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खूबसूरत हसीनाओं से भरे इन देशों में कम पड़ गए मर्द, शादी के लिए तरस रही हैं यहां की लड़कियां

कई देश ऐसे हैं जहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से काफी ज्यादा हो गई है. इस गंभीर लैंगिक असंतुलन की वजह से इन देशों की लड़कियों को शादी के लिए लाइफ पार्टनर ढूंढने में भारी परेशानी हो रही है.

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  • लातविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा में भी पुरुषों की संख्या में गिरावट.

दुनिया के नक्शे पर लैंगिक असमानता को लेकर एक दौर में भारत को काफी ताने सुनने पड़ते थे, लेकिन आज हमारे देश में स्थिति काफी सुधर चुकी है. इसके उलट, वैश्विक स्तर पर कई ऐसे देश हैं जहां का जनसंख्या संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है. इन देशों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी इतनी ज्यादा हो गई है कि वहां की लड़कियों को शादी के लिए अपना लाइफ पार्टनर ढूंढने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. कई कारणों की वजह से इन खूबसूरत देशों में मर्दों की भारी कमी हो गई है.

हांगकांग में महिलाओं की बड़ी तादाद

एशिया के प्रमुख आर्थिक केंद्र हांगकांग में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफी ज्यादा है. यहां प्रति 1 पुरुष पर 1.16 महिलाओं का अनुपात दर्ज किया गया है. इस लैंगिक असंतुलन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं. पहला कारण यह है कि यहां बहुत बड़ी संख्या में विदेशी महिला घरेलू कामगार आकर रहती हैं. इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण यह है कि पुरुषों की तुलना में यहां महिलाओं की औसत उम्र काफी लंबी होती है, जिससे बुजुर्गों की आबादी में यह अंतर और ज्यादा साफ नजर आता है.

रूस में मर्दों की भारी किल्लत

रूस दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां लैंगिक असंतुलन का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है. रूस में लगभग हर आयु वर्ग में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से बहुत अधिक है, और यहां प्रति 1 पुरुष पर 1.15 महिलाएं हैं. इस असंतुलन के पीछे रूसी पुरुषों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं, विभिन्न हादसों और दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें तथा ऐतिहासिक रूप से पुराने युद्धों का गहरा प्रभाव शामिल है, जिसने पुरुषों की आबादी को समय के साथ काफी कम कर दिया है. 

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जिबूती में रोजगार के कारण बिगड़ा अनुपात

अफ्रीकी देश जिबूती की कुल आबादी पर नजर डालें तो यहां महिलाओं की संख्या लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. जिबूती में पुरुषों और महिलाओं का अनुपात 1:2 के स्तर पर आ गया है, यानी महिलाओं की तुलना में पुरुष आधे रह गए हैं. इस भयंकर अंतर की मुख्य वजह यह है कि यहां के स्थानीय पुरुष बहुत बड़ी तादाद में रोजगार और काम की तलाश में खाड़ी देशों (मिडिल ईस्ट) की तरफ चले जाते हैं. दशकों से चल रहे इस पलायन के कारण यहां के शहरों में शादियों के लिए पुरुषों की भारी कमी हो गई है. 

बेलारूस में बुजुर्ग आबादी का असंतुलन

रूस के पड़ोसी देश बेलारूस में भी ठीक रूस जैसी ही गंभीर जनसांख्यिकीय स्थिति बनी हुई है. बेलारूस के शहरों और खासकर वहां की बुजुर्ग आबादी में महिलाओं की संख्या बहुत बड़े बहुमत में है. यहां प्रति 1 पुरुष पर 1.15 महिलाओं का अनुपात पाया जाता है. बेलारूस में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा यानी जीने की औसत आयु महिलाओं के मुकाबले काफी कम है. इसी वजह से बढ़ती उम्र की आबादी में पुरुषों की कमी हो गई है और लड़कियां शादी के लिए योग्य पार्टनर्स की कमी से जूझ रही हैं. 

