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Toothpaste History: जब‌ कोलगेट नहीं था तब अपने दांत कैसे साफ करते थे लोग, जानें किन चीजों का किया जाता था इस्तेमाल?

Toothpaste History: टूथपेस्ट आने से काफी पहले भी लोग अपने दांत साफ करते थे. आइए जानते हैं कि उस वक्त किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता था.

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  • नमक, सरसों का तेल और हर्बल पाउडर से मंजन बनता।

Toothpaste History: आज टूथपेस्ट से दांत ब्रश करना दुनिया भर में लाखों लोगों की रोज की आदत बन गया है. कोलगेट जैसे ब्रांड आधुनिक जीवन का एक जरूरी हिस्सा माने जाते हैं. लेकिन टूथपेस्ट ट्यूब और प्लास्टिक के टूथब्रश आने से काफी पहले भी लोग अपने आसपास मौजूद प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करके अपने दांतों को साफ रखने और मुंह की सफाई बनाए रखने के असरदार तरीका ढूंढ लेते थे. 

दातुन था दांत साफ करने का प्राकृतिक तरीका 

भारत में दांत साफ करने के सबसे पुराने और आम तरीकों में से एक था दातुन का इस्तेमाल. इसमें नीम, बबूल और आम जैसे औषधीय पेड़ों की छोटी टहनियों को चबाया जाता था. लोग टहनी के सिरे को तब तक चबाते थे जब तक वह ब्रश जैसा ना बन जाए और फिर उसका इस्तेमाल अपने दांतों और मसूड़े को साफ करने के लिए करते थे. नीम और बाबुल को उनके प्राकृतिक बैक्टीरिया रोधी गुणों की वजह से खास अहमियत दी जाती थी.

कोयल और लकड़ी की राख का इस्तेमाल 

आधुनिक टूथपेस्ट आने से पहले लोग आमतौर पर अपने दांतों को रगड़कर साफ करने के लिए कोयले का पाउडर या फिर लकड़ी की राख का इस्तेमाल करते थे. कोयला एक प्राकृतिक रगड़ने वाली चीज के तौर पर काम करता था जो दातों की ऊपरी सतह से दाग धब्बे और पीलापन हटाने में मदद करता था. 

गांव और पुराने जमाने के घरों में लकड़ी के चूल्हे में जली हुई लकड़ी से मिली राख का इस्तेमाल कभी-कभी दांत ब्रश करने के लिए किया जाता था. क्योंकि यह दांत को असरदार तरीके से साफ कर सकती थी. दिलचस्प बात यह है कि हाल के सालों में कोयले से बना टूथपेस्ट एक बार फिर से लोकप्रिय हो गया है. 

नमक और सरसों के तेल का इस्तेमाल 

दांत साफ करने का एक और पारंपरिक तरीका था सेंधा नमक को सरसों के तेल में मिलाकर इस्तेमाल करना. इस मिश्रण को उंगलियों की मदद से धीरे-धीरे दांत और मसूड़े पर मला जाता था. लोगों का ऐसा मानना था कि इससे मसूड़े में खून का बहाव बेहतर होता है और मुंह से नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं. 

हर्बल पाउडर और मंजन की भूमिका 

व्यावसायिक टूथपेस्ट के आने से पहले घर में बने हर्बल टूथ पाउडर काफी लोकप्रिय थे. उन्हें मंजन के नाम से जाना जाता था. परिवार सूखे पुदीने की पत्तियां, लौंग, दालचीनी, मुलेठी, और फिटकरी को पीसकर इस पाउडर को बनाते थे. हर सामग्री मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक बड़ी भूमिका निभाती थी.

यह भी पढ़ेंः क्या स्पेस में भी होता है सूर्यास्त और सूर्योदय,‌ जानें अंतरिक्ष यात्रियों को यह कैसे आता है नजर?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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