कि रूस और भारत की दोस्ती का एक बेहतरीन उदाहरण भी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की रेस में सुखोई की कीमत कितनी है और यह दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान 'राफेल' के मुकाबले जेब पर कितना भारी या हल्का पड़ता है?
भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद योद्धा की कीमत
असम के कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में हुए सुखोई-30 एमकेआई के हादसे ने पूरे देश को गमगीन कर दिया है. जोरहाट से उड़ान भरने के बाद इस विमान का रडार से संपर्क टूट गया था और बाद में इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई. इस दुखद घटना के बीच रक्षा विशेषज्ञ इस विमान की लागत और इसकी उपयोगिता का विश्लेषण कर रहे हैं.
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित एक नए सुखोई-30 एमकेआई की कीमत आज के समय में लगभग 1,125 करोड़ रुपये (करीब 133 मिलियन डॉलर) है. यह आकलन 2024 के अंत में 12 नए विमानों के लिए किए गए 13,500 करोड़ रुपये के सौदे पर आधारित है.
राफेल और सुखोई की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर
जब हम सुखोई की तुलना फ्रांस से खरीदे गए राफेल विमान से करते हैं, तो कीमतों का अंतर चौंकाने वाला है. एक राफेल लड़ाकू विमान की कीमत औसतन 2,850 करोड़ रुपये (340 मिलियन डॉलर से अधिक) पड़ती है. इसका सीधा मतलब यह है कि एक राफेल की कीमत में भारत आसानी से दो से ज्यादा सुखोई विमान खरीद सकता है.
सुखोई-30 एमकेआई अपने प्रतिद्वंद्वी राफेल से प्रति यूनिट लगभग 1,700 करोड़ रुपये सस्ता है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि राफेल की इस ऊंची कीमत में केवल विमान ही नहीं, बल्कि उसके साथ आने वाले घातक हथियार, ट्रेनिंग पैकेज और लंबे समय तक रखरखाव का खर्च भी शामिल होता है.
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पुराने सुखोई को नई धार देने की तैयारी
भले ही सुखोई राफेल से सस्ता हो, लेकिन इसकी तकनीक को आधुनिक बनाए रखने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है. भारतीय वायुसेना अपने मौजूदा सुखोई बेड़े को 'सुपर-30' मानक में अपग्रेड करने की योजना पर काम कर रही है. 84 विमानों के इस आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 66,829 करोड़ रुपये आंकी गई है.
इस अपग्रेड के बाद सुखोई में नए रडार, एडवांस एवियोनिक्स और नई मिसाइल प्रणालियां लगाई जाएंगी, जिससे यह पुराने प्लेटफॉर्म पर होने के बावजूद राफेल जैसी आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकेगा. यह अपग्रेड बताता है कि एक लड़ाकू विमान की शुरुआती कीमत कम हो सकती है, लेकिन उसे दशकों तक युद्ध के लिए तैयार रखने का खर्च बहुत अधिक होता है.
लागत और क्षमता का संतुलन
सुखोई-30 एमकेआई एक हैवी-वेट, लॉन्ग रेंज फाइटर है जो बड़ी मात्रा में बम और मिसाइलें ले जा सकता है. वहीं राफेल एक मीडियम-वेट, मल्टी-रोल विमान है जो अपनी 'स्टेल्थ' क्षमताओं और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए जाना जाता है. कीमत में भारी अंतर होने के बावजूद वायुसेना इन दोनों का संतुलन बनाए रखती है. जहां सुखोई संख्या बल और ताकत प्रदान करता है, वहीं राफेल आधुनिक तकनीक और सटीक मारक क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है.
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Source: IOCL



























