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कितनी पुरानी है हमारी धरती, वैज्ञानिक किस तकनीक से खोलते हैं पृथ्वी की उम्र के गहरे राज?

इंसान के आने से अरबों साल पहले बनी हमारी पृथ्वी की उम्र कई करोड़ साल पुरानी है. वैज्ञानिकों ने दो विशेष परमाणु तकनीकों से जांच करके इस गहरे राज को पूरी दुनिया के सामने खोला है.

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  • इन विधियों से पृथ्वी की 454 करोड़ वर्ष आयु के अकाट्य प्रमाण मिले हैं.

हम जिस खूबसूरत नीली धरती पर रहते हैं, उसका इतिहास हमारी कल्पना से भी कहीं ज्यादा पुराना और गहरा है. अगर इंसानी इतिहास की बात करें, तो पृथ्वी पर इंसानों का वजूद महज 10,000 से 35,000 साल पुराना ही माना जाता है. लेकिन विज्ञान की आधुनिक रिसर्च और खोजों ने यह साबित कर दिया है कि हमारी इस धरती की कुल उम्र करीब 454 करोड़ वर्ष है. अब सबसे बड़ा और दिलचस्प सवाल यह उठता है कि जब इस धरती के जन्म के समय कोई इंसान मौजूद ही नहीं था, तो वैज्ञानिकों ने बिना किसी लिखित रिकॉर्ड या गवाह के इस जादुई और सटीक आंकड़े को आखिर कैसे ढूंढ निकाला?

विज्ञान की दो जादुई प्रणालियां

अति प्राचीन और अरबों साल पुरानी चीजों के कालखंड यानी समय का सटीक पता लगाने के लिए विज्ञान मुख्य रूप से दो बेहतरीन प्रणालियों का इस्तेमाल करता है. इन दोनों वैज्ञानिक तकनीकों के नाम कार्बन डेटिंग और यूरेनियम डेटिंग हैं. इन दोनों ही प्रणालियों का काम करने का तरीका और उनका आधार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है. जब वैज्ञानिकों को किसी खोई हुई सभ्यता या इतिहास के पन्नों को खंगालना होता है, तो वे इन्हीं दोनों तकनीकों की मदद से पत्थरों, जीवाश्मों और प्राचीन अवशेषों की जांच करके उनके बनने का सही समय तय करते हैं. 

क्या होती है कार्बन डेटिंग?

कार्बन डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उन चीजों की उम्र का पता लगाने के लिए किया जाता है, जो कभी न कभी जीवित अवस्था में रही हों. इस श्रेणी में इंसान, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और हर तरह के जीव-जंतु आते हैं. जब तक कोई जीव जीवित रहता है, वह एक निश्चित मात्रा में कार्बन लेता है. जीवन खत्म होने के बाद भी इन जीवों के अवशेष कई करोड़ साल तक सुरक्षित रह सकते हैं. वैज्ञानिक इन अवशेषों में बचे हुए कार्बन के स्तर की कड़े परीक्षणों के जरिए जांच करते हैं, जिससे उनके कालखंड और मौत के समय का सटीक अंदाजा मिल जाता है. 

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यूरेनियम डेटिंग से खुला बड़ा राज

कार्बन डेटिंग से भी लाखों-करोड़ों साल पुरानी निर्जीव चीजों की उम्र जानने के लिए यूरेनियम डेटिंग तकनीक का सहारा लिया जाता है. जब धरती के भीतर से निकलने वाला गर्म लावा या मैग्मा धीरे-धीरे ठंडा होता है, तो वह 'जिरकॉन क्रिस्टल' नामक बेहद मजबूत पत्थरों में बदल जाता है. इन जिरकॉन क्रिस्टल के अंदर प्राकृतिक रूप से यूरेनियम तत्व मौजूद रहता है. समय के चक्र के साथ यह यूरेनियम बहुत ही धीमी गति से धीरे-धीरे सड़ता और गलता रहता है. इसी यूरेनियम के सड़ने के अनुपात और उसकी गति की बारीकी से गणना करके वैज्ञानिक इस ठोस नतीजे पर पहुंचते हैं कि वह चीज कितनी पुरानी है.

454 करोड़ साल का पुख्ता सबूत

वैज्ञानिकों ने जब धरती के अलग-अलग कोनों से मिले सबसे प्राचीन पत्थरों और जिरकॉन क्रिस्टल की यूरेनियम डेटिंग तकनीक से गहन जांच की, तब जाकर पृथ्वी के 454 करोड़ साल पुराने होने के पुख्ता और अकाट्य सबूत मिले. यह तकनीक इतनी सटीक है कि इससे न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों और चांद से लाए गए पत्थरों की उम्र का भी आसानी से पता लगाया जा चुका है. इसी अद्भुत परमाणु गणना के आधार पर आज पूरी दुनिया का विज्ञान बिना किसी शक के हमारी पृथ्वी की इस विशाल और हैरान कर देने वाली उम्र को स्वीकार करता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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