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हमेशा टेढ़ा ही क्यों लॉन्च होता है रॉकेट सीधा क्यों नहीं, जानें क्या है साइंस?

Rocket Launch: जब भी कोई रॉकेट टेक ऑफ करता है तो वह सीधे अंतरिक्ष में नहीं जाता बल्कि थोड़ा सा टेढ़ा होकर जाता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Rocket Launch: जब भी कोई रॉकेट टेक ऑफ करता है तो वह सीधे अंतरिक्ष में नहीं जाता बल्कि थोड़ा सा टेढ़ा होकर जाता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Rocket Launch: क्या आपने कभी सोचा है कि रॉकेट सीधे ऊपर आसमान में क्यों नहीं जाते बल्कि धीरे-धीरे मुड़कर एक घुमावदार रास्ते पर क्यों चले जाते हैं? 10 साल की वजह है कि रॉकेट का मकसद सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचाना नहीं बल्कि अक्सर किसी सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करना होता है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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रॉकेट को सिर्फ अंतरिक्ष में ऊपर जाने के बजाए सेटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने के लिए अच्छी खासी ऊंचाई और होरिजेंटल रफ्तार हासिल करनी होती है.
रॉकेट को सिर्फ अंतरिक्ष में ऊपर जाने के बजाए सेटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने के लिए अच्छी खासी ऊंचाई और होरिजेंटल रफ्तार हासिल करनी होती है.
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शुरुआती उड़ान के बाद रॉकेट धीरे-धीरे झुकता है. पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उसके घुमावदार रास्ते को बनाने में मदद करता है. इससे स्टीयरिंग में अतिरिक्त बदलाव की जरूरत कम हो जाती है.
शुरुआती उड़ान के बाद रॉकेट धीरे-धीरे झुकता है. पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उसके घुमावदार रास्ते को बनाने में मदद करता है. इससे स्टीयरिंग में अतिरिक्त बदलाव की जरूरत कम हो जाती है.
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लो अर्थ आर्बिट में सैटेलाइट लगभग 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. यह काफी ज्यादा होरिजेंटल रफ्तार उन्हें सीधे सतह पर वापस गिरने के बजाय पृथ्वी के चारों ओर घूमते रहने में मदद करती है.
लो अर्थ आर्बिट में सैटेलाइट लगभग 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. यह काफी ज्यादा होरिजेंटल रफ्तार उन्हें सीधे सतह पर वापस गिरने के बजाय पृथ्वी के चारों ओर घूमते रहने में मदद करती है.
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रॉकेट आमतौर पर ऊंचाई हासिल करने और लॉन्च पैड से दूर जाने के लिए तेजी से ऊपर उठते हैं. इसके बाद वे धीरे-धीरे अपने तय रास्ते की तरफ मुड़ते हैं.
रॉकेट आमतौर पर ऊंचाई हासिल करने और लॉन्च पैड से दूर जाने के लिए तेजी से ऊपर उठते हैं. इसके बाद वे धीरे-धीरे अपने तय रास्ते की तरफ मुड़ते हैं.
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निचला वायुमंडल अपेक्षाकृत घना होता है. इससे काफी ड्रैग पैदा होता है. सावधानी से योजनाबद्ध उड़ान पथ एयरोडायनेमिक बलों को कंट्रोल करने और गैर जरूरी ऊर्जा की हानी को सीमित करने में मदद करता है.
निचला वायुमंडल अपेक्षाकृत घना होता है. इससे काफी ड्रैग पैदा होता है. सावधानी से योजनाबद्ध उड़ान पथ एयरोडायनेमिक बलों को कंट्रोल करने और गैर जरूरी ऊर्जा की हानी को सीमित करने में मदद करता है.
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दिशा में हर बदलाव के लिए रॉकेट की रफ्तार और थ्रस्ट के सावधानीपूर्वक प्रबंधन की जरूरत होती है. ग्रेविटी टर्न वाला रास्ता रॉकेट को काफी सावधानी से होरिजेंटल रफ्तार बढ़ाने में मदद करता है.
दिशा में हर बदलाव के लिए रॉकेट की रफ्तार और थ्रस्ट के सावधानीपूर्वक प्रबंधन की जरूरत होती है. ग्रेविटी टर्न वाला रास्ता रॉकेट को काफी सावधानी से होरिजेंटल रफ्तार बढ़ाने में मदद करता है.
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ऊपर जाते समय रॉकेट को मजबूत एयरोडायनेमिक बलों का सामना करना पड़ता है. उड़ान नियंत्रक इन बलों को सुरक्षित चलने की सीमा के अंदर रखने के लिए रास्ते और रफ्तार का प्रबंधन करते हैं.
ऊपर जाते समय रॉकेट को मजबूत एयरोडायनेमिक बलों का सामना करना पड़ता है. उड़ान नियंत्रक इन बलों को सुरक्षित चलने की सीमा के अंदर रखने के लिए रास्ते और रफ्तार का प्रबंधन करते हैं.
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एक बार जब रॉकेट जरूरी ऊंचाई और रफ्तार तक पहुंच जाता है तो वह अपने पेलोड को तय कक्षा में छोड़ सकता है.
एक बार जब रॉकेट जरूरी ऊंचाई और रफ्तार तक पहुंच जाता है तो वह अपने पेलोड को तय कक्षा में छोड़ सकता है.

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