Monsoon Mandir: कानपुर का ये मंदिर करता है मौसम की भविष्यवाणी, जानें कैसे पता चलता है कब आएगा मानसून?
Monsoon Mandir: क्या आप जानते हैं उत्तर प्रदेश में है एक ऐसा मंदिर जो करता है मौसम की भविष्यवाणी? क्या है इसके पीछे रहस्य सिर्फ क्लिक में जान लीजिए इस मानसून मंदिर का छिपा हुआ राज.

Monsoon Mandir Kanpur: कानपुर का जगन्नाथ मंदिर दुनिया भर में मानसून मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. माना जाता है किइसके गर्भगृह की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें बारिश के आगमन की सटीक भविष्यवाणी करती हैं. उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के भीतरगांव ब्लॉक के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित यह मंदिर विज्ञान, आस्था और रहस्य का एक अनूठा संगम है, जहां आधुनिक मौसम विज्ञान के हाईटेक उपकरणों के दौर में भी यह प्राचीन मंदिर विज्ञान को चुनौती दे रहा है. वहीं, स्थानीय किसान और ग्रामीण लोग मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए सदियों से इसी ऐतिहासिक मंदिर पर भरोसा करते आ रहे हैं.
यह ऐतिहासिक मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित है. मंदिर की बनावट बौद्ध स्तूप जैसी दिखाई देती है. इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के काल में हुआ था. हालांकि, कुछ पुरातत्वविद् इसकी बनावट को देखकर इसे सम्राट अशोक के काल का भी मानते हैं. इसके साथ ही मंदिर की दीवारें काफी मोटी हैं, जिन्हें बनाने में विशेष प्रकार के पत्थरों और ईंटों का उपयोग किया गया है. साथ ही मंदिर में भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की काले पत्थर की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं.
कैसे होती है मौसम की भविष्यवाणी?
इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य इसकी छत से पानी टपकना है. जून के महीने में, जब चिलचिलाती धूप और उमस होती है, तब मंदिर के गर्भगृह की छत पर लगे पत्थर से अचानक पानी की बूंदें टपकने लगती हैं. अगर बूंदें बड़ी और तेजी से गिरती हैं तो यह भारी और अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है, जबकि बूंदों का आकार छोटा होना सूखे की आशंका को दर्शाता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे ही आसमान में बादल छाते हैं और असल में बारिश शुरू होती है, वैसे ही मंदिर की छत से पानी टपकना पूरी तरह बंद हो जाता है.
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विज्ञान के लिए अनसुलझी गुत्थी
पुरातत्व विभाग और कई वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए कई बार शोध किए हैं. मंदिर के आसपास खुदाई भी की गई, लेकिन आज तक वैज्ञानिक इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए कि बिना किसी रिसाव या बाहरी स्रोत के केवल मानसून आने से ठीक 7 से 15 दिन पहले ही छत से पानी कैसे टपकता है. यह अद्भुत घटना आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है.
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Source: IOCL
























