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परमाणु बम बनाने के लिए किस देश से लेनी होती है इजाजत, क्या इस लिस्ट में भारत भी शामिल?

आज की तारीख में जिस भी देश के पास परमाणु हथियार हैं, उनको सबसे ताकतवर देशों की श्रेणी में गिना जाता है, लेकिन क्या परमाणु बम बनाने के लिए किसी देश की परमिशन लेने की जरूरत होती है, चलिए जानते हैं.

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  • NPT संधि भेदभावपूर्ण, भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए.

दुनिया में विभिन्न देशों के बीच एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची रहती है. हर देश चाहता है कि वो अपने पड़ोसी देशों से चार कदम आगे हो, इसी होड़ में परमाणु हथियारों का भी निर्माण होता है. हथियारों की होड़ को लेकर स्वीडन की मशहूर थिंक टैंक SIPRI ने हाल ही में एक हैरान करने वाली रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार शांतिकाल के दौरान 12 परमाणु हथियारों की तैनाती की है. वहीं चीन ने भी अपने तैनात परमाणु बमों की संख्या को 24 से बढ़ाकर 34 कर दिया है. ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है कि आखिर इन परमाणु बमों को बनाने के लिए किस देश से इजाजत लेनी होती है और इस मामले में भारत की स्थिति क्या है, चलिए जानें.

क्या परमाणु बम के लिए किसी देश की इजाजत जरूरी?

सीधे शब्दों में कहा जाए तो किसी भी देश को परमाणु बम बनाने के लिए किसी दूसरे देश या फिर संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था से किसी भी तरह की मंजूरी या लिखित परमिशन की जरूरत नहीं होती है. हर देश अपनी सरजमीं की रक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने का फैसला खुद कर सकता है. हालांकि बिना इजाजत बम बनाना पूरी तरह से तो बेरोकटोक नहीं है. अगर कोई देश चुपचाप ऐसा करता है, तो उसे दुनिया भर के देशों का कड़ा विरोध और आर्थिक पाबंदी झेलनी पड़ती है. 

NPT क्या है और किन पांच देशों को मिली है मान्यता?

दुनिया में परमाणु हथियारों को बनाने की होड़ न मचे इसके लिए 1968 में एक अंतरराष्ट्रीय समझौता जिसे परमाणु अप्रसार संधि यानि NPT कहा जाता है, तैयार किया गया था. इसके तहत सिर्फ दुनिया के पांच देश अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस को इन हथियारों को बनाने और रखने की आजादी दी गई थी. इस समझौते के नियम कहते हैं कि अगर कोई देश अपनी मर्जी से इस पर हस्ताक्षर करता है, तो फिर वह कभी भी अपनी मर्जी से परमाणु हथियार नहीं बना सकता है और न ही उसकी तकनीक हासिल कर सकता है.

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इस लिस्ट में भारत क्यों नहीं शामिल?

अब भारत की बात कर लेते हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर परमाणु अप्रसार संधि का हिस्सा नहीं है. भारत हमेशा से यह मानता आया है कि एनपीटी कानून पूरी तरह से भेदभाव से जुड़ा है, जो कि सिर्फ पांच देशों को परमाणु बम बनाने की इजाजत देता है और बाकी देशों पर पाबंदी लगाता है. इसीलिए भारत ने कभी भी इस संधि पर साइन नहीं किए, लेकिन इसके बाद भी भारत उन नौ ताकतवर देशों की लिस्ट में शामिल है, जो परमाणु ताकतों से संपन्न हैं. आज भारत के पास परमाणु हथियारों का पूरा जखीरा मौजूद है.

भारत के अलावा किन देशों ने नहीं साइन किया एनपीटी?

भारत के अलावा पाकिस्तान और इजरायल ने भी परमाणु अप्रसार संधि पर किसी भी तरह से हस्ताक्षर नहीं किए हैं और बिना किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के परमाणु बम बनाए. तानाशाह किम जोंग उन का देश नॉर्थ कोरिया पहले तो इस समझौते का हिस्सा था, लेकिन फिर साल 2003 में वह इस अंतरराष्ट्रीय समझौते से पूरी तरह से बाहर हो गया और अपने परमाणु परीक्षण शुरू कर दिए थे. 

क्या हैं एनएसजी और यूरेनियम की खरीद-फरोख्त के नियम?

भले ही परमाणु बम बनाने के लिए किसी भी देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती है, लेकिन इसके लिए जरूरी कच्चा माल जैसे हाई क्ववालिटी का संवर्धित यूरेनियम और परमाणु तकनीक हासिल करना कठिन काम है. दुनिया में इसके लिए 48 देशों का एक खास ग्रुप काम करता है जिसे न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि एनएसजी कहा जाता है. यह ग्रुप परमाणु सामग्री और तकनीक की खरीद-फरोख्त को वैश्विक तौर पर नियंत्रित करता है. भारत फिलहाल एनएसजी ग्रुप का हिस्सा तो नहीं है, लेकिन अपनी बढ़ती परमाणु जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत इस ग्रुप की सदस्यता हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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