कैसे बंद किया जाता है एयरस्पेस, स्पाइसजेट की कोई फ्लाइट गलती से बांग्लादेश चली गई तो क्या होगा?
बांग्लादेश में सरकार बनते ही स्पाइसजेट फ्लाइट के दरवाजे अपने देश के लिए बंद कर दिए हैं. आइए जानें कि अगर स्पाइसजेट फ्लाइट गलती से बांग्लादेश चली जाती है तो क्या हो सकता है.

बांग्लादेश की सरकार ने बकाया भुगतान का हवाला देते हुए भारतीय बजट एयरलाइन SpiceJet को अपने एयरस्पेस के उपयोग से रोक दिया है. इस फैसले का असर पूर्वोत्तर भारत की उड़ानों पर पड़ा है. कोलकाता से गुवाहाटी और इम्फाल जाने वाली कुछ उड़ानों को अब लंबा रूट लेना पड़ रहा है. रूट लंबा होने का मतलब है अधिक ईंधन की खपत, उड़ान का समय बढ़ना और ऑपरेशनल लागत में इजाफा देखने को मिल रहा है. यात्रियों को भी देरी का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानें कि कोई देश एयरस्पेस को कैसे बंद करता है और अगर बैन के बाद भी स्पाइसजेट की फ्लाइट बांग्लादेश जाती है तो क्या हो सकता है.
एयरस्पेस बंद करने का फैसला कैसे होता है?
हर देश को अपनी जमीन और समुद्री सीमा की तरह अपने ऊपर के आसमान पर भी पूरा अधिकार होता है. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी संप्रभु राष्ट्र को यह हक है कि वह तय करे कौन सा विमान उसके एयरस्पेस से गुजर सकता है और कौन नहीं. जब कोई देश सुरक्षा, कूटनीतिक या वित्तीय कारणों से अपना हवाई क्षेत्र सीमित या बंद करता है, तो वह एक आधिकारिक नोटिस जारी करता है जिसे NOTAM यानी नोटिस टू एयरमेन कहा जाता है. यह सूचना दुनिया भर की एयरलाइंस, पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम तक तुरंत पहुंचाई जाती है. इसके बाद उस क्षेत्र से गुजरने वाली उड़ानों को वैकल्पिक रास्ता चुनना पड़ता है.
किन वजहों से बंद होता है एयरस्पेस?
एयरस्पेस बंद करने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे- युद्ध या सैन्य तनाव की स्थिति में देश अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर देते हैं, या फिर प्राकृतिक आपदाएं, जैसे ज्वालामुखी की राख भी उड़ानों के लिए खतरा बन सकती हैं. बड़े आयोजनों, वीआईपी मूवमेंट या सुरक्षा खतरे के समय अस्थायी उड़ान प्रतिबंध यानी TFR लागू किया जाता है. COVID-19 महामारी के दौरान भी कई देशों ने सीमित अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पाबंदी लगाई थी. ऐसे फैसले हमेशा संबंधित देश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण द्वारा लिए जाते हैं.
अगर गलती से फ्लाइट पहुंच जाए तो?
प्रतिबंधित एयरस्पेस में बिना अनुमति प्रवेश गंभीर मामला माना जाता है. आम तौर पर पायलटों को 121.5 मेगाहर्ट्ज की आपातकालीन फ्रीक्वेंसी पर चेतावनी दी जाती है. एयर ट्रैफिक कंट्रोल तुरंत संपर्क करता है और विमान को दिशा बदलने के निर्देश देता है. अगर विमान चेतावनी के बाद भी निर्देशों का पालन नहीं करता, तो संबंधित देश की वायुसेना हस्तक्षेप कर सकती है. ऐसे मामलों में विमान को एस्कॉर्ट कर निकाला जाता है या निकटतम एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर किया जा सकता है. जुर्माना, जांच और कानूनी कार्रवाई भी संभव है.
हालांकि वाणिज्यिक एयरलाइंस आमतौर पर अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम और सख्त फ्लाइट प्लान के तहत उड़ान भरती हैं, इसलिए गलती की संभावना बहुत कम होती है.
नियम और जिम्मेदारी
किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान से पहले एयरलाइन को संबंधित देशों से ओवरफ्लाइट परमिशन लेनी होती है. फ्लाइट प्लान पहले से दाखिल किया जाता है और उसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मंजूरी मिलती है, इसलिए एयरस्पेस उल्लंघन आमतौर पर जानबूझकर नहीं, बल्कि तकनीकी या आपात स्थिति में ही होता है. स्पष्ट है कि एयरस्पेस बंद करना सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ा गंभीर निर्णय होता है, और किसी भी एयरलाइन के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
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Source: IOCL

























