एक्सप्लोरर

अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?

Indian Workers in USA: अमेरिका में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में काम करते हैं. आइए जानते हैं कि अमेरिका के किन सेक्टर में विदेशियों का दबदबा है और किन सेक्टर में भारतीय काम करते हैं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • ट्रंप प्रशासन ने OPT पर $70,000 फीस का प्रस्ताव किया।
  • यह फीस भारतीय STEM छात्रों के लिए मुश्किल बढ़ाएगी।
  • प्रशासन OPT को अमेरिकी कार्यबल का बैकडोर मानता है।
  • अमेरिकी STEM में भारतीय पेशेवरों का महत्वपूर्ण योगदान।

Indian Workers in USA: ट्रंप प्रशासन का ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) के लिए प्रति छात्र 70,000 डॉलर की प्रस्तावित फीस का नियम अमेरिका में इंटरनेशनल एजुकेशन और रोजगार के माहौल को काफी हद तक बदल सकता है.   साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स में पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री कर रहे भारतीय छात्रों को अपने एकेडमिक और प्रोफेशनल भविष्य के बारे में मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि अमेरिका के किन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा है.

इंटरनेशनल छात्रों के लिए ओपीटी क्यों जरूरी है? 

ओपीटी योग्य इंटरनेशनल छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में प्रैक्टिकल वर्क एक्सपीरियंस हासिल करने का मौका देता है.  कहीं छात्रों के लिए अमेरिकी वर्क एक्सपीरियंस को हासिल करने का मौका यूएस यूनिवर्सिटी को चुनने की एक बड़ी वजह है. हालांकि अगर पहले से ही इंटरनेशनल एडमिशन में कमी के कारण फाइनेंशियल दबाव का सामना कर रही यूनिवर्सिटी इस प्रस्तावित फीस को काफी ज्यादा मानती हैं तो आने वाले छात्र कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दूसरी जगह का रुख कर सकते हैं.

विदेशी वर्करों के खिलाफ सरकार का तर्क

प्रशासन का यह तर्क है कि ओपीटी अमेरिकी वर्कफोर्स में घुसने का एक बैकडोर बन गया है. वे कथित धोखाधड़ी, खराब वर्कप्लेस और पे टू स्टे स्कीम का हवाला देते हैं. यह नजरिया एमएजीए इमीग्रेशन ताकत को दिखाता है कि विदेशी लेबर खासकर आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए लाए गए कम वेतन वाले कर्मी अमेरिकी कर्मचारियों की जगह ले सकते हैं और वेतन कम कर सकते हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि इंटरनेशनल ग्रेजुएट्स पर रोक लगाने से अमेरिकी वर्कफोर्स मजबूत होगा या फिर वे इंडस्ट्रीज कमजोर होंगी जो काफी पढ़े लिखे टैलेंट पर निर्भर हैं. 


अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?

गलत इस्तेमाल और वर्कफोर्स पर निर्भरता के सबूत 

टेम्परेरी वर्कर सिस्टम के कुछ हिस्सों में गलत कामों के भी सबूत मिले हैं. लेबर डिपार्टमेंट इंस्पेक्टर जनरल की जांच में कथित H-1B धोखाधड़ी और वेतन किकबैक स्कीमों के पड़ताल की गई है. डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने ऐसी कंपनी से जुड़े मामले को भी सुलझाया है जिस पर H-1B, ओपीटी और H-4 वर्करों के लिए विज्ञापित पदों से अमेरिकी वर्करों को गलत तरीके से बाहर रखने का आरोप था.  

हालांकि गलत इस्तेमाल से अलग-अलग मामले यह साबित नहीं कर पाते कि विदेशी ग्रेजुएट आमतौर पर गैर जरूरी हैं या फिर अमेरिकी कर्मी आसानी से हर स्पेशलाइज्ड पद को भर सकते हैं.

स्टीम फील्ड में विदेशी मूल के कर्मियों का दबदबा 

नेशनल साइंस फाउंडेशन का डेटा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इंटरनेशनल टैलेंट के बड़े योगदान को दिखाता है. 2023 में अमेरिका में लगभग 36 मिलियन स्टीम कर्मियों में से 22% विदेशी मूल के वर्कर थे. नेशनल साइंस फाउंडेशन के डेटा से यह भी पता चलता है कि 2023 में अमेरिका में साइंस और इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री पाने वाले 38% और डॉक्टरेट पाने वाले 39% लोग अस्थायी वीजा वाले थे. 

हालांकि यह आंकड़े इस बात को साबित नहीं करते की हर ग्रेजुएट को ओपीटी की जरूरत है या फिर हर स्टीम नौकरी में कर्मचारियों की कमी है. लेकिन इससे इस बात का पता चलता है कि अमेरिकी रिसर्च संस्थानों और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज को जितने एडवांस टैलेंट की जरूरत होती है उसे सिर्फ घरेलू शिक्षा से पूरा नहीं किया जा सकता. 


अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?

