Dead Body Sweating: क्या गर्मी में लाश को भी आ सकता है पसीना, जानें क्या कहता है विज्ञान?
Dead Body Sweating: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या गर्मी में लाश को भी पसीना आ सकता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

- मृत शरीर पर दिखती बूंदें वास्तव में पसीना नहीं होता।
- पसीना निकलने के लिए सक्रिय तंत्रिका, ऊर्जा और रक्तसंचार चाहिए।
- मृत्यु पश्चात ये सभी आवश्यक जैविक प्रक्रियाएँ पूरी तरह रुक जाती हैं।
Dead Body Sweating: कभी-कभी लोग शव पर पानी की बूंदे देखते हैं और यह सोचते हैं कि शरीर से पसीना निकल रहा है. लेकिन विज्ञान ऐसा कहता है कि यह मुमकिन ही नहीं है. पसीना आना एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है जो सिर्फ जिंदा शरीर में ही हो सकता है. मौत के बाद शरीर के जरूरी सिस्टम पूरी तरह से काम करना बंद कर देते हैं. इस वजह से पसीना बनना नामुमकिन हो जाता है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
क्या लाश से पसीना निकल सकता है?
इसका सीधा सा जवाब है नहीं. मौत के बाद शव से पसीना नहीं निकल सकता. ऐसा इसलिए क्योंकि पसीना आने के लिए एक्टिव नर्वस सिस्टम, काम करने वाली कोशिका, ब्लड सर्कुलेशन और एनर्जी प्रोडक्शन की जरूरत होती है.
एक बार जब कोई इंसान मर जाता है तो ये बायोलॉजिकल सिस्टम हमेशा के लिए काम करना बंद कर देते हैं. यानी शरीर पसीना बनाने की अपनी क्षमता को पूरी तरह से खो देता है. फिर भले ही आसपास का माहौल कितना भी गर्म क्यों ना हो.
मौत के बाद पसीना क्यों नहीं आता?
पसीना आने की प्रक्रिया हाइपोथैलेमस के द्वारा कंट्रोल की जाती है. यह दिमाग का एक हिस्सा है और शरीर के तापमान को रेगुलेट करने के लिए जिम्मेदार होता है. मौत के बाद दिमाग तुरंत काम करना बंद कर देता है. इस वजह से पसीने की ग्रंथियों को पसीना निकालने के लिए जरूरी नर्व सिग्नल नहीं मिल पाता. इन सिग्नल के बिना शरीर का कूलिंग मेकैनिज्म हमेशा के लिए बंद हो जाता है.
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एनर्जी नहीं तो पसीना भी नहीं
इंसानी शरीर की हर कोशिका को जरूरी काम करने के लिए एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट की जरूरत होती है. इसमें पसीने की ग्रंथियों को चलाना भी शामिल होता है. मौत होने पर एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट काम करना बंद कर देता है क्योंकि ऑक्सीजन का सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज्म खत्म हो जाता है. इसके बिना पसीने की ग्रंथियां त्वचा पर पानी पंप नहीं कर सकती.
ब्लड सर्कुलेशन भी रुक जाता है
पसीना बनाने की प्रक्रिया काम करने वाले सर्कुलेटरी सिस्टम पर निर्भर होती है. जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो पूरे शरीर में खून का बहना रुक जाता है. इस सर्कुलेशन के बिना तरल पदार्थ को पसीने की ग्रंथियों तक ठीक से नहीं पहुंचाया जा सकता. इस वजह से बायोलॉजिकली पसीना आना नामुमकिन बन जाता है.
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