ट्रेन में साइकिल और स्कूटर कैसे ले जा सकते हैं, कैसे होती है बुकिंग?
Railway Luggage Booking: ट्रेन से आप साइकिल, बाइक और स्कूटर भी ले जा सकते हैं. आइए जानते हैं कि यह कैसे मुमकिन है और इसके लिए क्या प्रक्रिया होती है. जानें इसमें कितना खर्चा आएगा.

- भारतीय रेलवे से साइकिल, बाइक या स्कूटर भेजने के दो विकल्प हैं: सामान या पार्सल।
- यात्री यात्रा करते समय अपना वाहन सामान के तौर पर उसी ट्रेन से ले जा सकते हैं।
- बिना यात्रा किए भी आपका वाहन पार्सल सेवा से दूसरे शहर भेजा जा सकता है।
- बुकिंग हेतु आवश्यक दस्तावेज, सुरक्षित पैकिंग तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान अनिवार्य है।
Railway Luggage Booking: ट्रेन से एक शहर से दूसरे शहर तक साइकिल, बाइक या फिर स्कूटर ले जाना एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है. खासकर लंबी दूरी की यात्रा के लिए. इसके लिए भारतीय रेलवे इन वाहनों को ले जाने के दो तरीके देता है. पहला है सामान के तौर पर और दूसरा है पार्सल के तौर पर. आइए जानते हैं कि दोनों में क्या फर्क है और इसमें कितना खर्चा आएगा.
यात्रा करते समय सामान के तौर पर बुक करें
अगर आप उसी ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आप अपनी साइकिल, स्कूटर या फिर बाइक को सामान के तौर पर बुक कर सकते हैं. वाहन को ट्रेन के सामान वाले डिब्बे में रखा जाता है जिसे ब्रेक वैन भी कहते हैं. यात्रियों को ट्रेन के समय से लगभग तीन से चार घंटे पहले स्टेशन के पार्सल ऑफिस पहुंचना चाहिए. आपको अपना कंफर्म टिकट दिखाना होगा और जरूरी सामान वाला फॉर्म भरना होगा. लागू शुल्क का भुगतान करने के बाद रेलवे सामान का टिकट जारी करेगा और आपकी यात्रा टिकट पर एक एंट्री करेगी.
अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद आप जरूरी रसीद दिखाकर वाहन को ले सकते हैं. यह विकल्प आमतौर पर तेज होता है क्योंकि वाहन यात्री के साथ उसी ट्रेन में जाता है.

यात्रा न करने पर पार्सल के तौर पर बुक करें
अगर आप ट्रेन से यात्रा नहीं कर रहे हैं और सिर्फ अपनी साइकिल, स्कूटर या फिर बाइक को दूसरे शहर भेजना चाहते हैं तो आप इसे पार्सल के तौर पर भी बुक कर सकते हैं. इस मामले में आपको भेजने की तय तारीख से एक या फिर दो हफ्ते पहले स्टेशन के पार्सल ऑफिस जाना पड़ सकता है.
पार्सल फॉर्म भरने और बुकिंग पूरी करने के बाद रेलवे वाहन को उपलब्ध पैसेंजर ट्रेन या फिर मालगाड़ी से भेज सकता है. सामान की बुकिंग के उलट इसमें आपको अपने लिए ट्रेन टिकट खरीदने की जरूरत नहीं होती है. हालांकि पार्सल से भेजने में ज्यादा समय लग सकता है और डिलीवरी में एक से 7 दिन का समय लग सकता है.
बुकिंग के लिए जरूरी दस्तावेज
रेलवे स्टेशन जाने से पहले अपने पास ओरिजिनल दस्तावेज और उनकी फोटो कॉपी रखें. इनमें आमतौर पर वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, वाहन का वैलिड इंश्योरेंस दस्तावेज, और सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या फिर ड्राइविंग लाइसेंस शामिल होते हैं.
अगर आप वाहन को सामान के तौर पर बुक कर रहे हैं तो आपको अपना कन्फर्म ट्रेन टिकट भी चाहिए होगा. जिन इलेक्ट्रिक साइकिल या फिर स्कूटर की आरसी नहीं होती है उनके लिए खरीद का इनवॉइस या फिर बिल जरूरी होता है.

गाड़ी को तैयार और पैक कैसे करें?
स्कूटर या फिर सौंपने से पहले उसका फ्यूल टैंक पूरी तरह से खाली कर लेना चाहिए. गाड़ी के अंदर पेट्रोल नहीं रहना चाहिए क्योंकि अगर फ्यूल मिलता है तो जुर्माना लग सकता है. ट्रांसपोर्टेशन के दौरान गाड़ी को खरोंच और नुकसान से बचाने के लिए पैकिंग भी जरूरी है. रेलवे स्टेशन पर आमतौर पर प्राइवेट पैकर मिल जाते हैं और वह बोरी और कार्डबोर्ड से स्कूटर या फिर बाइक पैक करने के लिए लगभग ₹300 से ₹600 तक चार्ज कर सकते हैं. साइकिल के मामले में हैंडल और पैडल को भी ठीक से पैक किया जाना चाहिए.
गाड़ी पर एक साफ दिखने वाला लेबल भी लगा होना चाहिए. जिस पर आपका नाम, मोबाइल नंबर, जहां से गाड़ी भेजी जा रही है और जहां पहुंचनी है का जिक्र हो. इससे ट्रांसपोर्टेशन और डिलीवरी के दौरान गाड़ी की पहचान करने में मदद मिलती है.
वजन करना, पेमेंट और डिलीवरी
गाड़ी तैयार होने के बाद रेलवे स्टाफ उसका वजन करते हैं और दूरी जैसी चीजों के आधार पर लागू चार्ज का हिसाब लगाते हैं. काउंटर पर पेमेंट करने के बाद आपको एक पार्सल रसीद मिलती है. इसे पार्सल वे बिल कहा जाता है. इसे सुरक्षित रखना काफी जरूरी है क्योंकि गाड़ी की डिलीवरी लेते समय इसकी जरूरत पड़ सकती है.
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कितना खर्च आता है?
खर्च गाड़ी के प्रकार, दूरी, वजन और स्कूटर या फिर बाइक के मामले में बताई गई कीमत या फिर इंश्योरेंस वैल्यू पर ही निर्भर करता है. साइकिल के लिए लगभग ₹300 से ₹800 का खर्च आ सकता है और स्कूटर या फिर बाइक को ट्रांसपोर्ट करने में लगभग ₹500 से ₹3000 का खर्च आ सकता है. पैकिंग का चार्ज अलग होता है और यह स्टेशन पर दी जाने वाली सर्विस पर निर्भर करता है.
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