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हलाल या झटका, भारत के फाइव स्टार होटलों में कौन-सा मीट परोसा जाता है?

भारत में किसी भी होटल या रेस्टोरेंट के लिए ये नियम नहीं है कि वह झटका मीट बेचे या फिर हलाल. कुछ राज्यों में ये नियम जरूर है कि वह जो भी मीट बेचें उसके बारे में ग्राहक को पता होना चाहिए.

बीते कुछ वर्षों में भारत में हलाल और झटका मीट को लेकर विवाद काफी ज्यादा बढ़ा है. आम जनता के साथ-साथ राज्यों की सरकारों ने भी इस पर बात की है. कई राज्यों में तो अब नियम बना दिए गए हैं कि होटलों, दुकानों और रेस्टोरेंट मालिकों को अपने यहां मीट सर्व करने से पहले ये बताना होगा कि मीट हलाल है या झटका.

कच्चा मीट बेचने वाली दुकानों में तो बकायदा बोर्ड लगाना होगा कि यहां झटका या फिर हलाल मीट मिलता है. चलिए आज इस आर्टिकल में जानते हैं कि भारत के फाइव स्टार होटलों में जो मीट सर्व होता है वह कौन सा मीट होता है. क्या वह हलाल मीट होता है या फिर झटका मीट.

फाइव स्टार होटलों में कौन सा मीट मिलता है

हलाल या झटका मीट लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है. मुसलमानों में हलाल मीट को सही माना जाता है. जबकि, हिंदू झटका मीट खाना सही मानते हैं. लेकिन, जब आप किसी फाइव स्टार होटल में रुकते हैं तो फिर आपको कैसे पता चलेगा कि वहां जो मीट आपको दिया गया है वह झटका है या हलाल.

दरअसल, भारत में किसी भी होटल या रेस्टोरेंट के लिए ये नियम नहीं है कि वह झटका मीट बेचे या फिर हलाल. कुछ राज्यों में ये नियम जरूर है कि वह जो भी मीट बेचें उसके बारे में ग्राहक को पता होना चाहिए. यानी आप जिस भी किसी फाइव स्टार होटल में रुके हों, वहां मीट खाने से पहले आप पूछ सकते हैं कि मीट झटका है या हलाल.

होटल वाला इस पर आपको जवाब देगा और जवाब सुनकर आप यह फैसला कर सकते हैं कि आपको इस होटल में मीट खाना है या नहीं. आप होटल बुक करने से पहले भी इसके बारे में पूछ सकते हैं. कई बार होटल वाले अपने कस्टमर की सुविधा के लिए फूड अरेंज भी करते हैं. यानी अगर आप कोई स्पेसिफिक मीट खाना पसंद करते हैं तो होटल वाला आपके लिए इसका इंतजाम भी कर सकता है.

क्या होता है हलाल और झटका मीट

हलाल मीट उस मांस को कहा जाता है जिसे इस्लामिक नियमों के अनुसार तैयार किया जाता है. "हलाल" का मतलब है "अनुमत" या "वैध" और यह उस चीज़ को संदर्भित करता है जो मुसलमानों के लिए स्वीकार्य है. दरअसल, हलाल प्रक्रिया के तहत जानवर को जब काटा जाता है तो खून को पूरी तरह से बहने दिया जाता है. यानी इस प्रक्रिया में जानवर को मरने में समय लगता है. इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि ऐसा करने से मांस शुद्ध और सुरक्षित रहता है.

जबकि, झटका मीट उस मांस को कहा जाता है, जिसमें जानवर को एक बार में काटा गया हो. हिंदुओं का मानना है कि ऐसा करने से जानवर को कम दर्द होता है और खून भी तेजी से बह जाता है. इसके अलावा उसकी मृत्यु भी तुरंत हो जाती है.

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