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दिन में शोला…रात में शबनम, रेगिस्तान में तापमान में इतने बड़े बदलाव की असली वजह क्या है?

दुनिया में सभी जगहों पर अलग अलग मौसम देखने को मिलता है, लेकिन सबसे ज्यादा और एकदम अलग बदलाव रेगिस्तान में होता है. वहां पर दिन और रात के तापमान में जमीन-आसमान का अंतर होता है.

भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है. यहां कभी गर्मी, कभी सर्दी, कभी बरसात तो कभी बसंत का मौसम होता है. लेकिन यहां के रेगिस्तान के मौसम का मिजाज लोगों को हैरत में डाल देता है. रेगिस्तान में आपको 24 घंटे के अंदर ही प्रकृति के दो एकदम उलट रूप देखने को मिल जाते हैं. यहां पर दिन का मौसम इतना भयंकर गर्म होता है कि बाहर पैर रखना भी दूभर हो जाता है, वहीं रात का मौसम ऐसा पलटी मारता है कि अच्छा खासा आदमी ठिठुर जाए. चलिए जानें कि आखिर यहां पर मौसम के तेवर इतने अलग क्यों हैं.

रेत के तापमान का खेल

रेगिस्तानी इलाकों में इस अनोखे उतार-चढ़ाव की सबसे मुख्य वजह वहां पर दूर-दूर तक फैली हुई रेत है. विज्ञान का नियम कहता है कि रेत के अंदर गर्मी को लंबे वक्त तक सोखकर रखने की शक्ति नहीं होती है. जैसे ही सुबह सूरज की किरणें धरती पर पड़ती हैं, रेत बहुत तेजी से तपनी शुरू हो जाती है और दोपहर तक पूरा इलाका भट्टी में तब्दील हो जाता है. लेकिन जैसे ही शाम को सूर्यास्त होता है, रेत उतनी ही तेजी से अपनी सारी गर्मी को वापस वातावरण में छोड़ देती है. गर्मी का संचय न हो पाने के कारण वहां रात को कड़ाके की ठंड हो जाती है.

रेगिस्तान का साफ और सूखा आसमान

हमारे आम मैदानी शहरों या तटीय इलाकों में हवा में भरपूर नमी होती है और आसमान में अक्सर बादल छाए रहते हैं. ये बादल और हवा की नमी धरती के लिए एक प्राकृतिक कंबल का काम करते हैं, जो कि दिन में आई सूरज की गर्मी को अंतरिक्ष में जाने से रोक लेते हैं. लेकिन रेगिस्तान का माहौल इससे बिल्कुल अलग होता है. वहां पर हवा पूरी तरह से सूखी होती है और आसमान एकदम साफ होता है. इस वजह से रात होते ही जमीन की गर्मी बिना किसी रुकावट के सीधे ब्रह्मांड में चली जाती है और रातें बर्फीली हो जाती हैं.

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हरियाली की कमी से एकदम से बदलता मौसम

पेड़-पौधे, घने जंगल और हरी-भरी वनस्पतियां किसी भी जगह के तापमान को संतुलित करने के लिए और सामान्य बनाए रखने के लिए मददगार साबित होती हैं. रेगिस्तानी इलाकों में पानी की किल्लत होती है और दूर-दूर तक पेड़-पौधे नाममात्र के होते हैं, हरियाली की इसी कमी की वजह से सूरज की सीधी धूप बिना की बाधा के सीधे रेतीली जमीन पर पड़ती है. वहीं रात के वक्त इन पौधों के न होने की वजह से तापमान को थामने वाला कोई माध्यम नहीं बचता है, जिससे कि मौसम का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है और दिन-रात के पारे में भारी अंतर दिखता है.

सहारा रेगिस्तान में शून्य से नीचे पारा

रेगिस्तानी तापमान का सबसे खतरनाक उतार-चढ़ाव दुनिया के सबसे गर्म सहारा मरुस्थल में देखने को मिलता है. सहारा में भौगोलिक परिस्थितियां चरम पर होती हैं, इसलिए वहां दिन का तापमान अक्सर 50 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान सीधे माइनस में 4 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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