Chenab-Beas Link Project: चिनाब और ब्यास नदी को जोड़ने में कितना आएगा खर्च, इससे कितना बढ़ जाएगा भारत का पानी?
Chenab-Beas Link Project: हाल ही में केंद्र सरकार ने चिनाब ब्यास लिंक टनल परियोजना के लिए समय सीमा तय कर दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट में कितना खर्चा आएगा.

- चिनाब का अतिरिक्त पानी ब्यास में मोड़ने की योजना.
- 8.7 किमी लंबी सुरंग से ₹2,352 करोड़ की लागत.
- 1 अगस्त 2026 से निर्माण, 31 जुलाई 2029 तक पूर्ण.
- सिंचाई, पेयजल और 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन में वृद्धि.
Chenab-Beas Link Project: केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में एक प्रमुख सुरंग परियोजना के जरिए से चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी बेसिन में मोड़ने की योजना शुरू की है. चिनाब ब्यास लिंक सुरंग परियोजना के रूप में जानी जाने वाली इस परियोजना का उद्देश्य भारत के जल उपयोग में सुधार करना और कई उत्तरी राज्यों में पानी की उपलब्धता को मजबूत करना है. योजना के तहत चिनाब के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी की तरफ मोड़ने के लिए लाहौल और स्पीति जिले में 8.7 किमी लंबी सुरंग को बनाया जाएगा. केंद्र ने परियोजना को पूरा करने के लिए 31 जुलाई 2029 की समय सीमा रखी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस परियोजना में कितनी लागत आएगी और इससे कितना बढ़ जाएगा भारत का पानी.
परियोजना की लागत
रिपोर्ट्स के मुताबिक चिनाब ब्यास लिंक सुरंग परियोजना की लागत लगभग ₹2,352 करोड़ है. अगर जम्मू कश्मीर में सलाल बांध पर गाद प्रबंधन काम के साथ संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शामिल कर लिया जाता है तो इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्चा लगभग ₹2600 करोड़ तक बढ़ सकता है.
कब होगा निर्माण कार्य शुरू?
रिपोर्ट के मुताबिक परियोजना का निर्माण कार्य 1 अगस्त 2026 से शुरू होने की उम्मीद है. परियोजना को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी एनएचपीसी लिमिटेड को दी गई है. यह सुरंग निर्माण और संबंधित बुनियादी ढांचे की देखरेख करेगी.
यह भी पढ़ेंः दुनिया की सबसे लंबी लड़ाई कितने साल चली थी, क्या था उस युद्ध का परिणाम?
कैसे मोड़ा जाएगा पानी?
परियोजना के हिस्से के रूप में हिमाचल प्रदेश के कोकसर गांव के पास चिनाब की सहायक चंद्रा नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा. वहां से अतिरिक्त पानी को भूमिगत सुरंग के जरिए से ब्यास बेसिन में भेजा जाएगा.
ऐसा कहा जा रहा है कि परियोजना से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में पानी की उपलब्धता में काफी ज्यादा सुधार हो सकता है. अतिरिक्त पानी से सिंचाई प्रणालियों में मदद मिलेगी और पीने के पानी की आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है. इसी के साथ इस परियोजना से जल विद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है. रिपोर्ट के मुताबिक डायवर्ट किया गया पानी हिमाचल प्रदेश और उत्तरी ग्रिड के लिए लगभग 4000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली पैदा करने में मदद कर सकता है.
यह परियोजना काफी ज्यादा रणनीतिक महत्व रखती है क्योंकि 2025 पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने कथित तौर पर सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. ऐसा कहा जा रहा है कि अब इस परियोजना के बाद पाकिस्तान की तरफ पानी का प्रवाह कम हो सकता है और भारत की दीर्घकालिक जल रणनीति मजबूत हो सकती है.
यह भी पढ़ेंः इस जगह सिर्फ 13% लोगों के पास गाड़ी, जानें यहां कितनी है पेट्रोल-डीजल की कीमत?
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL

























