बिना सोए कितने दिन जिंदा रह सकता है इंसान, कब खत्म हो जाती है लिमिट?
3 से 4 दिन बाद ही शरीर देने लगता है जवाब, विज्ञान के मुताबिक 11 दिन बिना सोए रहना जानलेवा. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी सेहत के भारी खतरे को देखते हुए इस कैटेगरी पर लगाई है रोक.

इंसान का शरीर खाने और पानी के बिना तो कुछ दिन तक जिंदा रह सकता है, लेकिन नींद के बिना बहुत लंबे समय तक टिकना नामुमकिन सा है. नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देने का सबसे जरूरी तरीका है. जब हम सोते हैं, तभी हमारा दिमाग पूरे दिन की जानकारी को व्यवस्थित करता है, शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत होती है और थकान दूर होती है.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना सोए इंसान कितने दिन तक जिंदा रह सकता है और कब उसकी यह लिमिट खत्म हो जाती है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
बिना सोए सबसे लंबे समय का रिकॉर्ड
नींद न लेने का सबसे मशहूर मामला अमेरिका के रैंडी गार्डनर का है. साल 1964 में महज 17 साल के रैंडी गार्डनर ने एक स्कूल प्रयोग के तहत लगातार 11 दिन यानी करीब 264 घंटे तक जागते रहने का रिकॉर्ड बनाया था. इतने दिनों तक जागते रहने की वजह से उनकी सोचने-समझने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई थी, उन्हें चीजें याद रखने में दिक्कत होने लगी थी और बोलते समय शब्द भूलने जैसी समस्या भी सामने आई थी. हालांकि हैरानी की बात यह है कि कुछ दिन आराम करने के बाद उनका शरीर धीरे-धीरे सामान्य हो गया था.
बिना नींद के शरीर में क्या-क्या होता है?
नींद न लेने का असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखने लगता है. अगर कोई इंसान 24 घंटे तक नहीं सोता, तो उसका मूड चिड़चिड़ा हो जाता है और गुस्सा जल्दी आने लगता है. दो दिन बिना सोए रहने पर याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है और छोटी-छोटी बातें भी भूलने लगती हैं. तीन दिन के बाद जी मिचलाना, हाथों का कांपना और आंखों के सामने चीजें धुंधली दिखने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. इससे भी ज्यादा दिन बिना सोए रहने पर इंसान को असली और सपने जैसी चीजों में फर्क करना मुश्किल होने लगता है, यानी उसे बिना सोए ही सपने जैसा अहसास होने लगता है, जिसे डॉक्टर हैलुसिनेशन कहते हैं.
कब खत्म हो जाती है शरीर की आखिरी लिमिट?
आमतौर पर माना जाता है कि 7 से 11 दिन बिना सोए रहना किसी भी सामान्य इंसान के शरीर की आखिरी लिमिट होती है. इसके बाद शरीर के अंग काम करना बंद करने लगते हैं. चिकित्सा विज्ञान में एक बेहद दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है जिसे फैटल फेमिलियल इंसोमनिया कहते हैं. इस बीमारी में इंसान की नींद पूरी तरह गायब हो जाती है और लगातार कई महीनों तक न सो पाने के कारण आखिरकार मरीज के अंगों के फेल होने से उसकी मौत हो जाती है.
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नींद की कमी का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर
आम तौर पर ज्यादातर लोगों के लिए नींद पूरी तरह गायब होना संभव नहीं है, लेकिन कम नींद लेना आजकल की एक बड़ी समस्या बन चुका है. लगातार कम सोने से थकान, ध्यान न लग पाना, याददाश्त कमजोर होना और चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं. डॉक्टर मानते हैं कि हर उम्र के लोगों को अपनी जरूरत के हिसाब से पूरी नींद लेना जरूरी है, क्योंकि नींद शरीर की उस बुनियादी जरूरत में शामिल है, जिसके बिना दिमाग और शरीर दोनों का सही तरीके से काम करना मुश्किल हो जाता है.
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