LPG Subsidy: 2014 से लेकर अब तक कितनी घट गई गैस सब्सिडी, जानें अब कितने रुपये का होता है फायदा?
LPG Subsidy: वहीं आज स्थिति काफी बदल चुकी है और सब्सिडी मुख्य रूप से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के फायदा पाने वाले लोग तक सीमित हो गई है.

LPG Subsidy: पिछले कुछ सालों में गैस सिलेंडर की कीमतों के साथ-साथ गैस सब्सिडी के नियमों में भी बड़े बदलाव हुए हैं. पहले गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा लगभग हर सब्सिडी पाने वाले लोगों को मिलता था, जिससे सिलेंडर की कीमत कम पड़ती थी और लोगों का खर्च घट जाता था. वहीं आज स्थिति काफी बदल चुकी है और सब्सिडी मुख्य रूप से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के फायदा पाने वाले लोग तक सीमित हो गई है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर अब तक गैस सब्सिडी में क्या-क्या बदलाव हुए हैं और आज लोगों को कितना फायदा मिल रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 2014 से लेकर अब तक गैस सब्सिडी कितनी बदली और अब कितने रुपये का फायदा होता है.
2014-15 में शुरू हुई PAHAL योजना
केंद्र सरकार ने LPG सब्सिडी को पारदर्शी बनाने के लिए PAHAL (Direct Benefit Transfer for LPG) योजना को पूरे देश में लागू किया. इस योजना के तहत लोगों को गैस सिलेंडर बाजार की कीमत पर दिया जाने लगा और सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाने लगी. इसका उद्देश्य फर्जी कनेक्शन खत्म करना और सही लोगों तक फायदा पहुंचाना था. PAHAL के तहत सब्सिडी दो तरीकों से ट्रांसफर की जाती है. जिसमें पहला Aadhaar Transfer Compliant (ATC) Mode और Bank Transfer Compliant (BTC) Mode. BTC मोड में आधार लिंक न होने पर भी रजिस्टर्ड बैंक खाते में सब्सिडी भेजी जाती है.
PAHAL योजना से कितने लोग जुड़े?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई 2024 तक 30.19 करोड़ से ज्यादा LPG यूजर्स PAHAL योजना से जुड़े हुए थे. सरकार के मुताबिक, इस योजना की मदद से फर्जी और डुप्लीकेट कनेक्शन हटाने में सफलता मिली और सब्सिडी का फायदा सीधे यूजर्स तक पहुंचा.
गिव इट अप अभियान भी हुआ शुरू
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गिव इट अप अभियान शुरू किया. इसके तहत आर्थिक रूप से सही लोगों से अपील की गई कि अपनी LPG सब्सिडी छोड़ दें, जिससे बचाई गई कीमत गरीब परिवारों को दी जा सके. इस अभियान के शुरू होने के पहले ही साल करीब 1 करोड़ लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी थी.
2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
मई 2016 में सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) शुरू की. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को फ्री LPG कनेक्शन उपलब्ध कराना था. इस योजना के तहत 14.2 किलो के कनेक्शन पर 2,200 रुपये तक का फायदा, 5 किलो के कनेक्शन पर 1,300 रुपये तक का फायदा दिया गया. इसके अलावा गैस चूल्हा खरीदने के लिए ब्याज फ्री लोन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई.
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उज्ज्वला योजना कैसे आगे बढ़ी?
1. पहला चरण (2016-2019) - शुरुआती लक्ष्य 8 करोड़ LPG कनेक्शन देने का था, जिसे सितंबर 2019 तक पूरा कर लिया गया.
2. दूसरा चरण उज्ज्वला 2.0 (2021-2022) - इसके तहत अतिरिक्त 1.6 करोड़ कनेक्शन दिसंबर 2022 तक जारी किए गए.
3. तीसरा चरण (2023-2026) - सरकार ने 75 लाख अतिरिक्त कनेक्शन मंजूर किए और जुलाई 2024 तक यह लक्ष्य भी पूरा कर लिया गया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 तक देशभर में कुल 10.33 करोड़ PMUY कनेक्शन जारी किए जा चुके थे.
उज्ज्वला योजना के तहत यूजर्स को अब कितनी सब्सिडी मिलती है?
सरकार की ओर से मई 2022 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलो के LPG सिलेंडर पर 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की गई थी. इसके बाद अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया. जब उज्ज्वला योजना शुरू हुई थी, तब लोगों को हर साल 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे. इसके बाद यह संख्या घटाकर 9 सिलेंडर कर दी गई और ब उज्जवला योजना के तहत लाभार्थियों को साल में केवल 4 सिलेंडर पर ही सब्सिडी मिलेगी. यह बदलाव PMUY परिवारों की औसत खपत को ध्यान में रखकर किया गया.
अब कितने रुपये का फायदा होता है?
दिल्ली में 942 रुपये की कीमत वाले सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रभावी रूप से 642 रुपये का भुगतान करना पड़ता है. सरकार की अनुमानित सप्लाई लागत करीब 1,600 रुपये प्रति सिलेंडर है. वहीं योजना का फायदा लेने वाले परिवारों को हर सिलेंडर पर लगभग 1,000 रुपये तक की मदद मिल रही है.
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