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Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में विधायकों की 'हॉर्स ट्रेडिंग' की आहट! जानें क्या होता है इसका मतलब और कहां से आया यह शब्द?

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में विजय की सरकार को शायद मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. विजय की सरकार पर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगे हैं. आइए जानते हैं क्या होता है इस शब्द का मतलब.

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  • तमिलनाडु में हॉर्स ट्रेडिंग की सीबीआई जांच की सुप्रीम कोर्ट में मांग उठी।
  • याचिका में जांच पूरी होने तक राष्ट्रपति शासन की भी मांग की गई।
  • हॉर्स ट्रेडिंग शब्द जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त या सौदेबाजी को दर्शाता है।
  • यह मुहावरा 19वीं सदी के अमेरिका में घोड़ों के बाजार से आया।
  • मार्क ट्वेन की रचनाओं से हॉर्स ट्रेडिंग मुहावरा लोकप्रिय हुआ।

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीतिक एक बार फिर से राष्ट्रीय सुर्खियों में आ चुकी है.  विधानसभा चुनावों के बाद हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप सामने आए हैं. भारत के सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में कथित तौर पर यह मांग की गई है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया के दौरान विधायकों की खरीद फरोख्त की सीबीआई जांच कराई जाए. इस याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए. इस बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच आइए जानते हैं कि राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब क्या होता है?

राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग का क्या मतलब? 

आज राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर विधायकों या फिर सांसदों जैसे जनप्रतिनिधियों के बीच राजनीतिक समर्थन की कथित खरीद फरोख्त या फिर सौदेबाजी को बताने के लिए किया जाता है. यह मुहावरा आमतौर पर उन स्थितियों को दर्शाता है जब राजनीतिक दल विपक्षी या फिर निर्दलीय विधायकों को पाला बदलने के लिए मनाकर बहुमत हासिल करने की कोशिश करते हैं. इन कोशिशें को अक्सर समर्थन के बदले पैसे, मंत्री पद, राजनीतिक लाभ या फिर दूसरे प्रकार के निजी फायदे देने के आरोपों से जोड़ा जाता है. यह शब्द आमतौर पर पर्दे के पीछे होने वाले राजनीतिक सौदे, गुप्त बातचीत, दलबदल और सत्ता हासिल करने के लिए बनाए गए विवादास्पद गठबंधनों से जुड़ा होता है ना कि वैचारिक सिद्धांतों का पालन करने से.

कहां से आया यह शब्द? 

यह शब्द असल में राजनीति से आया ही नहीं. इसकी जड़ 19वीं सदी की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका में मिलती है. लगभग 1820 के दशक में इस शब्द का इस्तेमाल शाब्दिक अर्थ में घोड़े के बाजारों में होने वाली सौदेबाजी का वर्णन करने के लिए किया जाता था. वहां व्यापारी अक्सर काफी चालाक सौदागरों के रूप में जाने जाते थे. 

उस समय घोड़ों के व्यापारिक कीमतों पर काफी सावधानी से मोलभाव करते थे और बेहतर सौदे पक्के करने के लिए जानवरों के दोष या फिर उनकी खराब हालत को छिपा लेते थे. इसी वजह से हॉर्स ट्रेडिंग धीरे-धीरे चालक सौदेबाजी की युक्तियों और कड़े मोलभाव से जुड़ गया.

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कैसे बना यह मुहावरा लोकप्रिय?

इस मुहावरे को मशहूर अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन की रचनाओं के जरिए से और ज्यादा लोकप्रिय किया गया.‌ 1893 में उन्होंने अपनी लघुकथा द ऑटोबायोग्राफी ऑफ आइजैक एलन में इस शब्द का इस्तेमाल किया. अपनी कहानी के जरिए से उन्होंने ऐसे चालक ग्रामीण व्यापारियों के बारे में बताया जो अपनी तीखी बातचीत और सौदेबाजी करने में सक्षम थे. वक्त के साथ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकारों ने इस मुहावरे का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. उन्होंने इसका इस्तेमाल बंद दरवाजे के पीछे होने वाली राजनीतिक बातचीत को बताने के लिए शुरू कर दिया. 

यह शब्द राजनीति में कैसे आया? 

19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत तक कई लोकतंत्रों में राजनीतिक व्यवस्थाएं तेजी से पार्टियों पर आधारित होती जा रही थीं. पत्रकारों ने देखा कि कई राजनीतिक बातचीत पारंपरिक घोड़े के बाजार में होने वाले मोल-भाव की तरह होती थी. 1950 के दशक तक यह मुहावरा राजनीति शब्दावली में अपनी जगह मजबूत कर चुका था और चुनाव, गठबंधन बनाने या फिर विश्वास मत के दौरान सांसदों को प्रभावित करने की विवादित कोशिशों को बताने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाने लगा.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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