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रूफटॉप सोलर से 25 साल में कितनी होगी बचत, क्या जीरो होगा बिजली का बिल?

रूफटॉप सोलर सिस्टम में किया गया शुरुआती निवेश सब्सिडी के बल पर 4 से 5 साल में वसूल हो जाता है. इसके बाद अगले 20 से 25 वर्षों तक उपभोक्ता मुफ्त बिजली का लाभ उठाकर मुनाफा कमा सकते हैं.

अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर आप हर महीने आने वाले महंगे बिजली बिल से स्थायी राहत पा सकते हैं. यदि सही योजना के साथ सोलर सिस्टम चुना जाए, तो बिजली का बिल बहुत कम हो सकता है और अनुकूल परिस्थितियों में यह शून्य तक भी पहुंच सकता है. हालांकि, सोलर पैनल से होने वाला वित्तीय फायदा और बचत कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है. इसमें आपके सोलर पैनल की क्षमता, घर का दैनिक बिजली खर्च, स्थानीय बिजली कंपनियों के रेट और सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक रियायत यानी सब्सिडी मुख्य भूमिका निभाती है. इस बारे में भावना त्यागी, सीनियर प्रोग्राम लीड, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने विस्तार से बात की है. आइए एक्सपर्ट से पूरी बात जानें.

1 किलोवाट सोलर सिस्टम की लागत और सब्सिडी का गणित

भावना त्यागी का कहना है कि इसे एक आसान गणितीय उदाहरण से समझा जा सकता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर में 1 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल कराता है, तो उसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 50,000 रुपये बैठती है. केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत यदि उपभोक्ता को 30,000 रुपये की सब्सिडी मिल जाती है, तो उसकी वास्तविक जेब से लगने वाली राशि घटकर केवल 20,000 रुपये रह जाती है. इस प्रकार सरकारी प्रोत्साहन राशि से शुरुआती निवेश का बड़ा बोझ तुरंत कम हो जाता है, जिससे आम परिवारों के लिए इसे लगवाना काफी आसान हो जाता है.

दैनिक बिजली उत्पादन और वार्षिक बचत की गणना

भावना त्यागी  की मानें तो मौसम अनुकूल रहने और अच्छी धूप मिलने पर 1 किलोवाट का सोलर प्लांट रोजाना करीब 4 यूनिट बिजली बनाता है. इस हिसाब से एक महीने में लगभग 120 यूनिट सोलर बिजली तैयार होती है. यदि किसी परिवार की महीने की जरूरत भी 120 यूनिट ही है और वहां बिजली का सरकारी रेट 3 रुपये प्रति यूनिट है, तो उस परिवार के हर महीने लगभग 360 रुपये बचेंगे. इस तरह पूरे एक साल में कुल बचत 4,320 रुपये होगी. इस बचत के आधार पर देखें तो उपभोक्ता द्वारा लगाई गई 20,000 रुपये की शुरुआती लागत मात्र 4.6 वर्षों में पूरी तरह वापस वसूल हो जाती है.

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रूफटॉप सोलर से 25 साल में कितनी होगी बचत, क्या जीरो होगा बिजली का बिल?

25 साल में होने वाला कुल शुद्ध मुनाफा

सोलर पैनलों की कार्यक्षमता और तकनीकी उम्र औसतन 25 वर्ष मानी जाती है. यदि 1 किलोवाट का सिस्टम पूरे 25 सालों तक इसी दर से बिजली बनाता रहे, तो इतने समय में कुल मिलाकर लगभग 1,08,000 रुपये के बिजली बिल की बचत होगी. इसमें से अगर हम उपभोक्ता द्वारा शुरू में लगाए गए 20,000 रुपये घटा दें, तो भी केवल 1 किलोवाट के छोटे से सोलर प्लांट से 25 वर्षों में लगभग 88,000 रुपये का सीधा शुद्ध वित्तीय लाभ प्राप्त होता है.

बिजली बिल शून्य होने की शर्तें और नेट-मीटरिंग

रूफटॉप सोलर लगाने के बाद आपका बिजली बिल कितना घटेगा या शून्य होगा, यह तीन प्रमुख बातों पर निर्भर करता है. पहला यह कि आपने अपनी कुल खपत के अनुपात में सही साइज का प्लांट चुना है या नहीं. दूसरा यह कि आपकी बिजली कंपनी का टैरिफ स्लैब क्या है. तीसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक आपके राज्य के नेट-मीटरिंग और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचने (फीड-इन टैरिफ) के नियम हैं. कम बिजली खपत और अच्छी धूप वाले महीनों में नेट-मीटरिंग के जरिए बिल शून्य हो सकता है, लेकिन यह हर घर के इस्तेमाल के तरीके के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है.


रूफटॉप सोलर से 25 साल में कितनी होगी बचत, क्या जीरो होगा बिजली का बिल?

देश में सोलर क्षमता और जागरूकता की आवश्यकता

भारत में छतों पर सोलर लगाने की कुल तकनीकी क्षमता लगभग 118 गीगावाट आंकी गई है, जो इस क्षेत्र में विशाल संभावनाओं को दर्शाती है. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने इस दिशा में तेजी लाई है, लेकिन सीईईडब्ल्यू के रिसर्च के अनुसार जानकारी का अभाव अब भी बड़ी रुकावट है. लोगों में सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और वित्तीय लाभों के प्रति सही जागरूकता फैलाकर देश में लगभग 90 गीगावाट तक रूफटॉप सोलर क्षमता को आसानी से हासिल किया जा सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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