किस देश में कैसे दी जाती है मौत की सजा? SC में याचिका के बीच जानें
Death Penalty In Countries: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में फांसी के जरिए मृत्युदंड को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है. लेकिन दुनिया भर के 55 देशों में आज भी कई खतरनाक तरीकों से मृत्युदंड दिया जाता है.

- भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को संवैधानिक माना।
- विश्व के 55 देशों में मृत्युदंड के कई तरीके प्रचलित हैं।
- फांसी, जहरीला इंजेक्शन, इलेक्ट्रिक चेयर प्रमुख प्रचलित विधियां हैं।
- नाइट्रोजन गैस, गोलीबारी, सिर कलम भी कुछ देशों में।
Death Penalty In Countries: भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के जरिए दी जाने वाली मौत की सजा की जगह कम दर्दनाक तरीकों, जैसे जहरीला इंजेक्शन लगाने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. अदालत ने फांसी के संवैधानिक आधार को सही ठहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि देश में मृत्युदंड के लिए फांसी का तरीका ही जारी रहेगा. भारत में क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC 1973) की धारा 354(5) के तहत गर्दन से तब तक लटकाने का प्रावधान है जब तक व्यक्ति की मौत न हो जाए. दुनिया भर में करीब 55 देशों में आज भी मृत्युदंड लागू है, चलिए जानें कि वहां कैसे-कैसे मौत की सजा दी जाती है.
भारत में कब से चली आ रही फांसी की प्रक्रिया?
फांसी देना मृत्युदंड का सबसे पुराना और आम तरीका है, जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, इराक, जापान और मलेशिया जैसे कई एशियाई व अफ्रीकी देशों में लागू है. भारत में ब्रिटिश काल से चली आ रही इस व्यवस्था को बनाए रखा गया है, जिसमें 1872 में इजाद लॉन्ग ड्रॉप तकनीक का प्रयोग होता है. इस प्रक्रिया में दोषी की लंबाई और वजन के हिसाब से रस्सी की लंबाई तय की जाती है, ताकि फंदे पर लटकते ही गर्दन की हड्डी तुरंत टूट जाए और दर्द कम हो.
फांसी देने से एक दिन पहले दोषी के वजन के बराबर की बोरी लटकाकर जांच की जाती है. स्वतंत्र भारत में सबसे पहली फांसी महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को दी गई थी. वहीं, ईरान जैसे देशों में कई बार क्रेन पर लटकाकर सार्वजनिक रूप से भी फांसी दी जाती है.
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जहरीले इंजेक्शन से मौत
मृत्युदंड देने का एक अन्य चर्चित तरीका जहरीला इंजेक्शन है, जिसे मुख्य रूप से चीन, अमेरिका और वियतनाम में इस्तेमाल किया जाता है. इसे अक्सर कम दर्दनाक और तकनीकी रूप से साफ-सुथरा माना जाता है. इस प्रक्रिया में कैदी के शरीर में तीन अलग-अलग प्रकार के रसायन दिए जाते हैं. पहला केमिकल कैदी को पूरी तरह से बेहोश करता है, दूसरा केमिकल मांसपेशियों और फेफड़ों को लकवाग्रस्त कर देता है, और तीसरा केमिकल सीधे दिल की धड़कन बंद कर देता है.
हालांकि, यदि दवाओं की मात्रा या नस मिलने में कोई चूक हो जाए, तो कैदी की मौत तुरंत होने के बजाय वह काफी देर तक तड़पता रह जाता है, जिसके कारण यह तरीका भी विवादों में रहता है.
इलेक्ट्रिक चेयर और नाइट्रोजन गैस से मृत्युदंड
अमेरिका के कई राज्यों में मृत्युदंड देने के लिए बिजली के झटके (इलेक्ट्रिक चेयर) का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कैदी के बाल काटकर उसे विशेष कुर्सी पर बांध दिया जाता है, फिर उसके सिर पर नम स्पंज रखकर एक धातु की टोपी पहनाई जाती है. इसके बाद कैदी को 500 से 2000 वोल्ट तक का इलेक्ट्रिक करंट लगभग 30 सेकंड के अंतराल पर तब तक दिया जाता है, जब तक कि डॉक्टर उसकी मृत्यु की पुष्टि न कर दे.
इसके अलावा, अमेरिका के कुछ राज्यों में नाइट्रोजन हाइपोक्सिया का नया तरीका भी शुरू किया गया है, जिसमें कैदी को सिर्फ नाइट्रोजन गैस सांस के जरिए दी जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है और कैदी दम घुटने से दम तोड़ देता है.
गोलियों से भूनने की सजा
सैनिक कानून या कुछ देशों की प्रशासनिक व्यवस्था में फायरिंग स्क्वॉड का इस्तेमाल किया जाता है. चीन, इंडोनेशिया, उत्तर कोरिया, सोमालिया, यमन और सऊदी अरब जैसे देशों में अपराधियों को गोलियों से भूनने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया में दोषी को किसी खंभे या कुर्सी से बांध दिया जाता है और उसकी आंखों पर काली पट्टी बांध दी जाती है. इसके बाद लगभग 20 फीट की दूरी पर खड़े पांच सशस्त्र निशानेबाज सीधे अपराधी के दिल को निशाना बनाकर एक साथ गोली चलाते हैं. यदि निशानेबाजों का निशाना किसी कारणवश चूक जाता है, तो कैदी अत्यधिक खून बहने के कारण दम तोड़ देता है.

सऊदी अरब में तलवार से सिर कलम करने की प्रथा
सऊदी अरब दुनिया का अकेला ऐसा देश रहा है जहां साल 2022 तक आधिकारिक रूप से सार्वजनिक रूप से सिर कलम करके मौत की सजा दी जाती रही है. इसमें दोषी व्यक्ति के हाथ पीछे बांधकर उसकी आंखों पर पट्टी बांधी जाती है और उसे सफेद कपड़े पहनाकर सार्वजनिक स्थान पर लाया जाता है. इसके बाद सरकारी जल्लाद भारी धारदार तलवार के एक ही वार से अपराधी का सिर धड़ से अलग कर देता है.
दुनिया के तीन-चौथाई से अधिक विकसित देशों ने मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए अपने यहां मृत्युदंड को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान, सऊदी अरब, मिस्र और अमेरिका में आज भी सबसे ज्यादा मौत की सजाएं दी जाती हैं.
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