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United Nations Role: ईरान पर हमलों का विरोध क्यों नहीं कर रहा संयुक्त राष्ट्र, आखिर क्या था इसे बनाने का मकसद?

United Nations Role: अमेरिका और इजरायल के ईरान के हमले के बाद अब तनाव काफी ज्यादा बढ़ चुका है. आइए जानते हैं कि यूनाइटेड नेशंस ईरान पर हमले का विरोध क्यों नहीं कर रहा.

United Nations Role: अमेरिका और इजरायल के ईरानी शहरों पर मिलकर हवाई हमले के बाद तनाव काफी ज्यादा बढ़ चुका है. इस बिगड़ते हालात के बीच लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यूनाइटेड नेशंस ईरान पर हमले का विरोध क्यों नहीं कर रहा है? आइए जानते हैं कि यूनाइटेड नेशंस बनाने के पीछे असली मकसद क्या था?

यूनाइटेड नेशंस चुप क्यों है?

हाल ही में यूनाइटेड नेशंस सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने इन हमलों को इंटरनेशनल कानून और यूनाइटेड नेशंस चार्टर का उल्लंघन बताया है.  हालांकि बयान जारी करना ठोस कार्रवाई करने से अलग है. यूनाइटेड नेशंस के पास कोई इंडिपेंडेंस मिलिट्री फोर्स नहीं है और कोई भी जरूरी कार्रवाई उसकी सबसे ताकतवर बॉडी यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल से होकर गुजारनी चाहिए.

सिक्योरिटी काउंसिल के अंदर मतभेद

यूनाइटेड नेशंस के पक्के तौर पर कार्रवाई ना कर पाने की मुख्य वजह सिक्योरिटी काउंसिल के अंदर गहरा मतभेद है. काउंसिल के पांच परमानेंट मेंबर यूनाइटेड स्टेट्स, रूस, चीन, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के पास वीटो पावर है.

मौजूदा हालातों में रूस और चीन ने  कथित तौर पर हमले की बुराई और निंदा की है. इसी के साथ यूनाइटेड स्टेट्स ने उन्हें सही और सेल्फ डिफेंस का काम बताया है. जब परमानेंट मेंबर में तीखी असहमति होती है तो आम सहमति बनना लगभग नामुमकिन है. इन ताकतों के बीच एकता के बिना सिक्योरिटी काउंसिल कोई मजबूत प्रस्ताव पास नहीं कर सकती.

वीटो पावर का असर

वीटो सिस्टम यूनाइटेड नेशंस के स्ट्रक्चर के सबसे विवादित पहलुओं में से एक है. पांच परमानेंट मेंबर में से कोई भी किसी भी प्रस्ताव को रोक सकता है. अब भले ही ज्यादातर देश उसका समर्थन करें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. अगर यूनाइटेड स्टेट्स या इजरायल की बुराई या उस पर रोक लगाने वाला कोई भी प्रस्ताव पेश किया जाता है तो यूनाइटेड स्टेट्स उसे रोकने के लिए अपने वीटो का इस्तेमाल कर सकता है. यह यूनाइटेड नेशंस की ऐसी लड़ाइयों में रोक लगाने, शांति अभियानों को मंजूरी देने या कार्रवाई लागू करने के उपाय करने की क्षमता को कमजोर कर देता है.

न्यूक्लियर प्रोग्राम का तर्क

एक और मुश्किल बात यूनाइटेड नेशंस और इजरायल का दिया गया तर्क है. उनका तर्क है कि उनके हमले ईरान के न्यूक्लियर हथियारों के डेवलपमेंट को रोकने के लिए हैं. यूनाइटेड नेशन के सिस्टम के कुछ देश इस बात का थोड़ा सपोर्ट करते हैं या फिर समझते हैं. जब सदस्य देश इस बात पर सहमत नहीं होते की कोई कार्रवाई हमला है या खुद की सुरक्षा है तो एक राय बनाना मुश्किल हो जाता है.

क्यों बनाया गया था यूनाइटेड नेशंस?

यूनाइटेड नेशंस की स्थापना 1945 में दूसरे विश्व युद्ध की तबाही के बाद हुई थी. इसका मकसद एक और ग्लोबल युद्ध को रोकना और इंटरनेशनल शांति और सुरक्षा को बनाए रखना था. इसके मुख्य मकसद में देशों के बीच झगड़े का शांति से हल निकालना, मानवाधिकारों की रक्षा करना, देशों के बीच दोस्ताना रिश्ते बनाना और मुश्किल समय में मानवीय मदद देना शामिल है.  इस संगठन का मकसद एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करना था. जहां पर देश लड़ाई के बजाय बातचीत से तनाव सुलझा सकें.

यह भी पढ़ें: कितने रुपये में तैयार होता है अमेरिका का एक F-15 फाइटर जेट, जिसे ईरान ने कर दिया तबाह?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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