भारत से कौन-से अनाज खरीदता है रूस, इससे कितनी होती है कमाई?
भारत रूस को चावल के समेत कई अनाज भेजता है. 2025 में रूस को भारत से 75.49 मिलियन डॉलर का चावल निर्यात हुआ था . जानें इस अनाज के कारोबार में भारत को कितनी कमाई होती है?

रूस और भारत के बीच में लंबे समय से मजबूत और गहरे रिश्ते रहे हैं . जब भारत और रूस के बीच में कारोबार की बात होती है तो आमतौर पर तेल, गैस, और अक्सर दूसरे बड़े व्यापारों की बात होती है. लेकिन इन दोनों देशो के बीच अनाज का व्यापार भी होता है. रूस खुद दुनिया के बड़े गेहूं के उत्पादकों देशो में शामिल है. वही दूसरी तरफ भारत रूस को चावल और कुछ दूसरे कृषि के उत्पादक निर्यात करता है. इसके अलावा भी कई अनाज भारत से रूस के बाजार में पहुंचते है. ऐसे में भारत और रूस का यह अनाज का कारोबार भारतीय किसानों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है. आइए जानते है रूस भारत से कौन-कौन से अनाज खरीदता है और इससे भारत को कितनी कमाई होती है.
रूस भारत से कौन से अनाज खरीदता है?
रूस को भारत से जानें वाले अनाज में चावल सबसे प्रमुख है. रूस भारत से बासमती चावल, गैर बासमती चावल और कुछ विशेष दालें खरीदता है. रूस में बासमती चावल की बेहद मांग रहती है चूंकि रूस में चावल का उत्पाद बेहद कम होता है. इसलिए व भारत से अच्छी गुणवत्ता वाले चावल खरीदता है. कृषि उत्पादकों में रूस भारत से मसूर की दाल, मूंग, चना दाल और पीली मटर की दाल खरीदता है. बहुत ही छोटी मात्रा में रूस भारत से कभी-कभी ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाज भी खरीदता है.
चावल की होती है अच्छी मांग
भारत दुनिया के बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल है. बासमती के साथ-साथ गैर-बासमती चावल भी दूसरे देशों में भेजा जाता है. रूस भी भारतीय चावल खरीदने वाले देशों में शामिल है. भारत से रूस को चावल का निर्यात समय के साथ बढ़ा है. व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारत ने रूस को करीब 75.49 मिलियन डॉलर का चावल भेजा. यह भारतीय रुपये में करीब 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम है. डॉलर की कीमत में बदलाव के कारण रुपये में यह रकम कम या ज्यादा हो सकती है.
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दूसरे अनाजों का भी होता है निर्यात
चावल के अलावा भारत से कुछ दूसरे अनाज भी रूस जाते हैं. इसमें अलग-अलग तरह के मोटे अनाज और अन्य अनाज शामिल हैं. इनकी मात्रा चावल की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन रूस भारतीय कृषि उत्पादों के लिए एक बाजार है. अगर वहां भारतीय अनाज की मांग बढ़ती है तो आगे चलकर इसका फायदा निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को मिल सकता है.
भारत को कितनी कमाई होती है?
रूस को भारत से होने वाले चावल के निर्यात से अच्छी कमाई होती है. 2025 में करीब 75.49 मिलियन डॉलर का चावल रूस भेजा गया. इसके अलावा दूसरे अनाजों से भी कमाई होती है. हालांकि यह पूरी रकम किसानों की कमाई नहीं होती. इसमें पैकिंग, ट्रांसपोर्ट, प्रोसेसिंग और निर्यात से जुड़े दूसरे खर्च भी शामिल होते हैं. किसानों को मिलने वाली कीमत स्थानीय मंडी और बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करती है.
किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है यह कारोबार?
अगर किसी देश में भारतीय अनाज की मांग बढ़ती है तो किसानों के लिए भी नए बाजार बनते हैं. इससे निर्यात करने वाली कंपनियों को ज्यादा माल खरीदने की जरूरत पड़ सकती है. इसका फायदा किसानों को उनकी उपज की अच्छी मांग के रूप में मिल सकता है. हालांकि इसका सीधा असर हर किसान की कमाई पर नहीं पड़ता, क्योंकि कीमत कई दूसरी चीजों पर भी निर्भर करती है.
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