क्या चीन की वजह से नेपाल में आई बाढ़, जानें ड्रैगन कैसे जिम्मेदार?
नेपाल में बिना भारी बारिश के नेपाल में अचानक आई बाढ़ के पीछे क्या है तिब्बत का कनेक्शन? जानिए कैसे चीनी सीमा से आए पानी ने कहर बरसाया और चीन की नीयत पर क्यों सवाल उठ रहे हैं.

नेपाल-चीन सीमा पर आई भीषण बाढ़ के पीछे मुख्य वजह तिब्बत के पठारी क्षेत्र से पानी का भारी दबाव होना है, लेकिन इसके लिए चीन को जिम्मेदार ठहराने की सबसे बड़ी वजह कम्युनिकेशन फेलियर यानी आपदा की जानकारी देने में की गई लापरवाही है. चीनी सीमा के भीतर लांडे और भोटेकोशी नदी का प्रवाह रुकने से बने कृत्रिम जलाशय के फटने और भारी मलबे के कारण अचानक यह बाढ़ आई.
चीन की लापरवाही से नहीं संभल पाया नेपाल?
विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन के केरुंग क्षेत्र में चीनी समयानुसार सुबह 10:30 बजे ही बाढ़ आ चुकी थी. नेपाल और चीन के समय में 2 घंटे 15 मिनट का अंतर है. इस लिहाज से नेपाली समय के अनुसार यह आपदा सुबह 8:15 बजे ही आ गई थी. अगर चीन तुरंत इसकी जानकारी नेपाल को दे देता, तो सीमावर्ती इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता था. लेकिन चीन की ओर से आधिकारिक जानकारी लगभग 45 मिनट की देरी से साझा की गई, जिससे नेपाल को संभलने का मौका ही नहीं मिला.
क्या है बाढ़ आने की वैज्ञानिक वजह?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तबाही के पीछे पहाड़ों में ग्लेशियर पिघलने या भूकंप के कारण भूस्खलन होना है. चीन में लांडे नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में चट्टान और बर्फ का एक विशाल हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया, जिससे नदी का रास्ता रुक गया और एक अस्थायी झील बन गई. जब पानी का दबाव बढ़ा, तो यह प्राकृतिक बांध टूट गया और करीब 33 फीट ऊंची मलबे और पानी की प्रचंड दीवार नेपाल की तरफ बढ़ गई, जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर दिया.
नेपाल में मची भारी तबाही
बाढ़ का उद्गम चीनी क्षेत्र होने के कारण सबसे पहले तबाही वहीं देखने को मिली. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित चीन के ग्यिरोंग लैंड पोर्ट की बहुमंजिला इमारत महज कुछ ही सेकंड में ताश के पत्तों की तरह ढह गई और पानी में समा गई. चीनी मीडिया ने खुद स्वीकार किया है कि उनके इलाके में भी भारी नुकसान हुआ है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रेस्क्यू ऑपरेशन के कड़े आदेश दिए हैं.
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नेपाल को कितना हुआ नुकसान?
चीन की तरफ से आए इस पानी के सैलाब ने नेपाल के कई जिलों, खासकर रसुवा में भारी नुकसान पहुंचाया है. इस बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मुख्य मितेरी पुल पानी में पूरी तरह बह गया है. साथ ही पासंग ल्हामु हाईवे का करीब 40 किलोमीटर का हिस्सा और कई संपर्क पुल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं. इस बाढ़ के कारण नेपाल की करीब 15 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे देश की कुल बिजली आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा ठप हो गया है.
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