पाकिस्तानी रेलवे से कितनी अमीर है भारतीय रेल, कहां से आता है पैसा?
भारतीय रेलवे नेटवर्क का आकार, आय, रफ्तार और आत्मनिर्भरता के मामले में पाकिस्तानी रेलवे से 150 से 200 गुना बड़ी है. भारत जहां स्वदेशी तकनीक से अरबों डॉलर कमाता है, वहीं पाक इस मामले में पीछे है.

भारतीय उपमहाद्वीप में रेलवे का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है, लेकिन समय के साथ दोनों देशों के रेल तंत्र का विकास बिल्कुल अलग दिशा में हुआ है. आर्थिक ताकत, नेटवर्क विस्तार और रोजाना की परिचालन क्षमता के मामले में भारतीय रेल, पाकिस्तानी रेल से 150 से 200 गुना से भी अधिक विशाल और संपन्न है. जहां एक तरफ भारतीय रेल विश्व के सबसे बड़े परिवहन तंत्रों में शुमार है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक संकटों और बुनियादी ढांचे की सुस्त चाल के कारण पाकिस्तानी रेलवे काफी सीमित संसाधनों के बीच काम कर रही है.
सालाना कमाई और दैनिक संचालन का विशाल अंतर
वित्तीय आंकड़ों और दैनिक परिचालन के स्तर पर दोनों देशों की रेलवे में जमीन-आसमान का फर्क है. भारतीय रेलवे का सालाना राजस्व लगभग 2.70 लाख करोड़ रुपये (31 से 35 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच जाता है. इसके विपरीत, पाकिस्तानी रेलवे की वार्षिक आय मात्र 150 से 170 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास सिमट कर रह जाती है. जहां भारत प्रतिदिन 12,600 से अधिक पैसेंजर गाड़ियों और हजारों मालगाड़ियों को पटरियों पर दौड़ाता है, वहीं पाकिस्तान में रोजाना केवल 228 के करीब मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का ही संचालन हो पाता है.
नेटवर्क का कितना बड़ा जाल?
नेटवर्क की लंबाई और स्टेशनों की संख्या में भी भारतीय रेल बहुत आगे है. भारत के पास 99,235 किलोमीटर से अधिक का विशाल ट्रैक नेटवर्क और 68,200 किलोमीटर से ज्यादा का रेल रूट उपलब्ध है, जो 7,000 से अधिक रेलवे स्टेशनों को आपस में जोड़ता है. यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. दूसरी तरफ, पाकिस्तान रेलवे का नेटवर्क काफी सीमित है, जिसके पास केवल 11,890 किलोमीटर का कुल रेल मार्ग और करीब 7,791 किलोमीटर लंबा ट्रैक नेटवर्क मौजूद है. रोजगार के मोर्चे पर भी भारत 12 लाख से अधिक कर्मियों के साथ दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल है, जो पाकिस्तान के रेल कर्मचारियों की संख्या से कई गुना ज्यादा है.
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तकनीक, गति और इलेक्ट्रिफाइड का अंतर
तकनीक और ट्रेनों की रफ्तार के मामले में भी दोनों तंत्रों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है. भारतीय रेल तेजी से आधुनिकीकरण की ओर बढ़ी है, जहां वंदे भारत जैसी स्वदेशी निर्मित सेमी-हाईस्पीड ट्रेनें 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हैं. साथ ही भारत का अधिकांश मुख्य रेल नेटवर्क पूरी तरह से बिजलीकृत हो चुका है. इसके मुकाबले, पाकिस्तानी रेलवे में मुख्य लाइनों पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार आमतौर पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही सीमित है और वहां पटरियों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है.
कोच और इंजन निर्माण में आत्मनिर्भरता
ट्रेनों के डिब्बे और इंजन बनाने के मामले में भारत पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो चुका है. रायबरेली, चेन्नई और कपूरथला जैसी निर्माण इकाइयों में भारत अपनी आधुनिक वंदे भारत, मेट्रो कोच और उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक इंजन खुद तैयार करता है. इसके विपरीत, पाकिस्तान में यद्यपि लोकोमोटिव और कैरेज बनाने की फैक्ट्रियां स्थापित हैं, लेकिन उनकी उत्पादन क्षमता और तकनीकी संसाधन सीमित हैं. यही कारण है कि नए इंजन, स्पेयर पार्ट्स और आधुनिक डिब्बों के लिए पाकिस्तान को काफी हद तक बाहरी देशों और विदेशी आयात पर निर्भर रहना पड़ता है.
भारतीय रेलवे की कमाई के मुख्य जरिया
भारतीय रेलवे की विशाल आय का सबसे बड़ा स्तंभ उसकी माल ढुलाई है. कुल राजस्व का लगभग 65% से 70% हिस्सा कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, स्टील और लौह अयस्क जैसे भारी सामानों के परिवहन से हासिल होता है. यात्री किराए (सामान्य और एसी श्रेणियों के टिकट) से कुल कमाई का करीब 25% से 30% हिस्सा आता है. इनके अलावा, रेलवे स्टेशनों पर विज्ञापन, केटरिंग सर्विस, जमीन को लीज पर देने और केंद्रीय रेल बजट से मिलने वाले भारी-भरकम सरकारी पूंजीगत निवेश से भारतीय रेल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखती है.

पाकिस्तानी रेलवे की कमाई का जरिया
पाकिस्तानी रेलवे का मुख्य राजस्व स्रोत माल ढुलाई के बजाय यात्री सेवाओं से मिलने वाला टिकट किराया है. माल ढुलाई के क्षेत्र में वह मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों, कोयले और सीमेंट के परिवहन से कमाई करती है और हाल ही में इसमें सुधार के लक्ष्य रखे गए हैं. इसके अतिरिक्त, रेलवे परिसर में वाणिज्यिक गतिविधियों, जमीनों को किराए पर देने, विज्ञापनों और निजी कंपनियों को ट्रेनें व स्टेशन आउटसोर्स करके आमदनी जुटाई जाती है. हालांकि, कम आय और ऊंचे प्रशासनिक खर्चों के कारण पाकिस्तानी रेलवे अक्सर घाटे में रहती है, जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए पाकिस्तानी सरकार को बजट से विशेष वित्तीय अनुदान देना पड़ता है.
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