इस्लाम में किन गैर-मुस्लिम महिलाओं से बिना धर्म परिवर्तन शादी की है इजाजत, नहीं जानते होंगे आप ये नियम
वैसे तो इस्लाम धर्म में किसी भी गैर-मुस्लिम से निकाह करने से पहले उसका धर्म परिवर्तन कराना जरूरी होता है. लेकिन कुछ धर्म ऐसे भी हैं, जिनसे अगर मुस्लिम निकाह करें तो धर्मांतरण की जरूरत नहीं होती है.

दुनिया के अलग-अलग देशों और धर्मों में शादी-ब्याह को लेकर विभिन्न तरीके के नियम-कानून और परंपराएं चलती हैं. जब बात इस्लामी कानून यानि शरिया की आती है तो इसमें गैर-मुस्लिमों से निकाह को लेकर बहुत स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं. आमतौर पर इस्लाम में मान्यता है कि गैर-मुस्लिम से शादी करने से पहले उसका धर्मांतरण करना अनिवार्य शर्त है, लेकिन हर गैर-मुस्लिम के साथ शादी के लिए यह नियम लागू नहीं होता है. इस्लाम के नियमों में कुछ खास गैर-मुस्लिम महिलाओं को खास छूट मिली है, जिसके जरिए एक मुस्लिम पुरुष बिना उनका मजहब बदलवाए भी कानूनी तौर पर निकाह कर सकता है.
किन गैर मुस्लिम महिलाओं से बिना धर्म परिवर्तन के हो सकता है निकाह?
शरिया कानून के अनुसार एक मुस्लिम पुरुष को हर गैर मुस्लिम महिला से शादी करने की इजाजत नहीं है, बल्कि इसके लिए एक खास दायरा तय किया गया है. इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरान के अनुसार मुस्लिम पुरुष सिर्फ अह्लुल-किताब यानि उन धर्मों की महिलाओं से बिना धर्म परिवर्तन करवाए शादी कर सकता है, जिनके पास अपनी पाक किताबें हैं. इस क्रम में मुख्य रूप से ईसाई और यहूदी धर्म को मानने वाली महिलाएं शामिल हैं. इन दोनों धर्मों को मानने वालों के पास बाइबल और तौरात जैसी पवित्र किताबें हैं, इसलिए इस्लाम में इनको शादी के योग्य माना गया है.
शादी के लिए साफ होना चाहिए चरित्र
भले ही शरिया कानून में ईसाई और यहूदी महिलाओं से निकाह की अनुमति मिली है, लेकिन इसके पीछे एक महत्वपूर्णं और अनिवार्य शर्त जुड़ी हुई है. इस्लाम के नियम के अनुसार, निकाह केवल उन्हीं अह्लुल-किताब महिलाओं से हो सकता है जो मुह्सनात हों, मतलब कि चरित्रवान, संस्कारी और पवित्र आचरण वाली हों. अगर कोई ईसाई या यहूदी महिला समाज में अच्छे चरित्र और नैतिक मूल्यों वाली है, तभी एक मुस्लिम पुरुष बिना उसका मजहब बदलवाए उससे निकाह की रस्म कर सकता है.
मुस्लिम महिलाओं के लिए लागू होते हैं अलग नियम
यहां एक खास बात यह है कि ये नियम केवल मुस्लिम पुरुषों के लिए ही लागू होता है, महिलाओं के लिए नहीं. इस्लामी कानून में किसी भी मुस्लिम महिला को इस बात की इजाजत बिल्कुल भी नहीं है कि वह किसी भी गैर मुस्लिम पुरुष भले ही वह ईसाई या यहूदी क्यों न हो, से बिना धर्म परिवर्तन कराए निकाह कर सके. अगर कोई मुस्लिम महिला किसी गैर मुस्लिम पुरुष से शादी करना चाहती है तो पुरुष को अनिवार्य रूप से पहले इस्लाम को अपनाना होगा, नहीं तो निकाह मान्य नहीं होगा.
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