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UCC In Gujarat: अब तक किन राज्यों में लागू हो चुका यूसीसी कानून, जानें कहां के नियम सबसे सख्त?

UCC In Gujarat: गुजरात ने सबसे सख्त समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया है. यह कानून विवाह, तलाक, संपत्ति और लिव-इन जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक नियम लागू करता है.

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  • गुजरात ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर इतिहास रचा.
  • संपत्ति पर बेटियों को मिलेगा बेटों के बराबर हक.
  • लिव-इन संबंधों के लिए कड़े पंजीकरण नियम लागू.
  • हलाला, इद्दत और बहु-विवाह पर लगी रोक.

UCC In Gujarat: भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर दशकों से चली आ रही बहस अब धरातल पर उतरने लगी है. उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने अपने यहां इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कर दिया है. यह कानून केवल विवाह या संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को एक समान कानूनी पायदान पर खड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. गुजरात का यह फैसला देश की राजनीति और सामाजिक ढांचे में बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है. 

गुजरात बना यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य

गुजरात विधानसभा में मंगलवार की रात एक ऐतिहासिक पल रहा जब गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026 विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया गया. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस बिल के दौरान सदन में काफी गहमागहमी देखने को मिली और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने वोटिंग का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया. इस विधेयक के पास होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद भारत का ऐसा तीसरा राज्य बन गया है जिसने आधुनिक भारत में अपना स्वतंत्र यूसीसी कानून तैयार किया है. वहीं गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से ही समान नागरिक संहिता लागू है, लेकिन नए नियमों के तहत गुजरात की पहल काफी महत्वपूर्ण है.

किन लोगों पर लागू होगा यह नया कानून

गुजरात का यह यूसीसी कानून राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर रहने वाले नागरिकों पर तो लागू होगा ही, साथ ही यह उन गुजरातियों पर भी प्रभावी होगा जो वर्तमान में राज्य से बाहर रह रहे हैं. हालांकि, संविधान की गरिमा और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस कानून से अनुसूचित जनजातियों (ST) को बाहर रखा गया है. उनके पारंपरिक और संवैधानिक अधिकारों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. यह स्पष्ट करता है कि कानून का उद्देश्य एकरूपता लाना है, न कि किसी की व्यक्तिगत पहचान या परंपराओं को जबरन खत्म करना. 

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संपत्ति के अधिकारों में बेटियों को बराबरी

गुजरात और उत्तराखंड दोनों के यूसीसी मॉडल में संपत्ति के अधिकारों पर विशेष जोर दिया गया है. गुजरात के नए कानून के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत किए हो जाती है, तो उसकी संपत्ति पर उसके माता-पिता, पति या पत्नी और बच्चों का बराबर हक होगा. पहले के कई व्यक्तिगत कानूनों में बेटियों या माता-पिता के हक को लेकर असमानताएं थीं, जिन्हें अब खत्म कर दिया गया है. अब बेटा हो या बेटी, पैतृक संपत्ति में सभी को समान हिस्सेदार माना जाएगा, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है.

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े पंजीकरण नियम

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर गुजरात सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. नए नियमों के तहत अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. यदि पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो इस बात की जानकारी उनके अभिभावकों को देना जरूरी कर दिया गया है. पंजीकरण की यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी. यदि कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के एक महीने से ज्यादा समय तक साथ रहता है, तो उन्हें 3 महीने की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है. यह नियम सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है. 

लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को कानूनी सुरक्षा

कानून में लिव-इन संबंधों से पैदा होने वाले बच्चों के भविष्य का भी पूरा ध्यान रखा गया है. गुजरात यूसीसी के तहत ऐसे बच्चों को पूरी तरह वैध माना जाएगा और उन्हें वे सभी अधिकार मिलेंगे जो एक विवाहित जोड़े के बच्चों को मिलते हैं. यदि लिव-इन रिलेशनशिप टूटता है और महिला को अकेला छोड़ दिया जाता है, तो वह कानूनी तौर पर अपने पार्टनर से भरण-पोषण (Maintenance) की हकदार होगी. इसके अलावा, बच्चे की पूरी जिम्मेदारी माता-पिता दोनों की होगी और उन्हें बच्चे को अपना नाम देना अनिवार्य होगा.

तलाक की प्रक्रिया और व्यक्तिगत कानूनों का अंत

गुजरात में अब किसी भी व्यक्तिगत या प्रथागत कानून के आधार पर दिया गया तलाक मान्य नहीं होगा. अब तलाक के लिए केवल अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा. क्रूरता, धर्म परिवर्तन, मानसिक बीमारी या लंबे समय तक जीवनसाथी के लापता होने जैसे ठोस आधारों पर ही तलाक मिल सकेगा. यदि पति-पत्नी एक साल से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दे सकते हैं. अदालत के फैसले के 60 दिनों के भीतर इसे रजिस्ट्रार के पास दर्ज कराना अनिवार्य होगा. यह व्यवस्था तलाक की प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाएगी.

अब नहीं चलेगा हलाला और इद्दत 

उत्तराखंड की तर्ज पर गुजरात के यूसीसी में भी बहु-विवाह, हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर कड़ा प्रहार किया गया है. अब राज्य में कोई भी व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो. हलाला जैसी प्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. विवाह और तलाक के नियम अब धर्म के बजाय देश के कानून से संचालित होंगे. विवाह का पंजीकरण भी अब अनिवार्य होगा, जिससे धोखाधड़ी और कानूनी विवादों में कमी आने की उम्मीद है.

कहां के नियम-कानून ज्यादा सख्त?

उत्तराखंड और गुजरात ने समान नागरिक संहिता (UCC) के जरिए सामाजिक अनुशासन की नई और बेहद सख्त परिभाषा लिखी है. इन दोनों राज्यों में अब निजी जीवन के फैसले केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि कानूनी जवाबदेही के दायरे में हैं. उत्तराखंड ने लिव-इन जोड़ों के लिए अनिवार्य पंजीकरण और पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबर का हक देकर कड़ा रुख अपनाया, तो वहीं गुजरात ने 2026 में विवाह और तलाक के पारंपरिक रास्तों को बंद कर अदालती नियमों को अनिवार्य बना दिया है. बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहना अब सीधे जेल की सजा और भारी जुर्माने को बुलावा देना है, जो इन कानूनों की सख्ती को साफ दर्शाता है. ऐसे में दोनों राज्यों में कानून बिल्कुल सख्त हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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