अमेरिकी साइंस और इंजीनियरिंग में भारत का बड़ा योगदान 

इस वर्कफोर्स में भारत की भूमिका काफी ज्यादा जरूरी है. यह सभी आंकड़े बड़े वर्कफोर्स के बारे में है ना कि उन छात्रों के बारे में जिन पर प्रस्तावित फीस का सीधा असर पड़ेगा. अमेरिका के विदेशी मूल के साइंस और इंजीनियरिंग वर्कफोर्स में भारत में जन्मे 7,27,000 से ज्यादा प्रोफेशनल शामिल थे. यह आंकड़ा साइंस और इंजीनियरिंग के पूरे वर्कफोर्स में भारत में जन्मे कर्मचारियों को दिखाता है ना कि सिर्फ ओपीटी में शामिल लोगों या फिर हाल ही में ग्रेजुएट हुए लोगों को.

यह भी पढ़ें: भारत में अब इमरजेंसी लगाना कितना मुश्किल, कितनी बदल गई व्यवस्था?

भारतीय किन सेक्टर में काम करते हैं? 

आपको बता दें कि अमेरिका में काम करने वाले कुल अप्रवासी स्टीम कर्मचारियों में 28.9% अकेले भारतीय ही हैं. इसी के साथ आईटी और टेक इंडस्ट्री में H-1B वीजा में लगभग 70% से 71% हिस्सेदारी भारतीयों की है. अमेरिका के कुल आईटी कर्मचारियों में से लगभग 7% भारतीय-अमेरिकी हैं. 

इतना ही नहीं बल्कि अमेरिका के लगभग 8% टेक स्टार्टअप भारतीयों द्वारा स्थापित किए गए हैं और देश की कुल यूनिकॉर्न कंपनियों में से 72 कंपनियों के को-फाउंडर भी भारतीय मूल के हैं. अगर हेल्थ केयर की बात करें तो अमेरिका के कुल चिकित्सकों और सर्जनों में 8% योगदान भारतीय मूल के डॉक्टरों का है.

यह भी पढ़ें: क्या प्रोटेस्टर्स को गिरफ्तार कर सकती है पुलिस, क्या कहता है कानून?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

हिंदू या मुस्लिम, किस धर्म के लोग सऊदी में ज्यादा करते हैं नौकरी?
हिंदू या मुस्लिम, किस धर्म के लोग सऊदी में ज्यादा करते हैं नौकरी?
प्रेस फ्रीडम में कौन सा देश नंबर-1, कहां खड़ा है अपना भारत?
प्रेस फ्रीडम में कौन सा देश नंबर-1, कहां खड़ा है अपना भारत?
भारत में अब इमरजेंसी लगाना कितना मुश्किल, कितनी बदल गई व्यवस्था?
भारत में अब इमरजेंसी लगाना कितना मुश्किल, कितनी बदल गई व्यवस्था?
क्या प्रोटेस्टर्स को गिरफ्तार कर सकती है पुलिस, क्या कहता है कानून?
क्या प्रोटेस्टर्स को गिरफ्तार कर सकती है पुलिस, क्या कहता है कानून?
Advertisement

वीडियोज

कैमरे पर हुस्न की खतरनाक 'जादूगर'!
दिल्ली पुलिस अलर्ट, 'कॉकरोचों' की धरपकड़
प्रदर्शन पर अंकुश...जरूरी या पुलिस निरंकुश?
SC ने क्यों दिखाई सख्ती?
सड़क पर तकरार...खामोश ज्ञानेश कुमार!
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के सामने रखी शर्त, बोले- 'आप अपराधी नहीं, आपको छोड़ देंगे...'
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के सामने रखी शर्त, बोले- 'आप अपराधी नहीं, आपको छोड़ देंगे...'
ठाकरे जूनियर्स पर FIR! मुंबई प्रोटेस्ट के बीच आदित्य और अमित पर लगे ये आरोप
ठाकरे जूनियर्स पर FIR! मुंबई प्रोटेस्ट के बीच आदित्य और अमित पर लगे ये आरोप
SC में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल करेंगे राहुल गांधी, बोले- 'CJI ने कहा है कि...'
SC में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल करेंगे राहुल गांधी, बोले- 'CJI ने कहा है कि...'
15 साल बाद आ रहा विद्या बालन की ‘द डर्टी पिक्चर’ का सीक्वल, एकता कपूर ने किया कंफर्म, कहानी का भी दिया हिंट
‘द डर्टी पिक्चर’ का आ रहा सीक्वल, एकता कपूर ने किया कंफर्म
रिंकू का शतक, शमी-जडेजा ने भी बिखेरा जलवा, रणजी ट्रॉफी में चमके टीम इंडिया के सितारे
रिंकू का शतक, शमी-जडेजा ने भी बिखेरा जलवा, रणजी ट्रॉफी में चमके टीम इंडिया के सितारे
सौरव दास-आशुतोष रांका फिर थाने पहुंचे, कहा- '24 घंटे का अल्टीमेटम, उसके बाद...'
सौरव दास-आशुतोष रांका फिर थाने पहुंचे, कहा- '24 घंटे का अल्टीमेटम, उसके बाद...'
कौन हैं कांग्रेस की ममता चौधरी, जिनका अजय राय से हुआ पंगा
कौन हैं कांग्रेस की ममता चौधरी, जिनका अजय राय से हुआ पंगा
Rice Storage Tips: बाजार से लाते हैं चावल, ऐसे जानें कितने दिन में हो जाएगा खराब?
बाजार से लाते हैं चावल, ऐसे जानें कितने दिन में हो जाएगा खराब?
Embed widget