सबसे कम कमाई करने वाले राज्यों से कितनी ज्यादा है दिल्ली वालों की इनकम? होश उड़ा देंगे आंकड़े
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 दिल्ली की मजबूत होती अर्थव्यवस्था तस्वीर साफ कर रहा है. राजधानी की अर्थव्यवस्था को लेकर सामने आए डेटा के अनुसार दिल्ली देश के सबसे समृद्ध राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं.

दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार का अपना नया आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया है. यह आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 दिल्ली की मजबूत होती अर्थव्यवस्था तस्वीर साफ कर रहा है. दरअसल राजधानी के अर्थव्यवस्था को लेकर सामने आए आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार दिल्ली देश के सबसे समृद्ध राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं. खासकर बात यह है कि यहां की प्रति व्यक्ति आय 2.5 गुना ज्यादा होने के साथ ही न सिर्फ राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है बल्कि कमाई वाले राज्यों के मुकाबले कई गुना आगे निकल चुकी है. वहीं यह अंतर बताता है कि दिल्ली आर्थिक रूप से कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि सबसे कम कमाई करने वाले राज्यों से दिल्ली वालों की इनकम कितनी ज्यादा है.
दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय ने बनाया रिकॉर्ड
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर करीब 5,31,610 होने का अनुमान है. यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. 2023-24 में दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय करीब 4,57,708 रुपये थीं. वहीं 2024-25 में प्रति व्यक्ति आय 4,92,592 हो गई. इसके बाद 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण में यह आय और बढ़ गई है. वहीं दिल्ली की यह आय देश के औसत से करीब 2.5 गुना ज्यादा है, जो बताती है कि दिल्ली के लोगों की कमाई देश के कई आय वाले राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है. यही वजह है की राजधानी को हाई इनकम इकोनॉमी के तौर पर भी देखा जा रहा है.
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दिल्ली की अर्थव्यवस्था में भी दिखी दमदार रफ्तार
सर्वे के अनुसार 2025-26 में दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 13.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 9.4 प्रतिशत विकास दर रहने की उम्मीद है. वहीं स्थिर कीमतों पर भी 8.5 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान है जो लगातार आर्थिक मजबूती की ओर इशारा करती है. इसके अलावा दिल्ली की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. कुल आर्थिक गतिविधियों में इसका योगदान करीब 86.3 प्रतिशत है, इसके बाद उद्योग क्षेत्र 12.8 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र में करीब 0.8 प्रतिशत है. यह वजह है कि राजधानी को एक आधुनिक और सर्विस सेक्टर आधारित अर्थव्यवस्था माना जा रहा है.
बजट और खर्च में बड़ी बढ़ोतरी
दिल्ली सरकार ने 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है. इसमें 59,300 करोड़ रुपये योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च किए जाएंगे जो पिछले साल के मुकाबले 20,300 करोड़ रुपये से ज्यादा है. वहीं परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, जलापूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टरों पर सबसे ज्यादा फोकस रखा गया है. जिससे विकास की रफ्तार को और तेज करने की कोशिश की जा रही है.
टैक्स कलेक्शन और राजस्व की स्थिति भी मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार सरकार का राजस्व ढांचा भी बहुत मजबूत बना हुआ है. कुल खर्च का बड़ा हिस्सा खुद के टैक्स से पूरा किया जा रहा है. जीएसटी और वीएटी मिलकर कुल टैक्स राजस्व का 71 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दे रहे हैं. वहीं 2025-26 में टैक्स कलेक्शन में 15.5 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों पर जोर के चलते पूंजीगत व्यय में 145 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इसी वजह से 2025-26 में फिस्कल डेफिसिट 13,703 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, हालांकि यह जीएसडीपी के तीन प्रतिशत की सीमा के भीतर है.
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Source: IOCL




























