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न मिडिल में है और न ईस्ट में, फिर पर्शियन गल्फ को क्यों कहा जाता है मिडिल ईस्ट?

मिडिल ईस्ट शब्द की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में मानी जाती है. इसे सबसे पहले अमेरिकी नौसेना रणनीतिकार Alfred Thayer Mahan ने 1902 में इस्तेमाल किया था. उस समय यूरोप को दुनिया का केंद्र माना जाता था.

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर दुनियाभर के देशों में देखने को मिल रहा है. इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के साथ शुरू हुआ यह युद्ध अब बड़ा रूप लेता जा रहा है. लगातार हो रहे हमलों के चलते पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है. इसके अलावा इस युद्ध मेंदुनिया भर की नजर रणनीतिक रूप से समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर बनी हुई हैं. कई देशों ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

इसके अलावा लोगों के मन में अक्सर यह सवाल भी उठता है कि आखिर यह इलाका मिडिल या ईस्ट में कहां है? दरअसल, पर्शियन गल्फ को दुनियाभर में मिडिल ईस्ट कहा जाता है, लेकिन यह इलाका न मिडिल में है और न ही ईस्ट में. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पर्शियन गल्फ को मिडिल ईस्ट क्यों कहा जाता है. 

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यूरोप के नजरिए से पड़ा मिडिल ईस्ट का नाम 

मिडिल ईस्ट शब्द की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में मानी जाती है. इसे सबसे पहले अमेरिकी नौसेना रणनीतिकार Alfred Thayer Mahan ने 1902 में इस्तेमाल किया था. उस समय यूरोप को दुनिया का केंद्र माना जाता था और बाकी क्षेत्रों को उसी के हिसाब से नाम दिए जाते थे. यूरोप के पास के इलाकों को नियर ईस्ट कहा गया जबकि चीन और जापान जैसे दूर के देशों को फार ईस्ट कहा गया. इनके बीच पड़ने वाले इलाकों जैसे ईरान, इराक, सऊदी अरब और इजरायल को मिडिल ईस्ट नाम दिया गया यानी यह नाम पूरी तरह यूरोप केंद्रित सोच से निकला हुआ माना जाता है. 

पर्शियन गल्फ से जुड़ाव लेकिन नाम अलग 

वहीं पर्शियन गल्फ के आसपास बसे देश को लोग मिडिल ईस्ट समझ लेते हैं, जबकि असल में यह खाड़ी देश हैं. इनमें यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन ओमान और सऊदी अरब शामिल हैं. यह सभी देश मिडिल ईस्ट क्षेत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन पर्शियन गल्फ खुद मिडिल ईस्ट नहीं है बल्कि उसे क्षेत्र का एक अहम हिस्सा है. गल्फ देश उन देशों को कहा गया है जो पर्शियन गल्फ के आसपास बसे हुए हैं. मिडिल ईस्ट के अंदर ईरान, इराक, सऊदी अरब और इजरायल के अलावा सीरिया, लेबनान, जॉर्डन, तुर्की, कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान, यमन, लीबिया, साइप्रस, इजिप्ट और संयुक्त अरब अमीरात जैसे  देश भी आते हैं.  हालांकि मिडिल ईस्ट की कोई तय सीमा नहीं है इसलिए अलग-अलग जगह पर इसकी परिभाषा थोड़ी बदल सकती है. 

भारत की नजरिये से वेस्ट एशिया 

वहीं अगर भारत या एशिया के नजरिये से देखा जाए तो यह देश ईस्ट में नहीं बल्कि पश्चिम में आते हैं. इसी वजह से भारत में इस क्षेत्र को पश्चिम एशिया कहा जाता है. वहीं सरकारी डाक्यूमेंट्स और पढ़ाई में भी इस शब्द का इस्तेमाल ज्यादा सही माना जाता है. ज्यादातर लोग मिडिल ईस्ट को गल्फ कंट्री को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग है. खाड़ी देश वह हैं जो पर्शियन गल्फ के आसपास बसे हैं, इनमें प्रमुख रूप से यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर ओमान और सऊदी अरब शामिल हैं. वहीं अरब देश शब्द भाषा और संस्कृति के आधार पर दिया गया है. जिन देशों में अरबी बोली जाती है और जिनकी पहचान अरब सभ्यता से जुड़ी है, उन्हें अरब देश कहा जाता है. ये देश मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका दोनों जगह फैले हुए हैं. 

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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