प्यूर्टो रिको से अमेरिका पलायन का असर

कैरेबियाई क्षेत्र में स्थित प्यूर्टो रिको में भी महिलाओं की आबादी पुरुषों से काफी आगे निकल चुकी है. यहां प्रति 1 पुरुष पर 1.12 महिलाओं का अनुपात दर्ज है. इस आबादी के बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां के कामकाजी पुरुष बेहतर नौकरी और उज्ज्वल भविष्य के लिए बहुत बड़े पैमाने पर अमेरिका के मेनलैंड (मुख्य भूमि) की तरफ पलायन कर जाते हैं. पुरुषों के इस विस्थापन के बाद प्यूर्टो रिको में ज्यादातर महिलाएं और बुजुर्ग ही बचते हैं, जिससे लड़कियों के लिए स्थानीय स्तर पर शादी के विकल्प सीमित हो गए हैं.

लातविया में पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा

यूरोपीय देश लातविया में लगभग सभी आयु वर्गों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं ज्यादा बनी हुई है. लातविया में पुरुषों और महिलाओं का मौजूदा अनुपात प्रति 1 पुरुष पर 1.15 महिलाओं का है. यहां के समाज में पुरुषों के बीच स्वास्थ्य संबंधी गंभीर लापरवाही और विभिन्न बीमारियों के कारण उनकी मृत्यु दर काफी अधिक रही है. कम आयु में ही पुरुषों की मृत्यु हो जाने और उनकी औसत उम्र कम होने के चलते समय के साथ लातविया में यह लैंगिक अंतर लगातार गहराता चला गया है.

लिथुआनिया में सेहत की अनदेखी से संकट

लातविया की तरह उसके पड़ोसी देश लिथुआनिया में भी लंबे समय से महिलाओं की आबादी पुरुषों से काफी अधिक बनी हुई है. यहां भी प्रति 1 पुरुष पर 1.16 महिलाओं का अनुपात है, जो खासकर बुजुर्गों की श्रेणी में बहुत ज्यादा स्पष्ट दिखता है. लिथुआनियाई पुरुषों में अपनी सेहत को लेकर लापरवाही, स्वास्थ्य संबंधी बड़ी कमियां और महिलाओं के मुकाबले कम जीवन प्रत्याशा होने के चलते देश में पुरुषों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जिससे शादियों के बाजार पर सीधा असर पड़ा है. 

मोल्दोवा में गांवों से मर्दों का पलायन

पूर्वी यूरोपीय देश मोल्दोवा में लैंगिक अनुपात बिगड़ने की वजह आर्थिक तंगी और पलायन है. यहां के पुरुष रोजगार और बेहतर कमाई की चाह में बड़ी संख्या में अन्य समृद्ध यूरोपीय देशों में जाकर बस जाते हैं. दूसरी तरफ, मोल्दोवा की महिलाएं अपने गांवों और शहरों में ही रहकर जीवन बिताती हैं. पुरुषों के इस एकतरफा पलायन की वजह से मोल्दोवा में प्रति 1 पुरुष पर 1.12 महिलाओं का अनुपात हो गया है, जिससे शादी योग्य युवतियों को अकेलापन झेलना पड़ रहा है. 

बहामास की छोटी आबादी में बड़ा अंतर

बहामास जैसे खूबसूरत द्वीपीय देश में भी महिलाओं की आबादी पुरुषों के मुकाबले थोड़ी अधिक बनी हुई है. बहामास का लिंगानुपात प्रति 1 पुरुष पर 1.16 महिलाओं का है. दरअसल, बहामास की कुल जनसंख्या काफी छोटी है, और जनसांख्यिकी के नियमों के अनुसार छोटे देशों की आबादी में मामूली सा बदलाव भी बड़ा असर दिखाता है. यहां महिलाओं की लंबी उम्र और पुरुषों के अन्य देशों में विस्थापन के चलते लड़कियों के लिए जीवनसाथी तलाशना एक बड़ी चुनौती बन चुका है. 

एंगुइला में भी महिलाओं का दबदबा

कैरेबियन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे से ब्रिटिश क्षेत्र एंगुइला में भी पुरुषों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है. एंगुइला में पुरुषों और महिलाओं का अनुपात प्रति 1 पुरुष पर 1.14 महिलाओं का है. इस छोटे से इलाके में भी पर्यटन और अन्य व्यवसायों के सिलसिले में पुरुषों के बाहर चले जाने और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की जीवन प्रत्याशा अधिक होने के कारण लैंगिक संतुलन प्रभावित हुआ है, जिससे यहां की युवतियों को शादी के लिए उपयुक्त वर नहीं मिल पा रहे हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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