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पृथ्वी के अंदर कितनी गहराई तक पहुंच पाया इंसान, कहां सबसे गहरा प्वाइंट?

Deepest Point on Earth: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर पृथ्वी के अंदर कितनी गहराई तक खुदाई की जा चुकी है. आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

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  • कोला बोरहोल 12.2 किमी गहरा, वैज्ञानिक रिसर्च हेतु शुरू हुआ।
  • उच्च तापमान, दबाव ने ड्रिलिंग को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया।
  • अंदर गर्म पानी, प्राचीन सूक्ष्म जीवाश्म और गैसें मिलीं।

Deepest Point on Earth: पृथ्वी पर अब तक बनाया गया सबसे गहरा कृत्रिम पॉइंट रूस में कोला सुपरडीप बोरहोल है. यह सतह से लगभग 12262 मीटर या 12.2 किलोमीटर नीचे तक जाता है. लेकिन इतनी गहराई तक पहुंचना सिर्फ और गहरा ड्रिल करने से काफी ज्यादा मुश्किल था. साथ ही वहां हुई खोजों ने वैज्ञानिक धारणाओं को भी चुनौती दी.

कोला सुपरडीप बोरहोल

सोवियत संघ ने 1970 में उस जगह पर कोला सुपरडीप बोरहोल प्रोजेक्ट शुरू किया जो अब रूस का हिस्सा है. तेल या फिर गैस निकालने के लिए बनाए जाने वाले आम ड्रिलिंग प्रोजेक्ट के उलट यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से वैज्ञानिक रिसर्च के लिए शुरू किया गया था. 

वैज्ञानिक पृथ्वी की पपड़ी का अध्ययन करना चाहते थे और यह समझना चाहते थे कि ग्रह की सबसे बाहरी चट्टानी परत के नीचे क्या है. यह प्रोजेक्ट कई दशकों तक चला और आखिरकार इसने इंसानों द्वारा पहुंचा गया तक का सबसे गहरा कृत्रिम बिंदु बनाया. हालांकि जैसे-जैसे तापमान और दबाव बढ़ा और गहरा ड्रिल करना मुश्किल होता गया.


पृथ्वी के अंदर कितनी गहराई तक पहुंच पाया इंसान, कहां सबसे गहरा प्वाइंट?

ड्रिल करना इतना मुश्किल क्यों था?

सबसे बड़ी चुनौती में से एक थी ड्रिलिंग इक्विपमेंट का काफी ज्यादा वजन. जैसे-जैसे ड्रिल नीचे जाती थी हजारों टन स्टील के पाइप और केबल को संभालना और कंट्रोल करना पड़ता था. ड्रिल को सही सीध में रखना और साथ ही चट्टान के सैंपल को सतह पर वापस लाना काफी मुश्किल काम हो गया था. इतनी गहराई पर छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें भी ऑपरेशन को रोक सकती थी.

तापमान भी उम्मीद से ज्यादा निकला

सतह से लगभग 12 किलोमीटर नीचे तापमान लगभग 180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. ऐसे मुश्किल हालातों में आसपास की चट्टानों ने वैसा व्यवहार नहीं किया जैसा रिसचर्स ने सोचा था. चट्टान सख्त रहने के बजाय गर्मी और दबाव की वजह से लचीली हो गई.

इससे एक और बड़ी समस्या पैदा हुई. ड्रिल के छेद बनाने के बाद आसपास की चट्टानें अपने आकार बदलने लगी और छेद को फिर से बंद करने लगी. इससे आगे ड्रिल करना मुश्किल हो गया.


पृथ्वी के अंदर कितनी गहराई तक पहुंच पाया इंसान, कहां सबसे गहरा प्वाइंट?

वैज्ञानिकों ने जमीन के नीचे क्या खोज? 

इस प्रोजेक्ट से कई शानदार खोज सामने आई. एक बड़ी खोज थी पृथ्वी की पापड़ी के अंदर काफी ज्यादा मात्रा में गर्म और खनिजों से भरपूर पानी का मिलना. वैज्ञानिकों का ऐसा मानना था कि ऐसे हालातों में पानी नहीं हो सकता. यह पानी सिर्फ सतह का पानी नहीं था जो नीचे चला गया हो. यह चट्टान के अंदर होने वाले केमिकल प्रक्रिया से जुड़ा था. 

रिसचर्स ने लगभग 6 से 7 किलोमीटर की गहराई पर माइक्रोफॉसिल भी खोजे. सूक्ष्मजीवों की लगभग 24 अलग-अलग प्रजातियों के जीवाश्म मिले. इनमें से कुछ अरबों साल पुराने थे. इतनी ज्यादा गहराई पर उनके जीवित रहने और सुरक्षित बचे रहने से पृथ्वी के प्राचीन वैज्ञानिक इतिहास के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिली. 

एक और खोज गैस से जुड़ी थी. जमीन के नीचे बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन, हीलियम और मीथेन गैस निकलती हुई पाई गई. इससे वैज्ञानिकों को पृथ्वी की पापड़ी के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया को समझने में मदद मिली. 

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क्या मरियाना ट्रेंच कोला बोरहोल से ज्यादा गहरी है? 

यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या मापा जा रहा है. पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित मरियाना ट्रेंच पृथ्वी के महासागरों का सबसे गहरा ज्ञात हिस्सा है. इसका सबसे गहरा बिंदु चैलेंजर डीप कहा जाता है. यह समुद्र तल से लगभग 11 किलोमीटर नीचे है. 

यह ट्रेंच लगभग 2550 किलोमीटर तक फैली हुई है और काफी ज्यादा गहराई तक जाती है. हालांकि कोला सुपरडीप बोरहोल वह सबसे गहरा बिंदु बना हुआ है जहां इंसानों ने कृत्रिम रूप से पृथ्वी की पपड़ी में ड्रिलिंग की है. आसान शब्दों में कहें तो चैलेंजर डीप समुद्र तल से ज्यादा गहरा है लेकिन कोला ठोस पृथ्वी में इंसानों द्वारा की गई सबसे गहरी खुदाई को दर्शाता है.

चैलेंजर डीप में हालात कैसे हैं? 

चैलेंजर डीप में हालात धरती पर सबसे कठिन और चरम स्थिति में से एक हैं. समुद्र के सतह से लगभग 11 किलोमीटर नीचे सूरज की रोशनी बिल्कुल नहीं पहुंचती. सामान्य समुद्री स्थिति में सूरज की रोशनी सिर्फ 200 मीटर तक ही पहुंच पाती है. इससे गहरे समुद्र में हमेशा अंधेरा ही रहता है. वहां पानी भी काफी ठंडा होता है. यहां पानी आमतौर पर लगभग 1 डिग्री सेल्सियस से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच ठंडा होता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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