हवाई जहाज के टायर में क्यों भरी जाती है नाइट्रोजन, क्यों नहीं होता हवा का इस्तेमाल?
Aircraft Tires: हवाई जहाज के टायर में नॉर्मल हवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. आइए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की वजह और क्या है इसका फायदा.

- टायर के दबाव को स्थिर रखती, विशेष बनावट सुरक्षित बनाती है।
Aircraft Tires: हवाई जहाज के टायर इस तरह से बनाए जाते हैं कि वह सामान्य गाड़ी के टायरों की तुलना में काफी ज्यादा मुश्किल परिस्थितियों को झेल सकें. इनमें 200 पीएसआई से 320 पीएसआई तक का दबाव होता है, जो गाड़ी के टायरों में पाए जाने वाले दबाव से लगभग 7 से 10 गुना ज्यादा है. लैंडिंग के दौरान तेज रफ्तार, घर्षण और जोरदार ब्रेकिंग की वजह से टायर और पहियों में काफी ज्यादा गर्मी पैदा होती है.
इन्हीं वजहों से सामान्य हवा की जगह नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा करने से आग लगने से बचाव, नमी पर कंट्रोल, जंग से सुरक्षा और दबाव में स्थिरता बनी रहती है. यह हवाई जहाज की कुल सुरक्षा के लिए काफी जरूरी है.
आग और अंदरूनी विस्फोट को रोकना
जब भी कोई भारी कमर्शियल विमान 250 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से जमीन पर उतरता है तो घर्षण और ब्रेकिंग की वजह से टायर और पहियों का तापमान 150 डिग्री सेल्सियस से 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. सामान्य हवा में लगभग 21% ऑक्सीजन होती है.
ज्यादा तापमान पर टायर के रबड़ से निकलने वाले वोलेटाइल हाइड्रोकार्बन ऑक्सीजन के साथ मिलकर टायर के अंदर एक विस्फोटक मिश्रण बना सकते हैं. यह खतरा तब और भी ज्यादा गंभीर हो जाता है जब जोरदार ब्रेकिंग की जाए या फिर टेक ऑफ को बीच में ही रद्द करना पड़े.
नाइट्रोजन इस खतरे को कम करने में मदद करती है क्योंकि यह एक अक्रिय गैस हैक्ष और आग लगने में मदद नहीं करती. हवाई जहाज के टायरों में 95% से 99% शुद्धता वाली नाइट्रोजन भरी जाती है. इससे आग लगने के लिए जरूरी ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है.

नमी और बर्फ जमने से बचाव
सामान्य हवा का इस्तेमाल करने पर नमी भी एक बड़ी समस्या बन सकती है. हवा में वॉटर वेपर होता है और काफी ज्यादा ऊंचाई पर हवाई जहाज को काफी ठंडी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. 35000 फीट की ऊंचाई पर बाहरी तापमान गिरकर - 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में टायर के अंदर मौजूद पानी जम सकता है और बर्फ के क्रिस्टल बन सकते हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक लैंडिंग के दौरान एक और खतरा भी होता है. जैसे-जैसे पहिए तेजी से घूमने लगते हैं और तापमान बढ़ता है बर्फ बदलकर उच्च तापमान वाली भाप बन सकती है. पानी का तेजी से भाप में बदलने से दबाव अचानक काफी बढ़ सकता है. इसकी वजह से रनवे पर टायर फट भी सकता है. इंडस्ट्रियल नाइट्रोजन सूखी होती है और इसमें नमी नहीं होती. यह टायर के अंदर बर्फ जमने से रोकती है और -50 डिग्री सेल्सियस से लेकर 200 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में होने वाले अचानक दबाव के बदलाव को कम करती है.

रबर और धातु के हिस्सों की सुरक्षा
वक्त के साथ ऑक्सीजन की नमी टायर की सामग्री और पहिए की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती है. इनकी मौजूदगी से रबर का ऑक्सीडेशन होता है. इससे वह अंदर से खराब होने लगता है. इसके अलावा यह धातु के पहिए के रिम में जंग की वजह बन सकती हैं.
सूखी नाइट्रोजन इन समस्याओं को कम करने में मदद करती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह रबर या धातु के साथ उस तरह से रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती जैसे ऑक्सीजन और नमी कर सकती है.
टायर के दबाव को बनाए रखना
हवाई जहाज के टायरों में काफी छोटे-छोटे छेद होते हैं जिनसे गैस धीरे-धीरे बाहर निकल सकती है. ऑक्सीजन के अणु नाइट्रोजन के अणुओं की तुलना में थोड़े छोटे और ज्यादा गतिशील होते हैं. इससे ऑक्सीजन रबर की दीवारों से 3 से 4 गुना तेजी से बाहर निकल सकती है. क्योंकि हवाई जहाज के टायर काफी ज्यादा दबाव पर काम करते हैं इस वजह से दबाव में थोड़ी सी भी कमी आने पर टेक ऑफ या लैंडिंग के दौरान उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है.
खास बनावट और सुरक्षा विशेषता
हवाई जहाज के टायरों की बनावट भी सामान्य टायरों से अलग होती है. इनमें रबर के साथ नायलॉन और केवलर जैसी सिंथेटिक सामग्री की 20% से 38% आपस में गुंधी होती हैं. केवलर का इस्तेमाल बुलेट प्रूफ जैकेट में भी किया जाता है. यह टायर को 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन करने में मदद करता है.
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