Oldest MLA Bengal: इस पार्टी के टिकट पर जीता बंगाल का सबसे बुजुर्ग विधायक, जान लें उनकी उम्र
Oldest MLA Bengal: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में शोभनदेव चट्टोपाध्याय बीएससी सागर की उम्र में राज्य की सबसे उम्रदराज मौजूदा विधायक बने हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में पूरी जानकारी.

- 82 वर्षीय शोभनदेव चट्टोपाध्याय बने बंगाल के सबसे उम्रदराज विधायक।
- उन्होंने टीएमसी के गढ़ बालीगंज से चुनाव जीता।
- चट्टोपाध्याय 1998 से पार्टी के साथ जुड़े हैं।
- उन्होंने सरकार में मंत्री के तौर पर अहम भूमिका निभाई।
Oldest MLA Bengal: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. वहीं इसके बावजूद भी पार्टी के एक अनुभवी नेता ने इतिहास रच दिया है. शोभनदेव चट्टोपाध्याय 82 वर्ष की आयु में राज्य के सबसे उम्रदराज मौजूदा विधायक के रूप में उभरे हैं. उन्होंने हाई प्रोफाइल बालीगंज निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है और बंगाल की सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाली राजनीतिक हस्तियों में से एक के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को और भी मजबूत किया है.
एक हाई प्रोफाइल सीट से जीत
कोलकाता में स्थित बालीगंज को लंबे समय से राजनीतिक रूप से जरूरी और प्रतिष्ठित निर्वाचन क्षेत्र माना जाता रहा है. अपनी प्रभावशाली मतदाता आधार और शहरी स्वरूप के लिए जाने जाने वाली यह सीट लगभग दो दशकों से टीएमसी का गढ़ रही है. 2026 के विधानसभा चुनाव में इस निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करके शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने ना सिर्फ पार्टी की पकड़ बनाए रखी बल्कि अपने करियर में एक और मील का पत्थर जोड़ा है. 30 जनवरी 1944 को जन्मे शोभनदेव चट्टोपाध्याय वर्तमान में 82 साल के हैं.
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दशकों तक फैला राजनीतिक सफर
शोभनदेव चट्टोपाध्याय का टीएमसी के साथ जुड़ाव पार्टी के शुरुआती दिनों से ही रहा है. उन्हें 1998 में पार्टी के पहले निर्वाचित विधायक होने का गौरव प्राप्त है. यह वह समय था जब पार्टी अभी भी अपना आधार बना रही थी. इन सालों में उन्होंने कई निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और हर बार जीत हासिल करने में कामयाब रहे.
सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका
अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. उन्होंने कृषि और संसदीय मामलों जैसे विभागों में मंत्री के रूप में काम किया है. इसी के साथ पश्चिम बंगाल में नीति निर्माण और विधाई प्रक्रियाओं में भी बड़ी भूमिका निभाई है.
बालीगंज की राजनीतिक विरासत
बालीगंज सीट का अपना खुद का एक समृद्ध राजनीतिक इतिहास रहा है. एक समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम) का दबदबा रहा यह क्षेत्र 2006 के बाद टीएमसी का गढ़ बन गया. 2011 से 2021 तक इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व दिवंगत सुब्रत मुखर्जी ने किया. उनके बाद बाबुल सुप्रियो ने इस जिम्मेदारी को संभाला. इस बार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को मैदान में उतरकर टीएमसी ने अनुभव पर भरोसा जताया.
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Source: IOCL
























