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India Aid: फिलिस्तीन को 25 लाख डॉलर की सहायता देगा भारत, 99 प्रतिशत है मुस्लिम आबादी

India Aid: भारत ने फिलीस्तीन के लिए 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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  • भारत ने UNRWA को फिलिस्तीनी शरणार्थियों हेतु $2.5 मिलियन दिए।
  • यह $5 मिलियन वार्षिक मानवीय सहायता की पहली किस्त है।
  • भारत ने दो-देश समाधान का समर्थन किया, गाजा पर चिंता।

India Aid: भारत ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद के लिए यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी को 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. यह राशि मानवीय सहायता के लिए भारत की 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सालाना कमिटमेंट की पहली किस्त है. सहायता की घोषणा के साथ ही भारत ने दो देश समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराया है और साथ ही गाजा में मानवीय स्थिति पर चिंता जताई है. 

भारत ने सालाना सहायता की पहली किस्त जारी की 

भारत सरकार फिलिस्तीन शरणार्थियों के कल्याणकारी कार्यक्रम के लिए हर साल यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी को 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर देती है. 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का यह हालिया भुगतान उसी सालाना कमिटमेंट की पहली किस्त है. इस आर्थिक सहायता का मकसद मुश्किल मानवीय हालात में रह रहे फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण जैसी जरूरी सेवाओं में मदद करना है.

भारत ने दो देश समाधान के लिए समर्थन दोहराया 

भारत ने एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यावहारिक फिलिस्तीनी देश के लिए भारत के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराया है. भारत ने गाजा में मानवीय संकट पर भी गहरी चिंता जताई है और राहत कार्यों को आसान बनाने और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए युद्ध विराम की जरूरत पर जोर दिया है. 

यह भी पढ़ेंः राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बनने से पहले क्या करते थे चंपत राय, कैसे मिली इतनी बड़ी जिम्मेदारी?

मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा 

गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक समेत सभी फिलिस्तीन इलाकों में मुस्लिम आबादी का हिस्सा काफी बड़ा है. अलग-अलग जनसांख्यिकीय अनुमान यह बताते हैं कि कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 99% है. 

ईसाई और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय 

फिलिस्तीन में एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक रूप से जरूरी ईसाई समुदाय भी रहता है. ईसाई समुदाय कुल आबादी का सिर्फ लगभग एक प्रतिशत है. ज्यादातर फिलिस्तीनी ईसाई बेथलहम, रामल्लाह और यरुशलम शहरों में रहते हैं. यह मुख्य रूप से ग्रीक ऑर्थोडॉक्स और रोमन कैथोलिक चर्च से जुड़े हैं.

इसी के साथ फिलिस्तीन की आबादी काफी ज्यादा युवा है. इसकी औसत उम्र लगभग 20.3 साल है. यह इसे दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक बनाती है. फिलिस्तीन काफी हद तक शहरीकृत है. यहां लगभग 85% निवासी शहरों और शरणार्थी कैंप में रहते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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