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Earth Rotation: एक तय रफ्तार से ही क्यों घूमती है पृथ्वी, जानें इसकी गति क्यों नहीं होती कम या ज्यादा?

Earth Rotation: पृथ्वी अपनी धुरी पर और भूमध्य रेखा पर अपनी एक स्थिर रफ्तार से घूमती रहती है. आइए जानते हैं कि इस रफ्तार में कोई भी बदलाव क्यों नहीं होता.

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  • दिन की लंबाई हर सदी 1.7 मिलीसेकंड बढ़ती है।

Earth Rotation: पृथ्वी अपनी धुरी पर हर 24 घंटे में एक पूरा चक्कर लगाती है. इसी के साथ भूमध्य रेखा पर इसकी घूमने की रफ्तार लगभग 1670 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. लगभग 4.5 अरब सालों से लगातार घूमने के बावजूद भी इसकी रफ्तार अभी भी स्थिर बनी हुई है. इसके पीछे की वजह अंतरिक्ष का वैक्यूम और भौतिकी का एक बुनियादी नियम है. इस नियम को लॉ ऑफ इनर्शिया कहा जाता है. पृथ्वी का घूमना एक जैसा लगता है लेकिन वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि लंबे समय में इसकी रफ्तार में मामूली बदलाव आते हैं.

कब से शुरू हुआ पृथ्वी का घूमना

लगभग 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी गैस, धूल और चट्टानी चीजों के एक बड़े बादल से बनी थी जो पहले से ही घूम रहा था. जैसे-जैसे गुरुत्वाकर्षण ने इस सामग्री को खींचकर ग्रह का रूप दिया पृथ्वी को वह घूमने की रफ्तार भी मिल गई. क्योंकि अंतरिक्ष लगभग पूरी तरह से वैक्यूम है और वहां हवा का कोई भी प्रतिरोध नहीं है इस वजह से अरबों सालो में पृथ्वी की घूमने की रफ्तार को धीमा करने वाला कोई भी पदार्थ मिला ही नहीं.

लॉ ऑफ इनर्शिया पृथ्वी को घुमाता है 

पृथ्वी के घूमने की रफ्तार लगभग स्थिर रहने के पीछे की बड़ी वजह लॉ ऑफ इनर्शिया है. इस सिद्धांत के मुताबिक रफ्तार में चलती हुई कोई भी वस्तु तब तक उसी रफ्तार से चलती रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल ना लगाया जाए. क्योंकि अंतरिक्ष में कोई खास फ्रिक्शन नहीं होता इस वजह से पृथ्वी उसी रफ्तार के साथ घूमती रहती है जो उसे अपने बनने के समय मिली थी.

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चांद धीरे-धीरे पृथ्वी के घूमने की रफ्तार को धीमा करता है 

हालांकि पृथ्वी का घूमना आमतौर पर स्थिर रहता है लेकिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव की वजह से यह धीरे-धीरे धीमा हो रहा है. चांद समुद्र में टाइड पैदा करता है और इन चलती हुई लहरों से पैदा होने वाला घर्षण पृथ्वी के घूमने पर एक छोटे ब्रेक की तरह काम करता है. वैज्ञानिकों का यह अनुमान है कि इस प्रक्रिया से हर सदी में दिन की लंबाई लगभग 1.7 मिली सेकंड बढ़ जाती है.

इस धीरे-धीरे होने वाली कमी की वजह से शोधकर्ताओं का ऐसा कहना है कि डायनासोर के समय में एक पूरा दिन 24 घंटे के बजाय सिर्फ 21 से 23 घंटे का होता था.

इन बदलावों का पता हमें क्यों नहीं चलता?

हालांकि पृथ्वी के घूमने की रफ्तार में उतार-चढ़ाव होते हैं लेकिन ये बदलाव काफी मामूली होते हैं. पूरे दिन में सिर्फ एक या दो मिली सेकंड का फर्क इंसानों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस करना नामुमकिन है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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